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एईएस की दस्तक, आईसीयू में दो बच्चे भर्ती, एक रेफर
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पिछले साल भी 20 बच्चे मिल चुके हैं पीड़ित, दो बच्चों में हुई थी जापानी इंसेलाइटिस की पुष्टि
लखीमपुर खीरी। पूर्वांचल के बाद अब एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) ने जिले में फैलने लगा है। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में तीन बच्चे इस बीमारी से पीड़ित मिले हैं। तीनों को आईसीयू में शिफ्ट करा दिया है। एक की हालत नाजुक होने के कारण उसे मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर किया गया है।
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में बुखार आने पर फरधान के अंधापुर निवासी जलीस अहमद ने 12 साल की पुत्री शाबरीन, सिकटिहा निवासी मिथिलेश कुमार ने चार साल के पुत्र हार्दिक, गोला के घरथनिया निवासी मुकेश कुमार ने दस साल के पुत्र आस्तिक, निघासन के गडरियनपुरवा निवासी उमेश कुमार ने चार साल के पुत्र रवि, मैलानी के बिचपरी निवासी हेमंत कुमार ने दो साल के पुत्र हिमांशु, सिंगाही के घोसियाना निवासी मेराज ने छह साल के पुत्र अरबाज को भर्ती कराया। इसमें हिमांशु, अरबाज एवं आस्तिक में एईएस पीड़ित मिले, जिन्हें आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। हालत में सुधार न होने पर आस्तिक को मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया।
क्या है एईएस
इंसेफ्लाइटिस वास्तव में मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है। मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं। इनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं। जब इन कोशिकाओं में सूजन या कोई अन्य दिक्कत आ जाती है तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) कहते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है। इसके वायरस शरीर में पहुंचकर खून में शामिल हो जाते हैं। जहां पर इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। खून के साथ बीमारी ये वायरस मस्तिष्क में पहुंचकर कोशिकाओं में सूजन का कारण बन शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को खराब कर देते हैं।
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लक्षण
एईएस होने पर तेज बुखार आता है। बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है। तेज बुखार की वजह से बच्चे बेहोश तक हो जाते हैं। साथ ही झटके तक आने लगते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर मौत तक हो जाती है।
बचाव
तेज बुखार होने पर शरीर को ताजे पानी से पोंछते रहें। माथे पर गीले कपड़े की पट्टी रखें ताकि बुखार कम हो सके। बच्चे के शरीर से कपड़े हटाकर गर्दन सीधी रखें। बच्चों को बिना डॉक्टर को दिखाए दवा और सीरप न दें। बेहोशी व दौरे आने पर बच्चे को बिना देर किए सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।
पिछले साल भी 20 बच्चे मिले थे पीड़ित
एक जनवरी 2020 से नवंबर 2020 तक एईएस से 20 बच्चे पीड़ित मिल चुके हैं, जबकि दो बच्चों में जेई की पुष्टि हुई थी। इस साल अब तक एईएस से पीड़ित तीन बच्चे मिले हैं।
एईएस से पीड़ित तीन बच्चे आईसीयू वार्ड में भर्ती किए गए थे, जिसमें से 10 साल के आस्तिक की हालत नाजुक
होने के कारण उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अन्य बच्चों का इलाज आईसीयू वार्ड में हो रहा है। - डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
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लखीमपुर खीरी। पूर्वांचल के बाद अब एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) ने जिले में फैलने लगा है। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में तीन बच्चे इस बीमारी से पीड़ित मिले हैं। तीनों को आईसीयू में शिफ्ट करा दिया है। एक की हालत नाजुक होने के कारण उसे मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर किया गया है।
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में बुखार आने पर फरधान के अंधापुर निवासी जलीस अहमद ने 12 साल की पुत्री शाबरीन, सिकटिहा निवासी मिथिलेश कुमार ने चार साल के पुत्र हार्दिक, गोला के घरथनिया निवासी मुकेश कुमार ने दस साल के पुत्र आस्तिक, निघासन के गडरियनपुरवा निवासी उमेश कुमार ने चार साल के पुत्र रवि, मैलानी के बिचपरी निवासी हेमंत कुमार ने दो साल के पुत्र हिमांशु, सिंगाही के घोसियाना निवासी मेराज ने छह साल के पुत्र अरबाज को भर्ती कराया। इसमें हिमांशु, अरबाज एवं आस्तिक में एईएस पीड़ित मिले, जिन्हें आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। हालत में सुधार न होने पर आस्तिक को मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया।
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क्या है एईएस
इंसेफ्लाइटिस वास्तव में मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है। मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं। इनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं। जब इन कोशिकाओं में सूजन या कोई अन्य दिक्कत आ जाती है तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) कहते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है। इसके वायरस शरीर में पहुंचकर खून में शामिल हो जाते हैं। जहां पर इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। खून के साथ बीमारी ये वायरस मस्तिष्क में पहुंचकर कोशिकाओं में सूजन का कारण बन शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को खराब कर देते हैं।
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लक्षण
एईएस होने पर तेज बुखार आता है। बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है। तेज बुखार की वजह से बच्चे बेहोश तक हो जाते हैं। साथ ही झटके तक आने लगते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर मौत तक हो जाती है।
बचाव
तेज बुखार होने पर शरीर को ताजे पानी से पोंछते रहें। माथे पर गीले कपड़े की पट्टी रखें ताकि बुखार कम हो सके। बच्चे के शरीर से कपड़े हटाकर गर्दन सीधी रखें। बच्चों को बिना डॉक्टर को दिखाए दवा और सीरप न दें। बेहोशी व दौरे आने पर बच्चे को बिना देर किए सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।
पिछले साल भी 20 बच्चे मिले थे पीड़ित
एक जनवरी 2020 से नवंबर 2020 तक एईएस से 20 बच्चे पीड़ित मिल चुके हैं, जबकि दो बच्चों में जेई की पुष्टि हुई थी। इस साल अब तक एईएस से पीड़ित तीन बच्चे मिले हैं।
एईएस से पीड़ित तीन बच्चे आईसीयू वार्ड में भर्ती किए गए थे, जिसमें से 10 साल के आस्तिक की हालत नाजुक
होने के कारण उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अन्य बच्चों का इलाज आईसीयू वार्ड में हो रहा है। - डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल