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एम्स ऋषिकेश में एंबुलेंस को गेट के अंदर ही घुसने नहीं दिया

Thu, 27 May 2021 01:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 01:16 AM IST
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AIIMS did not allow ambulances to enter inside the gate in Rishikesh
अपने परिवार के साथ शिक्षक आदेश। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

शिक्षक परिवार की पीड़ा : इलाज के अभाव में कोरोना से पीड़ित शिक्षक आदेश प्रताप सिंह की 24 अप्रैल को हो गई थी मौत

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लखीमपुर खीरी। जनपद के मोहम्मदी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कुइयां मदारपुर में कार्यरत शिक्षक आदेश प्रताप सिंह (43) त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण के दौरान कोरोना संक्रमित हो गए थे, जिसके बाद इलाज के अभाव में 24 अप्रैल को एम्स ऋषिकेश के गेट के बाहर ही मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि एम्स के गेट के बाहर तैनात गार्ड ने एंबुलेंस को अंदर ही नहीं जाने दिया था।
मूल रूप से बिजनौर के कस्बा झालोड़ निवासी शिक्षक आदेश प्रताप सिंह की नियुक्ति पांच वर्ष पूर्व 72 हजार शिक्षक भर्ती में हुई थी। तब से वह मोहम्मदी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कुइयां मदारपुर में कार्यरत थे। पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगने के कारण शिक्षक आदेश ने पोलिंग पार्टियों का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया था, जिसमें उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद शिक्षक 17 मार्च को अपने अधिकारी को सूचना देकर अपने घर बिजनौर चले गए थे। तबीयत खराब होने पर परिजनों ने 20 अप्रैल को बिजनौर के एक अस्पताल में शिक्षक का कोरोना टेस्ट कराया, जिसमें एंटीजन रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 24 अप्रैल को आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई।
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इस बीच शिक्षक की हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिवार वाले 23 अप्रैल को शिक्षक को लेकर एम्स ऋषिकेश पहुंचे। परिजन का आरोप है कि वहां पर गार्ड ने एंबुलेंस को एम्स के अंदर ही जाने नहीं दिया। प्रशासन से मदद भी मांगी, लेकिन सभी ने निराश किया। इलाज के अभाव में 24 अप्रैल को आदेश की मौत हो गई।
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मृतक के भाई अमित कुमार ने प्रशासन पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है और बताया कि यदि समय पर इलाज मिल जाता, तो शायद भाई की जान बच जाती। मृतक शिक्षक अपने पीछे दो बेटे, एक पुत्री और पत्नी छोड़ गए हैं। बच्चों की परवरिश की पत्नी कुसुमलता के कंधों पर आ गई है। उन्होंने बताया कि अभी विभाग या प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिली है। अब वह पति के बकाया देयकों व अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन करेंगी।

गंगा बैराज के किनारे किया अंतिम संस्कार

अमित ने बताया कि भाई की मृत्यु होने के बाद परिजन ने बिजनौर में गंगा नदी बैराज के किनारे शव का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। इसके लिए घर से लकड़ियां मंगाई गईं, जिसके बाद शव का बड़े बेटे ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया।

देखभाल में बेटी भी हुई संक्रमित

मृतक के भाई अमित ने बताया कि भाई के 17 अप्रैल को आने के तीन दिन बाद 20 अप्रैल को पता चला कि वह संक्रमित हैं। इस दौरान डॉक्टर की सलाह पर वह होम आइसोलेशन में रहे, जिससे उनकी देखभाल में मां के साथ पुत्री कृतिका भी लगी रही। 24 अप्रैल को कृतिका में भी कोरोना के लक्षण दिखने शुरू हो गए। इलाज के बाद अब वह ठीक है।
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