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रामनगर बगहा में सैकड़ों एकड़ भूमि घाघरा में समाई

Bareily Bureau Updated Mon, 10 Sep 2018 11:54 PM IST
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रामनगर बगहा में सैकड़ों एकड़ भूमि घाघरा में समाई
करोड़ों की फसलें हुईं बर्बाद नहीं मिल सकी मदद
अमर उजाला ब्यूरो
धौरहरा। घाघरा नदी की विनाश लीला के आगे प्रशासन लाचार नजर आ रहा है। बाढ़ खंड के बचाव कार्य योजना भी धरी रह गई। घाघरा नदी ने रामनगर बगहा की करीब सौ एकड़ लहलहाती फसलों सहित कृषि भूमि अपने आगोश में समेट ली। जिन किसानों की जमीनें कटीं उन्हें अब तक प्रशासन ने एक धेले की मदद नहीं दी है।
तहसील क्षेत्र में घाघरा और शारदा नदियां प्रति वर्ष कटान कर हजारों किसानों को धरातल पर भूमिहीन कर देतीं हैं वह किसान केवल राजस्व अभिलेखों में ही जमींदार होते हैं। उन्हें घर का खर्च चलाने को बाहर शहरों में जाकर या दूसरों के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती है। कुछ ऐसा ही आलम अब रामनगर बगहा का है, यहां घाघरा ने बीते कुछ दिनों में ही सैकड़ों एकड़ फसलों से लहलहाती भूमि निगल कर तमाम किसानों को भूमिहीन बना दिया है। कटान के तेज बेग के आगे बाढख़ंड का बचाव कार्य धरा का धरा रह गया।
बगहा गांव के बदलू के पास दस एकड़, तौकीर के पास छह एकड़, संतू के पास नौ बीघा रफीक के पास छह एकड़ बांकेलाल के पास कुल पांच एकड़ जमीन थी। इसी भूमि से पूरे परिवार का खर्चा चलता था। अब इनकी पूरी जमीन गन्ना, धान की फसलों सहित नदी में समा चुकी है। यह तो महज बानगी है ऐसे सैकड़ों किसान हैं जिनकी सारी जमीन घाघरा नदी में समा चुकी है। इन किसानों के पास अब रोजी रोटी का संकट है। कई ऐसे किसान भी है जिनकी बेटी की शादी भी फसलों के तैयार होने पर होती। अब इन किसानों को भी दूसरों के आगे हाथ फैलाने होंगे। घाघरा ने अकेले रामनगर बगहा गांव में करीब सौ किसानों की करीब पांच सौ एकड़ कृषि भूमि निगल ली है।
एसडीएम आशीष कुमार मिश्रा बताते हैं कि जिन किसानों की भूमि कटी है उनका सर्वे लेखपालों से कराया जा रहा है। उन्हें दैवी आपदा राहत कोष से अनुदान दिया जाएगा।
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फसलें नदी में समाई कैसे करें बैंक कर्ज की अदायगी
धौरहरा। घाघरा और शारदा नदियों के कटान से गांव रामनगर, बगहा, हुलासपुरवा, साहबदीनपुरवा, कैरातीपुरवा, कुंजापुरवा, रैनी, समदहा, पसियनपुरवा, चहमलपुर, जंगल नंबर तीन, समरदाबदाल, गुलरिया तालुके अमेठी, पोखरा रुद्रपुर, जनकपुर, फिरोजाबाद सहित ऐसे पचासों गांव हैं जहां के किसानों ने बैंकों से फसली कर्ज ले रखा था इनकी भूमि भी बैंक ने बंधक कर रखी है और फसलों सहित जमीन भी नदी में समा चुकी है। किसानों के पास अब फूटी कौड़ी तक नहीं बची ऐसे में किसान बैंक कर्ज कैसे अदा करेंगे। जबकि बैंकों ने अपनी कर्ज अदायगी के लिए किसानों की आरसी भी जारी करना शुरू कर दिया है। अकेली एसबीआई ने तीन सौ पचास किसानों को आरसी जारी की है। एसबीआई के फाइनेंस मैनेजर विजय शंकर त्रिपाठी बताते हैं जिनके पास पैसा नहीं है समय के साथ ओटीएस स्कीम में रियायत भी दी जा रही है । यह सब आरसी पहले काटी जा चुकी हैं।

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