{"_id":"5fc1450a8ebc3e9bb925ad52","slug":"agricultural-lakhimpur-news-bly4283121139","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों ने कहा-छोटे किसानों को नहीं मिल पा रहा समर्थन मूल्य का लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों ने कहा-छोटे किसानों को नहीं मिल पा रहा समर्थन मूल्य का लाभ
विज्ञापन
agricultural
लखीमपुर खीरी। नए कृषि कानून में केंद्र सरकार हर किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने का दम भरती है लेकिन, छोटे किसानों को अब भी इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह कहना है किसानो का।
किसानों ने कहा, सरकारी धान खरीद शुरू हुए करीब दो माह बीतने को है, लेकिन छोटे किसानों को अब भी धान बेचने में समस्याएं बनी हुई हैं। क्रय केंद्रों पर किसानों को टरकाया जा रहा है या फिर केंद्र ही बंद मिलता है। बड़े किसानों की अच्छी पहुंच होने के कारण वह किसी तरह अपना धान क्रय केंद्रों पर बेच पा रहे हैं, लेकिन छोटे किसान मायूस होकर लौट रहे हैं। मजबूरन मंडी में औने-पौने दामों पर आढ़तियों के हाथ धान बेच रहे हैं। हालांकि शासन ने छोटे किसानों की सुधि काफी देर से लेते हुए प्रत्येक किसान से अधिकतम 75 क्विंटल तक धान खरीदने के आदेश केंद्र प्रभारियों को दिए हैं। इससे कितने किसानों को लाभ होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
गोला गोकर्णनाथ/अमीरनगर। सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पिछले सत्र के गन्ने का भुगतान न मिलने से पीड़ित किसान उबर नहीं पाया है। वहीं क्रय केंद्रों पर धान बिक्री के लिए कई कागजी कवायद करने के बावजूद एमएसपी (मूल्य समर्थन योजना) का लाभ नहीं मिल पाया है। मजबूरन कम कीमत पर राइस मिल या आढ़तियों के हाथ धान बेचना पड़ा है। जिन किसानों ने सरकारी धान खरीद केंद्र पर धान बेचा है, उन्हें भुगतान भी नहीं मिल पाया है, ऐसे में किसान आर्थिक रूप से परेशान है।
विज्ञापन
--
सरकारी खरीद केंद्र पर धान न बिक पाने से दो माह पहले शाहजहांपुर राइस मिल मालिकों के यहां 50 क्विंटल धान बेचा था। जहां आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटो कापी जमा करा ली गई, लेकिन अब तक खाते में भुगतान नहीं आया है।
- इरफान खान, किसान
-
दिवाली से पहले 200 क्विंटल धान बेचने के लिए गोला मंडी समिति में सात दिन गुजारने पड़े। कभी नमी, कभी कूड़ा करकट का बहाना बनाकर सेंटर इंचार्जों ने टरकाया। साफ-सफाई और धान सुखाकर खरीद तो लिया, लेकिन भुगतान उनके खाते में अब तक नहीं आया है।
-अमृतपाल सिंह, किसान
-
सरकार ने 1868 रुपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य तो निर्धारित कर दिया, लेकिन खरीद की समुचित व्यवस्था नहीं की। इससे धान का वाजिब मूल्य न मिल पाने के कारण अब तक 80 क्विंटल धान की बिक्री नहीं हो पाई है।
-संदीप शुक्ला, किसान
-
बांकेगंज क्रय केंद्र धान भरी ट्रॉली एक महीने से सेंटर पर खड़ी है, लेकिन अब तक धान नहीं तौला गया है। इससे पहले 76 क्विंटल धान बेचा था, जिसका अब तक भुगतान नहीं आया है। गेहूं की बुआई किस तरीके से की जाए, जुताई के लिए कर्जा भी नहीं मिल रहा है।
-उपकार सिंह, किसान
-
धान बेचने के लिए ट्रॉली 20 दिन गोला मंडी परिसर में खड़ी रही। खुद रखवाली करते रहे। 20 दिन बाद 95 क्विंटल धान तो तुल गया, लेकिन पेमेंट अब तक नहीं मिला है। इससे रबी की फसल बुआई करने में आर्थिक दिक्कत आ रही है।
-संदीप सिंह, किसान
विज्ञापन
किसानों ने कहा, सरकारी धान खरीद शुरू हुए करीब दो माह बीतने को है, लेकिन छोटे किसानों को अब भी धान बेचने में समस्याएं बनी हुई हैं। क्रय केंद्रों पर किसानों को टरकाया जा रहा है या फिर केंद्र ही बंद मिलता है। बड़े किसानों की अच्छी पहुंच होने के कारण वह किसी तरह अपना धान क्रय केंद्रों पर बेच पा रहे हैं, लेकिन छोटे किसान मायूस होकर लौट रहे हैं। मजबूरन मंडी में औने-पौने दामों पर आढ़तियों के हाथ धान बेच रहे हैं। हालांकि शासन ने छोटे किसानों की सुधि काफी देर से लेते हुए प्रत्येक किसान से अधिकतम 75 क्विंटल तक धान खरीदने के आदेश केंद्र प्रभारियों को दिए हैं। इससे कितने किसानों को लाभ होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
विज्ञापन
गोला गोकर्णनाथ/अमीरनगर। सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पिछले सत्र के गन्ने का भुगतान न मिलने से पीड़ित किसान उबर नहीं पाया है। वहीं क्रय केंद्रों पर धान बिक्री के लिए कई कागजी कवायद करने के बावजूद एमएसपी (मूल्य समर्थन योजना) का लाभ नहीं मिल पाया है। मजबूरन कम कीमत पर राइस मिल या आढ़तियों के हाथ धान बेचना पड़ा है। जिन किसानों ने सरकारी धान खरीद केंद्र पर धान बेचा है, उन्हें भुगतान भी नहीं मिल पाया है, ऐसे में किसान आर्थिक रूप से परेशान है।
विज्ञापन
--
सरकारी खरीद केंद्र पर धान न बिक पाने से दो माह पहले शाहजहांपुर राइस मिल मालिकों के यहां 50 क्विंटल धान बेचा था। जहां आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटो कापी जमा करा ली गई, लेकिन अब तक खाते में भुगतान नहीं आया है।
- इरफान खान, किसान
-
दिवाली से पहले 200 क्विंटल धान बेचने के लिए गोला मंडी समिति में सात दिन गुजारने पड़े। कभी नमी, कभी कूड़ा करकट का बहाना बनाकर सेंटर इंचार्जों ने टरकाया। साफ-सफाई और धान सुखाकर खरीद तो लिया, लेकिन भुगतान उनके खाते में अब तक नहीं आया है।
-अमृतपाल सिंह, किसान
-
सरकार ने 1868 रुपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य तो निर्धारित कर दिया, लेकिन खरीद की समुचित व्यवस्था नहीं की। इससे धान का वाजिब मूल्य न मिल पाने के कारण अब तक 80 क्विंटल धान की बिक्री नहीं हो पाई है।
-संदीप शुक्ला, किसान
-
बांकेगंज क्रय केंद्र धान भरी ट्रॉली एक महीने से सेंटर पर खड़ी है, लेकिन अब तक धान नहीं तौला गया है। इससे पहले 76 क्विंटल धान बेचा था, जिसका अब तक भुगतान नहीं आया है। गेहूं की बुआई किस तरीके से की जाए, जुताई के लिए कर्जा भी नहीं मिल रहा है।
-उपकार सिंह, किसान
-
धान बेचने के लिए ट्रॉली 20 दिन गोला मंडी परिसर में खड़ी रही। खुद रखवाली करते रहे। 20 दिन बाद 95 क्विंटल धान तो तुल गया, लेकिन पेमेंट अब तक नहीं मिला है। इससे रबी की फसल बुआई करने में आर्थिक दिक्कत आ रही है।
-संदीप सिंह, किसान