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संजीव के उपन्यास का 14 भाषाओं में हुआ अनुवाद
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 07 Apr 2018 07:35 PM IST
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sanjeev
सुप्रसिद्ध कथाकार संजीव जायसवाल ‘संजय’ के उपन्यास ‘होगी जीत हमारी’ का भारत सरकार ने 14 भाषाओं में अनुवाद कराने का निर्णय लिया है। जिले के साहित्यकारों ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। संजीव ने बताया कि यह उपन्यास पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ-साथ अवैध खदानों के विरुद्ध जनजागरण अभियान चलाने के लिए प्रेरित करता है। संजीव के अनुसार उपन्यास में उपदेश परोसने के बजाय पल-पल रहस्य, रोमांच और मनोरंजन के तत्वों को पिरोया गया है और यही इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा आधार है।
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पिछले वर्ष भी सीबीटी द्वारा आयोजित अखिल भारतीय लेखन प्रतियोगिता में संजीव के वैज्ञानिक उपन्यास रेडसन के एलियन को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ था। संजीव लखनऊ के अनुसंधान संगठन आरडीएसओ में निदेशक के पद पर कार्यरत थे। पिछले वर्ष स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेने के बाद वे पूर्ण रूप से साहित्य सेवा में रत हैं। अब तक देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी एक हजार से अधिक कहानियां और व्यंग्य, 11 उपन्यास, 13 कहानी, संग्रह और 25 चित्र कथाएं प्रकाशित हो चुकी हैं।
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दो बार भारत सरकार के प्रतिष्ठित भारतेन्दु हरिश्चन्द्र सम्मान से सम्मानित हो चुके संजीव की कई रचनाओं का विश्व की अनेकों भाषाओं में पहले भी अनुवाद हो चुका है। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा भी उन्हें अमृत लाल नागर कथा सम्मान, सूर पुरस्कार एवं पंडित सोहन लाल द्विवेदी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। संजीव मूल रूप से धौरहरा नगर के निवासी हैं। उनके उपन्यास को चौदह भाषाओं के अनुवाद की खबर से उनके पैतृक नगर धौरहरा में खुशी का माहौल है।
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