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बांस की खेती से बाढ़ रोकने में मिलेगी मदद, खेतों से कम होगी नमक की मात्रा

Fri, 25 Sep 2020 12:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2020 12:33 AM IST
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bamboo farming helps to control  flood
किसानों के एफपीओ बनाने के लिए हुई कार्यशाला में बोलते सीडीओ अरविंद सिंह - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। नकहा ब्लॉक में किसानों का समूह (एफपीओ) बनाकर खेती करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए सीडीओ अरविंद सिंह ने कहा कि गांव में बाढ़ को रोकने के लिए बांस की खेती काफी मददगार साबित हो सकती है। इससे खेतों में बढ़ रही नमक की मात्रा भी कम होगी और बांस के उत्पादन से किसानों को लाभ भी मिलेगा।
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ब्लॉक सभागार में प्रगतिशील किसानों की कार्यशाला हुई, जिसमें उन्हें खाद्य उत्पादक संघ (एफपीओ) बनाने के लिए प्रेरित किया गया। सीडीओ ने कहा कि बांस जिसे हरा सोना कहा जाता है और आधुनिक कृृषि का प्रतीक है। यह अन्य फसलों की अपेक्षा खेती में कई गुना अधिक लाभ कमाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि दो ग्राम पंचायतें खानीपुर और रेहरिया खुर्द बाढ़ से प्रभावित रहती हैं। ऐसे में कटान को रोकने के लिए और स्थायी कृषि में बांस की खेती बहुत कारगर है। ऐसे क्षेत्र जहां नहर के कारण जलभराव की स्थिति रहती है, वहां भी बांस की खेती लाभदायक है। एक बार इसका रोपण करने के बाद करीब 40 वर्षों तक बिना कुछ किए प्रत्येक वर्ष किसान स्वत: आय अर्जित करते रहते हैं। सीडीओ ने कहा कि 30 सितंबर 2020 को किसानों के एक दल को प्रशिक्षण के लिए सीतापुर भेजा जाएगा, जहां पर उनका ज्ञानवर्धन होगा। उन्होंने कहा कि एफपीओ के माध्यम से किसान सीधे बाजार से जुड़ेंगे और बिचौलियों से निजात मिलेगी। इससे उन्हें बांस के विक्रय का पूरा मूल्य सीधे प्राप्त हो सकेगा। कार्यशाला में प्रमुख पवन गुप्ता, बीडीओ संतोष कुमार आदि मौजूद रहे।
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