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Lakhimpur Kheri News: सर्पदंश के बाद ओझा के पास नहीं, अस्पताल जाएं
Wed, 08 Jul 2026 11:10 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 08 Jul 2026 11:10 PM IST
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लखीमपुर खीरी। मानसून के साथ जिले में सर्पदंश का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से झाड़-फूंक और ओझा-तांत्रिक के चक्कर में पड़ने के बजाय तुरंत सरकारी अस्पताल पहुंचने की अपील की है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम (एंटीवेनम) उपलब्ध है। समय पर इलाज मिलने से सर्पदंश पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। पिछले वर्ष जिले में 942 लोग सर्पदंश का शिकार हुए थे, जिनमें करीब 11 लोगों की मौत हो गई थी।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, बांकेगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटीवेनम के 89 वायल, बिजुआ सीएचसी में 105, बरबर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 10 डोज, उचौलिया पीएचसी में पांच डोज, मझगई पीएचसी में 15 डोज तथा अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर सहित चार प्रकार के विषैले सांप पाए जाते हैं। हालांकि, 70 से 80 प्रतिशत सर्पदंश के मामलों में विषैले सांप नहीं होते, फिर भी सर्पदंश मेडिकल इमरजेंसी है। इसलिए घबराने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचकर इलाज कराना जरूरी है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि सर्पदंश होने पर सबसे पहले 108 एंबुलेंस पर कॉल करें। पीड़ित को शांत रखें, क्योंकि घबराहट से जहर तेजी से फैल सकता है। उसे अनावश्यक हिलने-डुलने न दें। यदि संभव हो तो लिटा दें या बैठा दें। काटे गए स्थान के आसपास के तंग कपड़े हटा दें, क्योंकि सूजन आने पर परेशानी बढ़ सकती है। घाव को साबुन और पानी से धोकर साफ कपड़े से ढक दें और जितनी जल्दी हो सके नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। झाड़-फूंक के चक्कर में समय बिल्कुल न गंवाएं।
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इन बातों का रखें ध्यान
हमेशा बंद जूते पहनें।
अंधेरे में बाहर जाते समय टॉर्च का प्रयोग करें।
अनाज और खाने का सामान ढककर रखें।
घर की दीवारों के छेद बंद रखें, ताकि चूहे या सांप भीतर न आ सकें।
लकड़ी या अन्य सामान उठाने से पहले छड़ी से हिलाकर देखें।
जमीन पर सोने से बचें और मच्छरदानी का प्रयोग करें।
घर के आसपास की घास काटकर साफ-सफाई बनाए रखें।
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जिले के सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम (एंटीवेनम) उपलब्ध है। समय पर इलाज मिलने से सर्पदंश पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। पिछले वर्ष जिले में 942 लोग सर्पदंश का शिकार हुए थे, जिनमें करीब 11 लोगों की मौत हो गई थी।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, बांकेगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटीवेनम के 89 वायल, बिजुआ सीएचसी में 105, बरबर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 10 डोज, उचौलिया पीएचसी में पांच डोज, मझगई पीएचसी में 15 डोज तथा अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर सहित चार प्रकार के विषैले सांप पाए जाते हैं। हालांकि, 70 से 80 प्रतिशत सर्पदंश के मामलों में विषैले सांप नहीं होते, फिर भी सर्पदंश मेडिकल इमरजेंसी है। इसलिए घबराने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचकर इलाज कराना जरूरी है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि सर्पदंश होने पर सबसे पहले 108 एंबुलेंस पर कॉल करें। पीड़ित को शांत रखें, क्योंकि घबराहट से जहर तेजी से फैल सकता है। उसे अनावश्यक हिलने-डुलने न दें। यदि संभव हो तो लिटा दें या बैठा दें। काटे गए स्थान के आसपास के तंग कपड़े हटा दें, क्योंकि सूजन आने पर परेशानी बढ़ सकती है। घाव को साबुन और पानी से धोकर साफ कपड़े से ढक दें और जितनी जल्दी हो सके नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। झाड़-फूंक के चक्कर में समय बिल्कुल न गंवाएं।
इन बातों का रखें ध्यान
हमेशा बंद जूते पहनें।
अंधेरे में बाहर जाते समय टॉर्च का प्रयोग करें।
अनाज और खाने का सामान ढककर रखें।
घर की दीवारों के छेद बंद रखें, ताकि चूहे या सांप भीतर न आ सकें।
लकड़ी या अन्य सामान उठाने से पहले छड़ी से हिलाकर देखें।
जमीन पर सोने से बचें और मच्छरदानी का प्रयोग करें।
घर के आसपास की घास काटकर साफ-सफाई बनाए रखें।