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धान खरीद में आढ़तियों से पीछे रह गई एजेंसियां

Wed, 23 Dec 2015 11:40 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Wed, 23 Dec 2015 11:40 PM IST
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Adhtion in paddy procurement Agencies behind
जिले में सरकारी धान खरीद आढ़तियों के भरोसे फल-फूल रही है, क्योंकि सरकारी एजेंसियां किसानों से धान खरीदने में कतई गंभीर नहीं हैं। सरकार की मंशा के उलट आढ़तिए धान खरीद के मामले में काफी आगे निकल गए हैं। भारी तामझाम और 110 क्रय केंद्रों के माध्यम से एजेंसियों ने 30,276 मीट्रिक टन धान खरीदा है, जबकि 51 आढ़तियों/राइस मिलर्स ने 34,898 मीट्रिक टन धान खरीद डाला है। दोगुने संसाधन और क्रय केंद्रों की भारी संख्या के बावजूद सरकारी एजेंसियों पर धान बेचना किसानों के लिए टेढ़ी खीर बना हुआ है।
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खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में मूल्य समर्थन योजना के तहत किसानों से धान खरीद के लिए इस बार नौ एजेंसियों के 110 क्रय केंद्र बनाए गए, जिनके माध्यम से एक लाख 39 हजार 640 मीट्रिक टन धान खरीद करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एजेंसियों के साथ ही सरकार ने आढ़तियों को धान खरीद करने की अनुमति दी है, लेकिन एजेंसियों को ज्यादा से ज्यादा खरीद करने के निर्देश दिए गए थे।
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करीब एक माह तक एजेंसियों ने धान खरीद में रूचि नहीं ली, तो पंचायत चुनाव के चलते अफसरों ने भी धान खरीद को तवज्जो नहीं दी। लिहाजा अब अधिकांश एजेंसियों के क्रय केंद्र बंद हो चुके हैं या फिर सिर्फ बैनर ही टंगे हैं। इसका सहज अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 17 दिसंबर को दो एजेंसियों खाद्य विभाग और एनसीसीएफ ने 98 मीट्रिक टन धान खरीद की है। जबकि इस दिन आढ़तियों की खरीद शून्य है। किसानों ने भी क्रय केंद्रों पर जाना बंद कर दिया है। किसानों की शिकायतों पर भी अफसर गौर नहीं कर रहे, जबकि 31 जनवरी 2016 तक क्रय केंद्रों पर खरीद की जानी है। पांच लाख से अधिक किसान वाले जिले में एजेंसियों ने अभी तक 3238 किसानों से धान खरीद की, जबकि आढ़तियों ने 3395 किसानों से धान खरीदा है।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी अर्जुन प्रसाद पाठक ने बताया कि धान की आवक कम होने से एजेंसियों पर धान खरीद नहीं हो पा रही है। कुछ एजेंसियों ने समय से पहले धान खरीद बंद कर दी है, जिसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। लक्ष्य के अनुरूप ज्यादा से ज्यादा खरीद करने पर जोर दिया जा रहा है।

अध्यक्ष, खीरी राइस मिलर्स एसोसिएशन संजय गुप्ता ने बताया कि तमाम समस्याओं के बावजूद आढ़तियों/मिलर्स ने सरकारी धान खरीद में सहयोग किया है। यदि समस्याओं का निस्तारण हो तो किसानों से धान खरीद में तेजी आ सकती है। 31 जनवरी तक खरीद के निर्देश हैं, लेकिन इसकी डिलीवरी लेने के बारे में स्पष्ट नीति नहीं हैैं। क्योंकि 31 जनवरी को खरीदे गए धान के चावल की डिलीवरी फरवरी में होगी, लेकिन एफसीआई डिलीवरी नहीं लेता। वहीं आढ़तियों से ढाई फीसदी मंडी शुल्क और चार फीसदी वैट भुगतान अग्रिम में जमा कराया जाता है, लेकिन इसका भुगतान सरकार समय से नहीं करती है।

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