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Lakhimpur Kheri News: चेहरे पर काम की मुस्कान, मन के अंदर तनाव की जंग
Sat, 10 Oct 2026 12:18 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:18 AM IST
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लखीमपुर खीरी। परिवार की जरूरतें पूरी करने से लेकर बच्चों की देखभाल और नौकरी संभालने तक महिलाएं दिनभर कई जिम्मेदारियां निभाती हैं। सबका ख्याल रखने की इस दौड़ में अक्सर अपनी परेशानियों को पीछे छोड़ देती हैं।
धीरे-धीरे यही दबाव तनाव, नींद की कमी और चिड़चिड़ेपन के रूप में सामने आने लगता है। जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी के आंकड़े भी इस ओर ध्यान खींचते हैं। यहां रोजाना आने वाले 80 से 100 मरीजों में करीब 60 प्रतिशत महिलाएं होती हैं।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला के मुताबिक, लगातार तनाव का असर एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और व्यवहार पर पड़ सकता है। ऐसे में मानसिक परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते मदद लेना जरूरी है। परिवार के सदस्यों का सहयोग, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या महिलाओं को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद कर सकती है। परेशानी लगातार बनी रहे तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
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बच्चों में मोबाइल फोन की आदत भी चिंता का विषयः बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल का असर भी दिखाई दे रहा है। डॉ. शुक्ला के अनुसार, जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब पांच से दस बच्चे मोबाइल की लत से जुड़ी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से उनकी नींद, पढ़ाई और शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। अभिभावकों को उम्र के अनुसार मोबाइल इस्तेमाल की सीमा तय करनी चाहिए और बच्चों को खेलकूद व रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
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धीरे-धीरे यही दबाव तनाव, नींद की कमी और चिड़चिड़ेपन के रूप में सामने आने लगता है। जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी के आंकड़े भी इस ओर ध्यान खींचते हैं। यहां रोजाना आने वाले 80 से 100 मरीजों में करीब 60 प्रतिशत महिलाएं होती हैं।
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मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला के मुताबिक, लगातार तनाव का असर एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और व्यवहार पर पड़ सकता है। ऐसे में मानसिक परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते मदद लेना जरूरी है। परिवार के सदस्यों का सहयोग, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या महिलाओं को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद कर सकती है। परेशानी लगातार बनी रहे तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
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बच्चों में मोबाइल फोन की आदत भी चिंता का विषयः बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल का असर भी दिखाई दे रहा है। डॉ. शुक्ला के अनुसार, जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब पांच से दस बच्चे मोबाइल की लत से जुड़ी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से उनकी नींद, पढ़ाई और शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। अभिभावकों को उम्र के अनुसार मोबाइल इस्तेमाल की सीमा तय करनी चाहिए और बच्चों को खेलकूद व रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।