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मिट्टी में घर रही पोषक तत्वों की मात्रा

Tue, 02 Apr 2013 05:30 AM IST
Lakhimpur
Lakhimpur Updated Tue, 02 Apr 2013 05:30 AM IST
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मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण पर गोष्ठी में चिंतन
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कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने प्रधानों और किसानों को दिए टिप्स
लखीमपुर खीरी। टिकाऊ खेती के लिए मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण पर गोष्ठी को संबोधित करते हुए डीएम मनीषा त्रिघाटिया ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों जैसे मृदा एवं जल का संरक्षण करना नितांत आवश्यक है, जिससे अनाज उत्पादन को बढ़ाया जा सके। गेहूं की कंबाइन से कटाई के बाद बचे अवशेष डंठल को जलाएं नहीं, बल्कि उसे खेत में ही गला दें। इस कार्य के लिए किसान कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर डंठल को जलाने से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के नीलामी हाल में मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर कृषि और वन विभाग के संयुक्त प्रयास से गोष्ठी हुई, जिसमें किसानों को मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण के बारे में अहम जानकारियां दी गईं। उप कृषि निदेशक डॉ.आरके सिंह ने कहा कि जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान, गेहूं का फसल चक्र लिया जा रहा है। तथ्य सामने आए हैं कि गेहूं की कटाई कंबाइन से करने के उपरांत अवशेष गेहूं डंठल को खेत में ही जला दिया जाता है, जिससे एक तरफ भारी मात्रा में पोषक तत्वों की हानि होती है साथ ही कार्बन डाई आक्साइड एवं अन्य गैसों के उर्त्सजन से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा आगजनी की घटनाएं होने के चलते जान, माल एवं वन को क्षति पहुंचती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ.पीके विसेन ने कहा कि मृदा एक जीवित इकाई है, क्योंकि इसमें बहुत ही मात्रा में लाभकारी सूक्ष्म जीव पाए जाते हैं। जो मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते हैं। पिछले कुछ वर्षों के मृदा परीक्षण रिपोर्ट से संकेत मिले हैं कि जिले की मृदा में जीवांश कार्बन का प्रतिशत घट रहा है, जो चिंता का विषय है। गोष्ठी में कई किसानों ने अपनी-अपनी समस्याएं भी रखीं, जिस पर विशेषज्ञों ने राय जाहिर की।
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गोष्ठी में जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह, डीएफओ साउथ नीरज कुमार, पर्यावरणविद् डॉ.वीपी सिंह, प्रगतिशील किसान डॉ.बेनी सिंह, आलोक शुक्ला, एसडीएम सदर राजेंद्र प्रसाद यादव आदि ने संबोधित किया। गोष्ठी में कृषि व वन विभाग के अधिकारियों समेत सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम प्रधान और किसान मौजूद रहे।
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