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यूपी: 200 टन वजनी वेसल लेकर खीरी पहुंचा 240 पहियों का ट्रक, दिवाली से पहले प्लांट शुरू करने की तैयारी
Wed, 21 Oct 2026 11:02 PM IST
Akash Dubey
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Published by: Akash Dubey
Updated Wed, 21 Oct 2026 11:02 PM IST
सार
कुंभी में देश के पहले 3080 करोड़ रुपये के बायोप्लास्टिक प्लांट का 200 टन वजनी वेसल खीरी पहुंचा। प्रबंधन दिवाली से पहले संयंत्र शुरू करने की तैयारी में है।
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विशालकाय वेसल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कुंभी में स्थापित हो रहे देश के पहले इंटीग्रेटेड बायोप्लास्टिक प्लांट को शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में 200 टन वजनी वेसल (साइक्लाइजेशन रिएक्टर) लेकर महाबली ट्रक मंगलवार शाम खीरी में दाखिल हो गया। करीब पांच महीने पहले ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से रवाना हुआ यह ट्रक बुधवार सुबह नकहा और इसके बाद शाम को लालपुर बैरियर के आगे तक पहुंच गया। अब करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर वेसल के बृहस्पतिवार तक कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल परिसर पहुंचने की उम्मीद है।
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इसके बाद वेसल की स्थापना का काम शुरू होगा। 3080 करोड़ रुपये की इस परियोजना में सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि प्लांट और मशीनरी की स्थापना का काम अंतिम चरण में है। प्रबंधन दिवाली से पहले संयंत्र शुरू करने की तैयारी में जुटा है।
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बेल्जियम में तैयार किया गया यह वेसल बायोप्लास्टिक उत्पादन संयंत्र की महत्वपूर्ण मशीनरी का हिस्सा है। इसे विशेष हाइड्रोलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादकर सड़क मार्ग से लाया जा रहा है। पहले इस मशीन को 308 पहियों वाले ट्रक से लाने की योजना थी, लेकिन मोड़ने में अधिक जगह की जरूरत और आवागमन में आ रही दिक्कतों के कारण पहियों की संख्या घटाकर 240 कर दी गई। विशालकाय ट्रक के बुधवार सुबह शहर की सीमा पर पहुंचने के दौरान रामापुर के पास हाईवे पर लोगों की भीड़ जुट गई। लोग मोबाइल से तस्वीरें खींचते और सेल्फी लेते नजर आए। भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात सुचारु रखने के लिए पुलिसकर्मियों को मशक्कत करनी पड़ी।
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पांच महीने में कई राज्यों से होता हुआ पहुंचा ट्रक
चालक सुरेश चंद्र के मुताबिक, ट्रक को तीन चालक दिन में बारी-बारी से चलाते हैं। मशीन को 14 मई को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से सड़क मार्ग के लिए रवाना किया गया था। वहां से झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए यह खीरी पहुंचा। चंदौली, वाराणसी और पूर्वांचल के विभिन्न इलाकों के बाद ट्रक बलरामपुर और श्रावस्ती के रास्ते जिले की सीमा में दाखिल हुआ। विशालकाय ट्रक की सुरक्षित आवाजाही के लिए रास्ते में विशेष इंतजाम किए गए। कई स्थानों पर इसके गुजरने से पहले सड़क खाली कराई गई, ताकि यातायात बाधित न हो।
135 एकड़ में विकसित हो रहा 3080 करोड़ का प्लांट
कुंभी में करीब 135 एकड़ भूमि पर विकसित हो रहे इस बायोप्लास्टिक संयंत्र की आधारशिला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फरवरी 2025 में रखी थी। परियोजना की शुरुआती उत्पादन क्षमता 80 हजार टन प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है। संयंत्र में गन्ने से प्राप्त चीनी को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल कर पॉली लैक्टिक एसिड (पीएलए) तैयार किया जाएगा। इसके लिए सबसे पहले चीनी के घोल का सूक्ष्मजीवों की मदद से किण्वन कर लैक्टिक एसिड बनाया जाएगा। इसके बाद उसे शुद्ध करके लैक्टाइड तैयार होगा। फिर पॉलीमराइजेशन की प्रक्रिया से पीएलए बनाया जाएगा, जिसे दानों के रूप में तैयार किया जाएगा।
इन दानों से आगे चलकर कप, ट्रे, पैकेजिंग सामग्री, बोतल, स्ट्रॉ समेत विभिन्न उत्पाद बनाए जा सकेंगे। इस प्रक्रिया में पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल के स्थान पर गन्ने से प्राप्त चीनी का इस्तेमाल होगा। बलरामपुर चीनी मिल के महाप्रबंधक डॉ. सुनील कुमार यादव ने बताया कि पहले 308 पहियों वाले ट्रक से वेसल लाने की योजना थी, लेकिन मोड़ने में परेशानी के चलते पहियों की संख्या घटाई गई। वहीं, प्लांट के यूनिट हेड ललित जैन के मुताबिक, वेसल के बृहस्पतिवार तक कुंभी पहुंचने की उम्मीद है। इसके पहुंचने के बाद इंस्टालेशन का काम शुरू होगा। इसमें कितना समय लगेगा, यह मशीन आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। प्रबंधन की कोशिश है कि दिवाली से पहले संयंत्र का संचालन शुरू किया जा सके।
एक नजर में परियोजना
लागत: 3080 करोड़ रुपये
स्थान: कुंभी, बलरामपुर चीनी मिल परिसर
क्षेत्रफल: करीब 135 एकड़
शुरुआती उत्पादन क्षमता: 80 हजार टन प्रतिवर्ष
आधारशिला: फरवरी 2025
लक्ष्य : दिवाली से पहले संयंत्र शुरू करने की तैयारी
वेसल की खासियत
वजन: करीब 200 टन
निर्माण: बेल्जियम
लंबाई: करीब 110 फुट
ऊंचाई: करीब 20 फुट
ट्रेलर: 240 पहिये
रवाना होने की तारीख : 14 मई, पारादीप बंदरगाह, ओडिशा