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राजस्व ग्रामों की बचत भूमि होगी आरक्षित
Lakhimpur
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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लखीमपुर खीरी। ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं के संचालन के लिए भूमि के अभाव पर अब अफसर संजीदा हो गए हैं। महत्वपूर्ण योजनाओं के विस्तारीकरण में आड़े आ रही कठिनाइयों के मद्देनजर पंचायतीराज विभाग ने चकबंदी विभाग से सार्वजनिक प्रयोग के लिए बचत भूमि को आरक्षित करने की मांग की है। ताकि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्य अवरुद्ध न हो सकें।
ग्राम हो या फिर नगर क्षेत्र, इनमें सरकारी भवन व अन्य प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए भूमि का अभाव पैदा होने लगा है। जमीन के अभाव में अहम प्रोजेक्ट या फिर स्कूलों के निर्माण में दिक्कतें खड़ी होने लगी हैं। इसका सहज अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रोडवेज वर्कशाप के निर्माण को कई साल से जमीन तलाशी जा रही है। वहीं केंद्रीय विद्यालय के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। कुछ ऐसा ही हाल गांवों का है, जहां सरकारी भवन निर्माण के लिए जमीन का टोटा पड़ गया है। इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 65 गांवों में प्राथमिक विद्यालय के निर्माण को जमीन नहीं मिल सकी है। लिहाजा ग्राम पंचायत के मुख्य राजस्व ग्राम की आबादी से सटे स्थलों को ग्राम सभा के खाते में दर्ज कराया जाएगा। पंचायतीराज विभाग के निदेशक ने चकबंदी आयुक्त को पत्र भेजकर कहा है कि उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम के तहत ग्राम चकबंदी समिति की सहमति प्राप्त करते हुए भूमि आरक्षित करने के लिए समुचित निर्देश जारी करें।
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गांवों में प्रस्तावित योजनाएं
डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने बताया कि ग्राम सचिवालय/बहुउद्देशीय पंचायत भवन, ठोस एवं द्रव अपशिष्ट प्रबंधन, पाईप वाटर सप्लाई योजना के लिए करीब एक-एक हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इसके अलावा घनी आबादी में तथा निर्बल वर्ग के रिहायसों के आसपास सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए करीब आधा हेक्टेयर जमीन की आवश्कता पड़ेगी। तमाम ग्राम पंचायतों में जमीन की समस्या आड़े आ रही है। चकबंदी विभाग के सहयोग से कुछ हद तक समस्या से निजात मिलेगी और विकास में तेजी आएगी।
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ग्राम हो या फिर नगर क्षेत्र, इनमें सरकारी भवन व अन्य प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए भूमि का अभाव पैदा होने लगा है। जमीन के अभाव में अहम प्रोजेक्ट या फिर स्कूलों के निर्माण में दिक्कतें खड़ी होने लगी हैं। इसका सहज अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रोडवेज वर्कशाप के निर्माण को कई साल से जमीन तलाशी जा रही है। वहीं केंद्रीय विद्यालय के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। कुछ ऐसा ही हाल गांवों का है, जहां सरकारी भवन निर्माण के लिए जमीन का टोटा पड़ गया है। इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 65 गांवों में प्राथमिक विद्यालय के निर्माण को जमीन नहीं मिल सकी है। लिहाजा ग्राम पंचायत के मुख्य राजस्व ग्राम की आबादी से सटे स्थलों को ग्राम सभा के खाते में दर्ज कराया जाएगा। पंचायतीराज विभाग के निदेशक ने चकबंदी आयुक्त को पत्र भेजकर कहा है कि उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम के तहत ग्राम चकबंदी समिति की सहमति प्राप्त करते हुए भूमि आरक्षित करने के लिए समुचित निर्देश जारी करें।
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गांवों में प्रस्तावित योजनाएं
डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने बताया कि ग्राम सचिवालय/बहुउद्देशीय पंचायत भवन, ठोस एवं द्रव अपशिष्ट प्रबंधन, पाईप वाटर सप्लाई योजना के लिए करीब एक-एक हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इसके अलावा घनी आबादी में तथा निर्बल वर्ग के रिहायसों के आसपास सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए करीब आधा हेक्टेयर जमीन की आवश्कता पड़ेगी। तमाम ग्राम पंचायतों में जमीन की समस्या आड़े आ रही है। चकबंदी विभाग के सहयोग से कुछ हद तक समस्या से निजात मिलेगी और विकास में तेजी आएगी।
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