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खीरी से राजनीतिक ही नहीं पारिवारिक रिश्ता भी रहा है अटल जी का

Sat, 25 Dec 2021 01:14 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 25 Dec 2021 01:14 AM IST
सार

अटल जी की जयंती सुशासन दिवस पर विशेष
 

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Atal ji's relationship with Kheri is not only political but also family.
अपनी नातिन शैलजा के साथ अटल बिहारी वाजपेई।

विस्तार

मोहम्मदी में संघ प्रचारक के रूप में अटलजी ने तीन बार मोहम्मदी में किया था प्रवास
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लखीमपुर खीरी। पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेई का जिले से राजनीतिक ही नहीं पारिवारिक नाता भी रहा है। संघ प्रचारक के रूप में अटल बिहारी बाजपेई ने मोहम्मदी में तीन बार प्रवास किया था। जनसंघ से लेकर भाजपा तक के सफर में वह चुनाव प्रचार के सिलसिले में कई बार जिले में आए। यहां के लोग उनके मंत्रमुग्ध कर देने वाले भाषण के कायल थे। पुराने लोग बताते हैं कि विपक्षी पार्टियों के नेता भी उनका भाषण सुनने आते थे।
मोहम्मदी अटल बिहारी का कार्यक्षेत्र रहा है। सन 1952 में मोहम्मदी में आकर अपने जनसंघ के कार्यकर्ताओं से मिले। इसके बाद 1971 में जनसंघ अध्यक्ष बने। विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि सन 1972 में अटल बिहारी बाजपेई मोहम्मदी से साइकिल से राजापुर बैनी पहुंचे और उनके पिता शिवमंगल सिंह के यहां रात्रि प्रवास किया। इस दौरान उन्होंने भोजन किया तथा जनसंघ पार्टी को गतिशील बनाने पर चर्चा की। उस समय मोहम्मदी से राजापुर बेनी पहुंचने के लिए कोई सही रास्ता नहीं था। उन्होंने बताया कि रास्ते में उनकी साइकिल खराब हो गई तो काफी दूर तक कंधे पर लेकर गए बाद में वो राजेपुर पहुंचे लोगों से बातचीत की इसके बाद वह गुलौली में अरुण सिंह के घर पर गए थे और मोहम्मदी में ओमप्रकाश रस्तोगी उमाशंकर रस्तोगी, नवीन गुप्ता, रमेशचंद्र गुप्ता से मिले पार्टी को लेकर चर्चा की।
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गोला गोकर्णनाथ से था अटलजी का पारिवारिक रिश्ता
गोला गोकर्णनाथ से राजनीतिक रिश्तों के साथ उनका परिवारिक रिश्ता भी था। उनकी बड़ी बहन विमला मिश्रा की पुत्री मंजू का विवाह गोला नगर पालिका के प्रथम अध्यक्ष राजाराम मिश्रा के पुत्र सुशील मिश्रा के छोटे भाई प्रमोद मिश्रा से वर्ष 1969 में हुआ था। इस कारण वह पार्टी कार्यक्रम के अलावा उनके घर पर बराबर आते रहे। अटल जी गोला में समाजसेवी भारतभूषण अग्रवाल और महेंद्र कुमार गुप्त वैद्य के घर बैठक लगाते थे, जिसमें वह खूब ठहाके लगाते। 25 वर्ष पूर्व जब अटल जी की भांजी की बेटी कांती का विवाह हुआ तो वह विवाह समारोह में शामिल हुए थे और वर कन्या को अपना आशीर्वाद देकर नातिन की विदाई के बाद ही वापस गए थे।
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डॉ. जयशंकर बाजपेयी के चुनाव प्रचार में कई दिन रुके थे अटल जी
1980 के दशक में अटल जी का कई बार लखीमपुर आना-जाना हुआ। इसी दौर में अटल जी के मित्र के रूप में मशहूर जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष रह चुके जयशंकर बाजपेयी लोकसभा लोकसभा उपचुनाव लड़े तब अटल जी एक सप्ताह तक संकटा देवी स्थित जयशंकर वाजपेयी के आवास पर ही रुके थे। वे चुनाव प्रचार के लिए निकलने से पहले जनता पार्टी के प्रत्याशी जयशंकर वाजपेयी के लिए बाहर सोफे पर बैठकर एक घंटे तक जयशंकर वाजपेयी का इंतजार किया करते थे। तब वह कहते थे कि अब जयशंकर डॉक्टर नहीं रह गए हैं, बल्कि नेता हो गए हैं। इनका इंतजार तो अब करना ही पड़ेगा। अटल जी ने लखीमपुर की पुरानी गल्ला मंडी में कई सभाएं कीं। डॉ. जयशंकर वाजपेयी के पुत्र पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष शरद वाजपेयी बताते हैं कि जनसभाओं में अटल जी अपने भाषणों के जरिए लोगों को इस कदर मंत्रमुग्ध कर देते थे कि लोग सिर्फ उन्हीं को सुनना चाहते थे।

2004 में गोला में की थी आखिरी जनसभा
2004 में जब लोकसभा चुनाव में सभी पार्टियां अपने प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में जुटे थे। तब अटल जी देश के प्रधानमंत्री थे। शाहाबाद सीट से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सत्यदेव यह चुनाव लड़ रहे थे, वहीं खीरी सीट से भाजपा के फायर ब्रांड नेता विनय कटियार चुनाव मैदान में थे। अटल जी ने गोला के पब्लिक इंटर कॉलेज के मैदान में बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। लखीमपुर खीरी जिले में यह उनकी आखिरी जनसभा थी। इसके बाद वह कभी लखीमपुर नहीं आए।
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