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जांच को नहीं आए लेखपाल, किसान मायूस
ममरी (खीरी)
Updated Sun, 12 Apr 2015 11:04 PM IST
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तहसील गोला क्षेत्र के ग्राम खोखाय में भी बारिश, तेज हवाओं और ओले गिरने से फसलें बर्बाद हो गई हैं। जानकारी के बावजूद अभी तक कोई भी राजस्व कर्मचारी जांच करने तक नहीं आया।
खोखाय निवासी रामकुमार, हेमपुर के सतीश, रामदीनपुर के परमेश्वरदीन, बगचन के राम सिंह, हैदराबाद के सत्तार अली, परेली के दाताराम, जनकपुर नंबर 18 के अमर सिंह आंधी और बारिश के बर्बाद हुई फसलों के सर्वे का इंतजार कर रहे हैं। पीड़ित किसानों का कहना है कि नष्ट हुई फसलों का मुआवजा मिलना दूर अभी लेखपाल सर्वे करने भी नहीं आया जिससे उनके चेहरों पर मायूसी है। किसानों का कहना है कि उनके खेतों में लाही, मसूर की फसल चौपट हो गई है, लागत भी नहीं निकल पा रही है। उधर गेहूं की अगैती फसल गिरकर 50 से 60 फीसदी नष्ट हो गई है। कई किसानों के घर बेटे-बेटी की शादी होना है तो कुछ किसानों को बैंक से लिया कर्ज चुकाना है।
बगचन निवासी रामसिंह का कहना है कि उन्होंने एक एकड़ गेहूं बोया था, जो बारिश में गिरकर नष्ट हो गया है। सरकार से मुआवजे की उम्मीद थे, लेकिन लेखपाल सर्वे करने नहीं आया है। इससे इस बेमौसम ने बरबादी कर दी है। इसी तरह रामदीनपुर के परमेश्वरदीन बताते हैं कि उसने चार बीघे गेहूं लगाया था जो आंधी पानी में बेकार हो गया है। ममरी के बालगोविंद वर्मा ने बताया कि उसने पांच बीघे गेहूं की फसल बोई थी। आंधी और बारिश से बर्बाद हो गई। अब घर में भतीजे की शादी है, ऐसे में कैसे निपटेगी, यह चिंता सता रही। हैदराबाद के सत्तार अली ने तीन बीघे गेहूं बोया था जो 50 फीसदी नष्ट हो गया है, जिन्हें बैंक का 84 हजार रुपये कर्ज भी चुकाना है जिससे वह बेहद परेशान हैं।
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एसडीएम विनोद कुमार गुप्त ने बताया कि गांवों के किसानों की फसल का सर्वे कराया गया है। यदि किसी ग्राम पंचायत अथवा गांव का सर्वे न होने की बात पता चलती है तो वहां लेखपाल को तत्काल भेजा जा रहा है। किसी भी पात्र किसान को मायूस नहीं होने दिया जाएगा।
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खोखाय निवासी रामकुमार, हेमपुर के सतीश, रामदीनपुर के परमेश्वरदीन, बगचन के राम सिंह, हैदराबाद के सत्तार अली, परेली के दाताराम, जनकपुर नंबर 18 के अमर सिंह आंधी और बारिश के बर्बाद हुई फसलों के सर्वे का इंतजार कर रहे हैं। पीड़ित किसानों का कहना है कि नष्ट हुई फसलों का मुआवजा मिलना दूर अभी लेखपाल सर्वे करने भी नहीं आया जिससे उनके चेहरों पर मायूसी है। किसानों का कहना है कि उनके खेतों में लाही, मसूर की फसल चौपट हो गई है, लागत भी नहीं निकल पा रही है। उधर गेहूं की अगैती फसल गिरकर 50 से 60 फीसदी नष्ट हो गई है। कई किसानों के घर बेटे-बेटी की शादी होना है तो कुछ किसानों को बैंक से लिया कर्ज चुकाना है।
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बगचन निवासी रामसिंह का कहना है कि उन्होंने एक एकड़ गेहूं बोया था, जो बारिश में गिरकर नष्ट हो गया है। सरकार से मुआवजे की उम्मीद थे, लेकिन लेखपाल सर्वे करने नहीं आया है। इससे इस बेमौसम ने बरबादी कर दी है। इसी तरह रामदीनपुर के परमेश्वरदीन बताते हैं कि उसने चार बीघे गेहूं लगाया था जो आंधी पानी में बेकार हो गया है। ममरी के बालगोविंद वर्मा ने बताया कि उसने पांच बीघे गेहूं की फसल बोई थी। आंधी और बारिश से बर्बाद हो गई। अब घर में भतीजे की शादी है, ऐसे में कैसे निपटेगी, यह चिंता सता रही। हैदराबाद के सत्तार अली ने तीन बीघे गेहूं बोया था जो 50 फीसदी नष्ट हो गया है, जिन्हें बैंक का 84 हजार रुपये कर्ज भी चुकाना है जिससे वह बेहद परेशान हैं।
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एसडीएम विनोद कुमार गुप्त ने बताया कि गांवों के किसानों की फसल का सर्वे कराया गया है। यदि किसी ग्राम पंचायत अथवा गांव का सर्वे न होने की बात पता चलती है तो वहां लेखपाल को तत्काल भेजा जा रहा है। किसी भी पात्र किसान को मायूस नहीं होने दिया जाएगा।