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अब भी गरीब की पहुंच से दूर हैं सस्ती दवाएं
Updated Tue, 12 Sep 2017 11:17 PM IST
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जेनेरिक दवाएं
लखीमपुर खीरी।
गरीबों को सस्ती दवाएं (जेनेरिक) उपलब्ध कराने के दावे अभी हकीकत में बदल नहीं पाए हैं और दवाएं अब भी गरीब की पहुंच से दूर ही हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र योजना के तहत दिसंबर 2016 से जनपद में ब्लॉक स्तर पर जेनेरिक दवाओं के जन औषधि केंद्र खोलने की कवायद चल रही है, लेकिन अभी तक तीन जन औषधि केंद्र खोले जा सके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा आवश्यकता महसूस की जा रही है क्योंकि जेनेरिक दवाएं बाजार में मेडिकल स्टोर पर बिकने वाली ब्रांडेड दवाओं से 60 से 70 फीसदी कम कीमत पर मुहैया कराई जाती है।
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र योजना के तहत शहर से लेकर गांवों में आम नागरिकों को सस्ती दवाएं मुहैया कराने के लिए जन औषधि केंद्र खोले जाने हैं। अभी तक शहर में पशु चिकित्सालय के सामने, रामापुर और खमरिया में जन औषधि केंद्र खोले गए हैं, जबकि अन्य जगहों के लिए आवेदन ही नहीं किए गए। जन औषधि केंद्र खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है और इसके लिए कोई भी व्यक्ति आवेदन कर सकता है। मेडिकल स्टोर पर बिकने वाली ब्रांडेड दवाओं की भांति जेनेरिक दवाएं कारगर हैं। कुछ भ्रांतियों के चलते लोगों ने जेनेरिक दवाओं की ओर कम ध्यान दिया है।
ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या ने बताया कि जेनेरिक दवाओं के नाम साल्ट के नाम पर ही रखे जाते हैं। मसलन पैरासीटामॉल साल्ट की दवा का नाम पैरासीटामॉल ही रहेगा। जबकि ब्रांडेड कंपनियां पैरासीटामॉल को अलग-अलग नामों से बनाकर कई गुना महंगे दामों पर बेचती हैं।
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जन औषधि केंद्र खोलने के लिए तीन आवेदन मिले थे, जिनका निस्तारण किया जा चुका है। अन्य ब्लॉकों से अभी आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं, जिससे इन क्षेत्रों में अभी केंद्र नहीं खोले जा सके हैं।
- संदेश मौर्या, ड्रग इंस्पेक्टर
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गरीबों को सस्ती दवाएं (जेनेरिक) उपलब्ध कराने के दावे अभी हकीकत में बदल नहीं पाए हैं और दवाएं अब भी गरीब की पहुंच से दूर ही हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र योजना के तहत दिसंबर 2016 से जनपद में ब्लॉक स्तर पर जेनेरिक दवाओं के जन औषधि केंद्र खोलने की कवायद चल रही है, लेकिन अभी तक तीन जन औषधि केंद्र खोले जा सके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा आवश्यकता महसूस की जा रही है क्योंकि जेनेरिक दवाएं बाजार में मेडिकल स्टोर पर बिकने वाली ब्रांडेड दवाओं से 60 से 70 फीसदी कम कीमत पर मुहैया कराई जाती है।
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र योजना के तहत शहर से लेकर गांवों में आम नागरिकों को सस्ती दवाएं मुहैया कराने के लिए जन औषधि केंद्र खोले जाने हैं। अभी तक शहर में पशु चिकित्सालय के सामने, रामापुर और खमरिया में जन औषधि केंद्र खोले गए हैं, जबकि अन्य जगहों के लिए आवेदन ही नहीं किए गए। जन औषधि केंद्र खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है और इसके लिए कोई भी व्यक्ति आवेदन कर सकता है। मेडिकल स्टोर पर बिकने वाली ब्रांडेड दवाओं की भांति जेनेरिक दवाएं कारगर हैं। कुछ भ्रांतियों के चलते लोगों ने जेनेरिक दवाओं की ओर कम ध्यान दिया है।
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ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या ने बताया कि जेनेरिक दवाओं के नाम साल्ट के नाम पर ही रखे जाते हैं। मसलन पैरासीटामॉल साल्ट की दवा का नाम पैरासीटामॉल ही रहेगा। जबकि ब्रांडेड कंपनियां पैरासीटामॉल को अलग-अलग नामों से बनाकर कई गुना महंगे दामों पर बेचती हैं।
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जन औषधि केंद्र खोलने के लिए तीन आवेदन मिले थे, जिनका निस्तारण किया जा चुका है। अन्य ब्लॉकों से अभी आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं, जिससे इन क्षेत्रों में अभी केंद्र नहीं खोले जा सके हैं।
- संदेश मौर्या, ड्रग इंस्पेक्टर