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छह सौ रुपये किलो बिका कटरुआ
Lakhimpur
Updated Fri, 27 Jun 2014 05:33 AM IST
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बरसात में तराई के जंगल से मिलती है प्राकृतिक सब्जी
अमर उजाला ब्यूरो
मैलानी। तराई के जंगलों की सब्जी कटरुआ सीजन में पहली बार यहां मार्केट में आ गई है। हर क्षेत्र में बढ़ी महंगाई का असर अबकी बार कटरुआ पर भी पड़ गया है। बारिश शुरू होने पर कटरुआ जंगलों में जमीन के अंदर निकलता है। इसकी सब्जी लोगबाग बड़े शौक से खाते हैं। इसका स्वाद अंडे या कलेजी की तरह होता है। इसी से शाकाहारी वर्ग के लोगों की यह खासी पसंदीदा सब्जी है। पिछले सीजन में कटरुआ डेढ़ से दो सौ रुपये किलो तक बिका था। हालांकि शुरुआती सीजन में पिछले साल भी इसका दाम करीब तीन सौ रुपये किलो था, लेकिन इस बार पिछली दफा की तुलना में इसका दाम खासा ज्यादा है। बावजूद इसके कटरुआ खाने के शौकीनों ने सीजन में पहली दफा छह सौ रुपये किलो के भाव में खरीदकर खाया। विक्रेताओं ने बताया कि अभी मैलानी क्षेत्र के जंगल में कटरुआ नहीं निकल रहा है। कटरुआ पीलीभीत के जंगल में निकल रहा है और वहीं से यहां की मार्केट में आ रहा है, इसी से इसके दाम काफी तेज हैं। क्षेत्रीय जंगलों में कटरुआ निकलने पर दाम कम हो जाएंगे। फिलहाल कटरुआ के शौकीन महंगा होने के बावजूद इसे खरीदकर अपना शौक पूरा कर रहे हैं।
अमर उजाला ब्यूरो
मैलानी। तराई के जंगलों की सब्जी कटरुआ सीजन में पहली बार यहां मार्केट में आ गई है। हर क्षेत्र में बढ़ी महंगाई का असर अबकी बार कटरुआ पर भी पड़ गया है। बारिश शुरू होने पर कटरुआ जंगलों में जमीन के अंदर निकलता है। इसकी सब्जी लोगबाग बड़े शौक से खाते हैं। इसका स्वाद अंडे या कलेजी की तरह होता है। इसी से शाकाहारी वर्ग के लोगों की यह खासी पसंदीदा सब्जी है। पिछले सीजन में कटरुआ डेढ़ से दो सौ रुपये किलो तक बिका था। हालांकि शुरुआती सीजन में पिछले साल भी इसका दाम करीब तीन सौ रुपये किलो था, लेकिन इस बार पिछली दफा की तुलना में इसका दाम खासा ज्यादा है। बावजूद इसके कटरुआ खाने के शौकीनों ने सीजन में पहली दफा छह सौ रुपये किलो के भाव में खरीदकर खाया। विक्रेताओं ने बताया कि अभी मैलानी क्षेत्र के जंगल में कटरुआ नहीं निकल रहा है। कटरुआ पीलीभीत के जंगल में निकल रहा है और वहीं से यहां की मार्केट में आ रहा है, इसी से इसके दाम काफी तेज हैं। क्षेत्रीय जंगलों में कटरुआ निकलने पर दाम कम हो जाएंगे। फिलहाल कटरुआ के शौकीन महंगा होने के बावजूद इसे खरीदकर अपना शौक पूरा कर रहे हैं।