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ईश्वर के अस्तित्व पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए
Updated Thu, 14 Dec 2017 12:02 AM IST
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लखीमपुर खीरी।
चिन्मय मिशन के तत्वावधान और प्रद्युम्न नारायण दत्त सिंह के संयोजन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन कथा व्यास कौशिक चैतन्य ने चीरहरण, महारास की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि चीरहरण अविद्या का हरण है। इसी प्रकार महारास विषयों का रक्षण नहीं है। गोपियां जैसे ही वेणु वादन सुनती हैं। सब कुछ छोड़कर यमुना की ओर दौड़ पड़ती हैं। एक गोपी ने एक ही आंख में काजल लगाया था दूसरी आंख में काजल लगाना भूलकर रास स्थल की ओर दौड़ पड़ी। भगवान कृष्ण प्रत्येक गोपी के साथ अलग-अलग रूप धारण कर रास रचाते हैं।
शुकदेव जी कहते हैं कि इस रास में भगवान शिव भी नारी रूप धारण कर सम्मलित हुए थे इसी कारण उनका नाम गोपेश्वर महादेव पड़ा। संगीतकारों ने दो भजन भी सुनाए। कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी, तो सूनी ही रहती अदालत तुम्हारी। कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर के अस्तित्व पर कभी भी संदेह नहीं करना चाहिए। गोपियों को जब पता चलता है कि कंस ने धनुष यज्ञ में बलराम और श्रीकृष्ण को बुलाया है अक्रूर जी उन्हें लेने आए हैं तो बड़ा क्रोध करती हैं। कहती हैं यह तो बड़ा क्रूर है इसका नाम अक्रूर किसने रखा है। गोपियां कृष्ण को जाने से रोकने के लिए रथ के आगे लेट जाती हैं लेकिन कृष्ण के कहने पर हट जाती हैं क्योंकि प्रेम का दूसरा नाम त्याग है। कृष्ण ने कुवलया पीड़ हाथी और चांडूर, मुष्टिक जैसे कंस के मल्ल योद्धाओं का भी उद्धार किया। कंस के बाल पकड़कर सिंहासन के नीचे खींच कर उसका वध किया। कथा में वीएनडी सिंह, पीएनडी सिंह, डॉ. एससी मिश्र, उमेश मिश्र, राज कुमार त्रिवेदी, जगदीश सहगल, नंदलाल यादव आदि मौजूद रहे।
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चिन्मय मिशन के तत्वावधान और प्रद्युम्न नारायण दत्त सिंह के संयोजन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन कथा व्यास कौशिक चैतन्य ने चीरहरण, महारास की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि चीरहरण अविद्या का हरण है। इसी प्रकार महारास विषयों का रक्षण नहीं है। गोपियां जैसे ही वेणु वादन सुनती हैं। सब कुछ छोड़कर यमुना की ओर दौड़ पड़ती हैं। एक गोपी ने एक ही आंख में काजल लगाया था दूसरी आंख में काजल लगाना भूलकर रास स्थल की ओर दौड़ पड़ी। भगवान कृष्ण प्रत्येक गोपी के साथ अलग-अलग रूप धारण कर रास रचाते हैं।
शुकदेव जी कहते हैं कि इस रास में भगवान शिव भी नारी रूप धारण कर सम्मलित हुए थे इसी कारण उनका नाम गोपेश्वर महादेव पड़ा। संगीतकारों ने दो भजन भी सुनाए। कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी, तो सूनी ही रहती अदालत तुम्हारी। कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर के अस्तित्व पर कभी भी संदेह नहीं करना चाहिए। गोपियों को जब पता चलता है कि कंस ने धनुष यज्ञ में बलराम और श्रीकृष्ण को बुलाया है अक्रूर जी उन्हें लेने आए हैं तो बड़ा क्रोध करती हैं। कहती हैं यह तो बड़ा क्रूर है इसका नाम अक्रूर किसने रखा है। गोपियां कृष्ण को जाने से रोकने के लिए रथ के आगे लेट जाती हैं लेकिन कृष्ण के कहने पर हट जाती हैं क्योंकि प्रेम का दूसरा नाम त्याग है। कृष्ण ने कुवलया पीड़ हाथी और चांडूर, मुष्टिक जैसे कंस के मल्ल योद्धाओं का भी उद्धार किया। कंस के बाल पकड़कर सिंहासन के नीचे खींच कर उसका वध किया। कथा में वीएनडी सिंह, पीएनडी सिंह, डॉ. एससी मिश्र, उमेश मिश्र, राज कुमार त्रिवेदी, जगदीश सहगल, नंदलाल यादव आदि मौजूद रहे।
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