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एंबुलेंस चालकों की हड़ताल मरीजों के लिए बनी मुसीबत
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लखीमपुर खीरी। मांगों को लेकर पिछले तीन दिन से महिला अस्पताल परिसर में धरना दे रहे एंबुलेंस स्टाफ ने रविवार रात से चक्का जाम कर दिया है। गनीमत रही कि गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए तहसीलवार एक एंबुलेंस का संचालन जारी रखा। वहीं कई मरीज निजी वाहनों से अस्पतालों में पहुंचे।
जिले में हर तरह के मरीजों से लेकर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाकर बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के लिए जिले में 94 एंबुलेंस संचालित हैं। इसमें से 108 की 44 एंबुलेंस जहां सामान्य बीमारियों से लेकर सड़क हादसे में घायल होने वालों को अस्पताल पहुंचाती हैं, तो वहीं 102 की 46 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल और फिर उसके बाद घर तक छोड़ती हैं। मगर, रविवार रात चक्का जाम होने से सोमवार को मरीजों की मुश्किलें बढ़ गईं। चक्का जाम की वजह से एंबुलेंस न मिलने पर तमाम मरीज निजी वाहन से अस्पताल पहुुंचे।
हर तहसील में एक एंबुलेंस चलने से रही राहत
चक्का जाम की घोषणा के बावजूद एंबुलेंस संघ के जिलाध्यक्ष पवन शुक्ला ने मरीजों से सहानुभूति रखकर तहसील स्तर पर एक एंबुलेंस का संचालन जारी रखा। इससे मरीज एवं गर्भवती महिलाओं को काफी राहत मिली। ऐसे में गर्भवती सीएचसी से लेकर महिला अस्पताल तो पहुंचती रही, लेकिन प्रसव बाद रेनू पत्नी, रोशनी, नसरीन, साबिया एवं प्रीती ई-रिक्शा आदि से घर जाने का मजबूर हुईं।
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महिला अस्पताल बन गए बाइक पार्किंग स्थल
एंबुलेंस का चक्का जाम होने से तमाम लोगों को एंबुलेंस नहीं मिल सकी। ऐसे में लोग अपने निजी चार एवं दो पहिया वाहन से अस्पताल पहुंचते रहे। सोमवार को दो पहिया वाहन से मरीजों के पहुंचने से महिला अस्पताल परिसर दोपहर तक पार्किंग स्थल बन गया।
जिले में एंबुलेंस
102 सेवा- 46
108 सेवा-44
एएलएस- चार
प्रमुख मांगे
1. कंपनी बदलने पर एंबुलेंस स्टाफ न बदला जाए।
2. कोरोना काल में संक्रमितों की जान बचाने वाले स्टाफ को ठेकेदारी से मुक्त किया जाए।
3. संक्रमण काल में मृतक कर्मियों के परिवार को 50 लाख की बीमा धनराशि एवं शासन से सहायता राशि दी जाए।
4. एंबुलेंस स्टाफ को नेशनल हेल्थ मिशन के अधीन किया जाय और न करने तक चार घंटे का ओवर टाइम के साथ हर साल महंगाई भत्ता दिया जाए।
5. स्टाफ को सहानुभूति पूर्वक यथास्थिति नौकरी रखा जाए। प्रशिक्षण शुल्क के नाम पर डीडी न मांगा जाए।
एक मरीज को अस्पताल भेजवाने के लिए काफी देर तक एंबुलेंस सुविधा के लिए फोन मिलाते रहे। मगर, फोन न लगने पर बाइक से लेकर गए। वहां जाकर मालूम हुआ कि हड़ताल है।
- अरुण सिंह, केहुआ
एंबुलेंस का चक्का जाम मरीजों के लिए मुसीबत बन गया। हड़ताल की जानकारी लगने पर निजी वाहन से मरीज को अस्पताल ले गए।
- रक्षपाल, खजुहा
एंबुलेंस का चक्का जाम होने के संबंध में 108 एवं 102 के प्रोग्राम मैनेजर से जानकारी की थी। लखनऊ में कंपनी के अधिकारियों और संगठन के बीच वार्ता का दौर जारी है। जल्द ही इस समस्या का हल निकलेगा। मरीजों को किसी प्रकार की दिक्क्त न हो इसके लिए प्रयास जारी है।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ
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जिले में हर तरह के मरीजों से लेकर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाकर बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के लिए जिले में 94 एंबुलेंस संचालित हैं। इसमें से 108 की 44 एंबुलेंस जहां सामान्य बीमारियों से लेकर सड़क हादसे में घायल होने वालों को अस्पताल पहुंचाती हैं, तो वहीं 102 की 46 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल और फिर उसके बाद घर तक छोड़ती हैं। मगर, रविवार रात चक्का जाम होने से सोमवार को मरीजों की मुश्किलें बढ़ गईं। चक्का जाम की वजह से एंबुलेंस न मिलने पर तमाम मरीज निजी वाहन से अस्पताल पहुुंचे।
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हर तहसील में एक एंबुलेंस चलने से रही राहत
चक्का जाम की घोषणा के बावजूद एंबुलेंस संघ के जिलाध्यक्ष पवन शुक्ला ने मरीजों से सहानुभूति रखकर तहसील स्तर पर एक एंबुलेंस का संचालन जारी रखा। इससे मरीज एवं गर्भवती महिलाओं को काफी राहत मिली। ऐसे में गर्भवती सीएचसी से लेकर महिला अस्पताल तो पहुंचती रही, लेकिन प्रसव बाद रेनू पत्नी, रोशनी, नसरीन, साबिया एवं प्रीती ई-रिक्शा आदि से घर जाने का मजबूर हुईं।
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महिला अस्पताल बन गए बाइक पार्किंग स्थल
एंबुलेंस का चक्का जाम होने से तमाम लोगों को एंबुलेंस नहीं मिल सकी। ऐसे में लोग अपने निजी चार एवं दो पहिया वाहन से अस्पताल पहुंचते रहे। सोमवार को दो पहिया वाहन से मरीजों के पहुंचने से महिला अस्पताल परिसर दोपहर तक पार्किंग स्थल बन गया।
जिले में एंबुलेंस
102 सेवा- 46
108 सेवा-44
एएलएस- चार
प्रमुख मांगे
1. कंपनी बदलने पर एंबुलेंस स्टाफ न बदला जाए।
2. कोरोना काल में संक्रमितों की जान बचाने वाले स्टाफ को ठेकेदारी से मुक्त किया जाए।
3. संक्रमण काल में मृतक कर्मियों के परिवार को 50 लाख की बीमा धनराशि एवं शासन से सहायता राशि दी जाए।
4. एंबुलेंस स्टाफ को नेशनल हेल्थ मिशन के अधीन किया जाय और न करने तक चार घंटे का ओवर टाइम के साथ हर साल महंगाई भत्ता दिया जाए।
5. स्टाफ को सहानुभूति पूर्वक यथास्थिति नौकरी रखा जाए। प्रशिक्षण शुल्क के नाम पर डीडी न मांगा जाए।
एक मरीज को अस्पताल भेजवाने के लिए काफी देर तक एंबुलेंस सुविधा के लिए फोन मिलाते रहे। मगर, फोन न लगने पर बाइक से लेकर गए। वहां जाकर मालूम हुआ कि हड़ताल है।
- अरुण सिंह, केहुआ
एंबुलेंस का चक्का जाम मरीजों के लिए मुसीबत बन गया। हड़ताल की जानकारी लगने पर निजी वाहन से मरीज को अस्पताल ले गए।
- रक्षपाल, खजुहा
एंबुलेंस का चक्का जाम होने के संबंध में 108 एवं 102 के प्रोग्राम मैनेजर से जानकारी की थी। लखनऊ में कंपनी के अधिकारियों और संगठन के बीच वार्ता का दौर जारी है। जल्द ही इस समस्या का हल निकलेगा। मरीजों को किसी प्रकार की दिक्क्त न हो इसके लिए प्रयास जारी है।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ