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दाखिल खारिज की रिपोर्ट लगावाने को लेकर हुआ विवाद

Lakhimpur Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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तहसील परिसर में भिड़े लेखपाल और वकील
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क्रासलखीमपुर खीरी। सदर तहसील परिसर में दाखिल-खारिज की रिपोर्ट लगवाने को लेकर वकील और लेखपाल के बीच विवाद हो गया, जिसके बाद मामला इतना बढ़ा कि दोनों में मारपीट हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के समर्थन में लोग लामबंद होने लगे। हालांकि कुछ लोगों के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ, जिसके बाद तहसील बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के नेतृत्व में वकीलों ने सीओ से मिलकर आरोपी लेखपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। एसडीएम सदर राजेंद्र यादव ने आरोपी लेखपाल को सस्पेंड कर दिया है।
बताते हैं कि दोपहर करीब साढ़े बारह बजे तहसील परिसर में वकील सुरेंद्र नाथ राजवंशी निवासी ओदरहना एक मुवक्किल के जमीन के कागज पर रिपोर्ट लगवाने के लिए लेखपाल विजय भार्गव निवासी महंगूखेड़ा थाना खीरी के पास गए थे। रिपोर्ट लगवाने को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया, जिसके बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इस वाकये से परिसर में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते मौके पर तमाशाइयों की भीड़ जुट गई। लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराने का प्रयास किया। वकील का आरोप है कि रिपोर्ट लगाने से लेखपाल ने मना कर दिया और उसके साथ अभद्रता करते हुए मारपीट की। इसके बाद तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव मिश्रा व महामंत्री विनोद पांडे की अगुवाई में वकीलों ने सीओ सिटी डा.एएन सिंह से मुलाकात कर आरोपी लेखपाल के विरुद्घ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की है। यहां से संतुष्ट न होने पर वकीलों ने डीएम से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की है। उधर, आरोपी लेखपाल विजय भार्गव ने बताया कि वकील दाखिल खारिज की रिपोर्ट लगवाने आए थे, जिसमें बैनामे पर आवासीय भूमि अंकित थी। इसलिए रिपोर्ट नहीं लगाई, क्योंकि नियमता आवासीय भूमि का दाखिल खारिज कराने का कोई औचित्य नहीं है।
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दोनों के बीच व्यक्तिगत विवाद: तहसीलदार
तहसीलदार सदर गिरीश चंद्र झा ने बताया कि दोनों के बीच आपसी विवाद था, जिसकी जांच कराई जा रही है। मामले को संज्ञान में लेते हुए एसडीएम राजेंद्र यादव ने लेखपाल को सस्पेंड कर दिया है।

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आठ माह पूर्व मोहम्मदी तहसील में हुआ था संघर्ष
सदर तहसील में मंगलवार को लेखपाल और वकील के बीच हुए विवाद ने अफसरों के माथे पर बल डाल दिए हैं। बता दें कि आठ माह पूर्व बीते तीन सितंबर 2011 को मोहम्मदी तहसील परिसर में वकीलों और लेखपालों के बीच हुए संघर्ष में दो वकील मुकुल तिवारी व प्रमोद दीक्षित की मौत हो गई थी। जबकि कुछ घायल भी हुए थे। उस दिन भी घटना दोपहर करीब डेढ़ बजे हुई थी। उस समय भी घटना के पीछे वकीलों और लेखपालों के बीच रिपोर्ट लगवाने को लेकर ही विवाद माना गया था। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया था, जिसके बाद भी तहसील परिसर में इतनी बड़ी घटना हो गई थी। अब सदर तहसील में हुई इस घटना ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कि वकील और लेखपालों के बीच कुछ तो गड़बड़ है। अफसरों के सामने इस गड़बड़ को चिन्हित करने की चुनौती पेश हो गई है। ताकि ऐसे मामले में भविष्य में दुबारा न हो सके।
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