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अब किसान और बागवान बचाएंगे सारस के घोसले
Lakhimpur
Updated Thu, 21 Aug 2014 05:30 AM IST
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सारस संरक्षण में जनसहभागिता बढ़ाने की अनूठी पहल
घोसला और अंडे गोद लेने वालों को मिलेगा मानदेय
लखीमपुर खीरी। अब सारस के घोसले और अंडे बचाने को किसान और बागवान आगे आ रहे हैं। सारस संरक्षण में जनसहभागिता बढ़ाने के लिए वन विभाग और वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया ने संयुक्त रूप से अनूठी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत सारस के प्राकृतिक आवास और उनके घोसलों को चिह्नित कर उनको सरंक्षित करने में ग्रामीणों की सहायता ली जाएगी। ग्रामीण इन घोसलों की सुरक्षा करेंगे। इसके बदले में उन्हें 800 रुपया प्रतिमाह की दर मानदेय भी प्रदान किया जाएगा।
प्रदेश के आठ जिलों में यह योजना पहले से चल रही थी। इस माह 10 और जिलों में यह योजना शुरू की गई है। इसमें लखीमपुर खीरी जिला भी शामिल है। अब तक जिले में सारस के चार घोसले चिह्नित किए गए हैं। इनमें गोला रेंज में सेमरई झील के पास दो और मोहम्मदी रेंज में पसगवां के पास एक घोसला चिह्नित किया गया है। इसी तरह शारदानगर रेंज के फूलबेहड़ में भी एक घोसले की सूचना ग्रामीण ने दी है। चारों घोसलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ग्रामीणों को सौंप दी गई है।
डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि इस अनूठी योजना से उत्साहित होकर ग्रामीण खुद सारस के घोसलों और अंडों की सूचना वनविभाग को दे रहे हैं। जांच के बाद यह घोसले सरंक्षण के लिए ग्रामीणों को सौंपे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से सारस के सरंक्षण और उनकी आबादी बढ़ाने में निश्चित रूप से मदद मिलेगी। साथ ही ग्रामीणों में पशु पक्षियों के सरंक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा होगी।
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जिले में करीब 200 सारस की है आबादी
मालूम हो कि 27 व 28 जून 2014 को एक साथ हुई सारस गणना में जिले में 190 सारस पाए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा 88 सारस अकेले मोहम्मदी रेंज में मिले थे। दिसंबर 2013 की गणना में 179 सारस, 20 जून 2013 की गणना में 181 सारस मिले थे। इससे पहले तीन अक्तूबर 2012 की जनगणना में 181 सारस और 2010 की गणना में 241 सारस पाए गए थे। अब तक हुई सभी गणना में मोहम्मदी रेंज में ही सबसे ज्यादा सारस पाए गए हैं। वर्ष 2012 से जिले में सारस की आबादी की सुई 200 के आसपास ही स्थिर होकर रह गई है।
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घोसला और अंडे गोद लेने वालों को मिलेगा मानदेय
लखीमपुर खीरी। अब सारस के घोसले और अंडे बचाने को किसान और बागवान आगे आ रहे हैं। सारस संरक्षण में जनसहभागिता बढ़ाने के लिए वन विभाग और वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया ने संयुक्त रूप से अनूठी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत सारस के प्राकृतिक आवास और उनके घोसलों को चिह्नित कर उनको सरंक्षित करने में ग्रामीणों की सहायता ली जाएगी। ग्रामीण इन घोसलों की सुरक्षा करेंगे। इसके बदले में उन्हें 800 रुपया प्रतिमाह की दर मानदेय भी प्रदान किया जाएगा।
प्रदेश के आठ जिलों में यह योजना पहले से चल रही थी। इस माह 10 और जिलों में यह योजना शुरू की गई है। इसमें लखीमपुर खीरी जिला भी शामिल है। अब तक जिले में सारस के चार घोसले चिह्नित किए गए हैं। इनमें गोला रेंज में सेमरई झील के पास दो और मोहम्मदी रेंज में पसगवां के पास एक घोसला चिह्नित किया गया है। इसी तरह शारदानगर रेंज के फूलबेहड़ में भी एक घोसले की सूचना ग्रामीण ने दी है। चारों घोसलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ग्रामीणों को सौंप दी गई है।
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डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि इस अनूठी योजना से उत्साहित होकर ग्रामीण खुद सारस के घोसलों और अंडों की सूचना वनविभाग को दे रहे हैं। जांच के बाद यह घोसले सरंक्षण के लिए ग्रामीणों को सौंपे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से सारस के सरंक्षण और उनकी आबादी बढ़ाने में निश्चित रूप से मदद मिलेगी। साथ ही ग्रामीणों में पशु पक्षियों के सरंक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा होगी।
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जिले में करीब 200 सारस की है आबादी
मालूम हो कि 27 व 28 जून 2014 को एक साथ हुई सारस गणना में जिले में 190 सारस पाए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा 88 सारस अकेले मोहम्मदी रेंज में मिले थे। दिसंबर 2013 की गणना में 179 सारस, 20 जून 2013 की गणना में 181 सारस मिले थे। इससे पहले तीन अक्तूबर 2012 की जनगणना में 181 सारस और 2010 की गणना में 241 सारस पाए गए थे। अब तक हुई सभी गणना में मोहम्मदी रेंज में ही सबसे ज्यादा सारस पाए गए हैं। वर्ष 2012 से जिले में सारस की आबादी की सुई 200 के आसपास ही स्थिर होकर रह गई है।