लखीमपुर में शारदा का कहर: अहिराना गांव के स्कूल समेत 22 घर नदी में समाए; बेघर ग्रामीणों की आंखों से छलका दर्द
अहिराना गांव में शारदा नदी का कटान जारी है। बृहस्पतिवार को गांव का स्कूल भी नदी में समा गया है। अब तक 22 घर नदी में समा चुके हैं। आंखों में बेबसी के आंसू लिए पीड़ित अपना आशियाना छोड़ सड़कों पर रहने को मजबूर हैं।
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लखीमपुर खीरी के फूलबेहड़ ब्लॉक के अहिराना गांव में शारदा नदी ने ऐसा तांडव मचाया है, जिससे यहां के लोग सड़क पर आ गए। प्रशासन ने पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के निर्देश तो दिये हैं, मगर सरकारी मरहम ग्रामीणों के घाव नहीं भर पा रहा है। आंखों में बेबसी के आंसू लिए पीड़ित अपना आशियाना छोड़ सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। एक दिन पहले प्राथमिक स्कूल से नदी महज नौ मीटर दूर थी। बृहस्पतिवार को नदी ने पूरा स्कूल लील लिया। अहिराना गांव के कई घर नदी में समा चुके हैं।
अहिराना गांव फूलबेहड़ में शारदा तटबंध के पास बसा है। लोगों की कमाई का जरिया मात्र खेती-किसानी है। निघासन तहसील क्षेत्र के गांव ग्रंट 12 और सदर तहसील के मंझरी, अहिराना में इस समय शारदा का कटान कहर ढा रहा है। इस साल सैकड़ों बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। करीब 22 घर कट चुके हैं। लोगो में हाहाकार मचा है।
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शारदा नदी से करीब आठ से दस किलोमीटर दूर बसा अहिराना आजादी के बाद करीब 1950 में बसा था। पूर्वांचल से आए ज्यादातर लोग यादव बिरादरी के थे। धीरे-धीरे गांव में निषाद, गौतम, केवट सहित कई बिरादरी के लोग बसते गए और आबादी बढ़ती गई। कालांतर में धीरे-धीरे नदी का रुख गांव की ओर मुड़ा तो पिछले चार साल से शारदा कहर बरपा रही है।
बारिश के दौरान सबसे पहले ग्रंट 12 के जंगल व कृषि भूमि को शारदा नदी निगल गई। इसके बाद नदी की लहरों ने अहिराना में कहर मचाना शुरू किया। पिछले चार साल में 200 घरों में आधे से ज्यादा को नदी लील गई। इस साल अब तक 22 आशियाने नदी में समा चुके हैं। गांव में अब केवल 45 घर ही बचे है। ऐसे में लोग अपना अपना घर खाली कर रहे है। प्राथमिक स्कूल भी कटने की कगार पर है।
ग्रामीणों ने बयां की पीड़ा
मौलापुरवा में टाट-पन्नी के घर में बच्चे को गोद में संभाले अहिराना निवासी रिंकी देवी ने बताया की नदी घर और जमीन छीन ले गई। खुले आसमान में बच्चों को पालना पड़ रहा है। रात जाग कर कटती है। गोदा पुरवा ग्रंट 12 निवासी सरिता कहती हैं कि सरकार ने सिर छुपाने को जगह तो दी मगर मुआवजा मिलता तो कुछ हद तक परेशानी दूर हो जाती।नदी सब निगल गई, कुछ नहीं बचा।
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गोदा पुरवा ग्रंट 12 के अर्जुन कहते हैं कि कटान में पहले दस एकड़ जमीन चली गई और अब घर भी नहीं रहा। दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। अहिराना के संजय कहते है कि तीन दिन में ही नदी ने हमें सड़क पर ला दिया। मकान और खेती सब चली गई। कहा, अपने खाने के लाले हैं, जानवरों को पालना मुश्किल हो रहा है। उनके लिए चारा कहां से लाएं। बुजुर्ग राम प्रसाद रुंधे गले से कहते हैं कि कुदरत ऐसा खेल किसी के साथ न खेले। जगह-जमीन सब होते हुए भी अब कुछ नहीं बचा। हम विस्थापितों की बस्ती में आ गए।
दो और घर नदी में समाए
बुधवार को अहिराना के दो घर और नदी में समा गए। गांव के संतोष और राजेश का घर भी कट गया गया। ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। लोग खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। कोई मदद भी नहीं मिली। श्रीनगर ग्राम पंचायत के मौलापुरवा गांव में कटान पीड़ितों को ढाई डिस्मिल का एक प्लॉट दिया गया है। कुछ पीड़ितों को वो भी नसीब नहीं हो रहा है। कुछ पीड़ित इधर- उधर छप्पर डालकर गुजर-बसर कर रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि लोग तो मकानों का मलबा व ईंटें निकालकर पलायन कर रहे हैं कि कम से कम इतना ही बचा लें।
नहीं हो पा रही युवक-युवतियों की शादी
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से नदी कटान की वजह से लड़के-लड़कियों के शादी के रिश्ते भी नहीं आ रहे हैं। दूसरे गांव के बिरादरी के लोग और रिश्तेदार यही कहते हैं कि अहिराना के लोगों के पास न ही घर बचा है और न ही जीवन यापन को जमीन। ऐसे में कोई इस गांव में शादी-विवाह कर अपने पुत्र-पुत्रियों का भविष्य संकट में क्यों डाले।
बरुआ कलां में खेती की जमीन निगल रही शारदा नदी
पलियाकलां में शारदा नदी का जलस्तर दो दिनों से गिर रहा है। ऐसे में नदी ने तेजी से कटान करना शुरू कर दिया है। बोझवा के ठोकर नंबर जीरो और बरुआ कलां में खेतिहर इलाके में जमीन कट गई है। यहां बोझवा, दौलतापुर, श्रीनगर समेत कई गांवों के किसानों की खेतिहर जमीनें हैं। नदी उनकी जमीन को धीरे-धीरे काट रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बारिश ने गेहूं की फसल को चौपट किया, अब धान और गन्ने की फसल को शारदा नदी निगल रही है।