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अधिकारियों ने दिए टिप्स
अमर उजाला ब्यूरो/पलियाकलां।
Updated Fri, 03 Jun 2016 11:05 PM IST
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बैठक
- फोटो : अमर उजाला
तीन दिन चलेगी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो भारत सरकार की कार्यशाला
दुधवा टाइगर रिजर्व एवं एनटीसीए के सहयोग से दुधवा में तीन दिनी प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन वन्यजीवों से जुड़े अपराधों को रोकने के संबंध में टिप्स दिए गए।
दुधवा के सभागार में भारत सरकार के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की ओर से दुधवा टाइगर रिजर्व एवं एनटीसीए के सहयोग से आयोजित तीन दिनी कार्यशाला के दूसरे दिन प्रोजेक्टर के माध्यम से पीलीभीत के फारेस्ट एडवोकेट पीपी सिंह, स्पेशल टास्क फोर्स लखनऊ के एसपी डॉ. अनिल चतुर्वेदी, बरेली के फील्ड निदेशक वीके चोपड़ा ने बताया कि वन्यजीव अपराध को रोकना जितना जरूरी है उससे ज्यादा जरूरी है अपराधों का अंवेषण करके उसके लीगल पहलू वाइल्ड लाइफ फोरेसिंक जांच के लिए साक्ष्यों को सहेजना। बताया कि अपराधों को रोकने में स्थानीय वन अधिकारियों की कम जानकारी भी दिक्कत पैदा करती है उन्हें पहलुओं के बारे में ज्यादा पता नहीं होता जिससे केस कमजोर हो जाता है। प्रशिक्षण में बताया गया कि वन्यजीवोें से जुड़े अपराधों को सही तरह से हल करने का आसान तरीका यहीं है कि हम वन अपराधों की धाराओं के बारे में अच्छी तरह से जान लें। इस दौरान नार्थ खीरी पीलीभीत टाइगर रिजर्व, बहराइच करतनिया घाट वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी के अधिकारी, साउथ खीरी आदि के अधिकारी मौजूद रहे।
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अंतिम दिन तैयार होगा मॉक क्राइम सीन
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की कार्यशाला के अंतिम दिन मॉक क्राइम सीन तैयार किया जाएगा। जिसको तैयार करने के बाद दो टीमों का गठन किया जाएगा। इन दो टीमों को और भी कई तरह की जानकारियां देकर उनको वन अपराधों के बारे में सचेत रखने के लिए मॉनीटरिंग की जाएगी।
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45 अधिकारी प्राप्त कर रहे हैं प्रशिक्षण
रिसोर्स पर्सन कैलाश प्रकाश ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला में 45 अधिकारी शामिल हैं। जिनको वन अपराधों के साथ ही अपराधों को रोकने के लिए खुफिया तंत्र के सुदृढ़ीकरण के संबंध में ट्रेनिंग दी जाएगी।
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दुधवा टाइगर रिजर्व एवं एनटीसीए के सहयोग से दुधवा में तीन दिनी प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन वन्यजीवों से जुड़े अपराधों को रोकने के संबंध में टिप्स दिए गए।
दुधवा के सभागार में भारत सरकार के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की ओर से दुधवा टाइगर रिजर्व एवं एनटीसीए के सहयोग से आयोजित तीन दिनी कार्यशाला के दूसरे दिन प्रोजेक्टर के माध्यम से पीलीभीत के फारेस्ट एडवोकेट पीपी सिंह, स्पेशल टास्क फोर्स लखनऊ के एसपी डॉ. अनिल चतुर्वेदी, बरेली के फील्ड निदेशक वीके चोपड़ा ने बताया कि वन्यजीव अपराध को रोकना जितना जरूरी है उससे ज्यादा जरूरी है अपराधों का अंवेषण करके उसके लीगल पहलू वाइल्ड लाइफ फोरेसिंक जांच के लिए साक्ष्यों को सहेजना। बताया कि अपराधों को रोकने में स्थानीय वन अधिकारियों की कम जानकारी भी दिक्कत पैदा करती है उन्हें पहलुओं के बारे में ज्यादा पता नहीं होता जिससे केस कमजोर हो जाता है। प्रशिक्षण में बताया गया कि वन्यजीवोें से जुड़े अपराधों को सही तरह से हल करने का आसान तरीका यहीं है कि हम वन अपराधों की धाराओं के बारे में अच्छी तरह से जान लें। इस दौरान नार्थ खीरी पीलीभीत टाइगर रिजर्व, बहराइच करतनिया घाट वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी के अधिकारी, साउथ खीरी आदि के अधिकारी मौजूद रहे।
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अंतिम दिन तैयार होगा मॉक क्राइम सीन
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की कार्यशाला के अंतिम दिन मॉक क्राइम सीन तैयार किया जाएगा। जिसको तैयार करने के बाद दो टीमों का गठन किया जाएगा। इन दो टीमों को और भी कई तरह की जानकारियां देकर उनको वन अपराधों के बारे में सचेत रखने के लिए मॉनीटरिंग की जाएगी।
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45 अधिकारी प्राप्त कर रहे हैं प्रशिक्षण
रिसोर्स पर्सन कैलाश प्रकाश ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला में 45 अधिकारी शामिल हैं। जिनको वन अपराधों के साथ ही अपराधों को रोकने के लिए खुफिया तंत्र के सुदृढ़ीकरण के संबंध में ट्रेनिंग दी जाएगी।