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पिकअप वाहन पर लगाया वन विभाग का मोनोग्राम
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मोहम्मदी। पहले से सीज एक पिकअप वाहन पर फर्जी तरीके से वन विभाग का मोनोग्राम लगाए जाने और रजिस्ट्रेशन नंबर व चेसिस नंबर के साथ खिलवाड़ किए जाने के कारण कस्बा चौकी इंचार्ज ने वन विभाग के रेंजर को फांस दिया। वाहन को मोहम्मदी थाने में खड़ा करवाने के साथ ही रेंजर के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। साथ में उन दो लोगों को भी आरोपी बनाया है, जिन्होंने रेंजर के बारे में यह बताया कि उन्होंने जंगल में कटी पड़ी लकड़ी ठिकाने लगाने के लिए उन दोनों को यह वाहन दिया था। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है।
प्रभारी निरीक्षक संजय त्यागी ने बताया कि रेहरिया पुलिस चौकी से करीब 500 मीटर पहले बिना नंबर प्लेट वाला एक पिकअप वाहन खड़ा था। उस पर लाल-हरा पेंट से वन विभाग का मोनोग्राम बना हुआ था। बुधवार रात कहीं जाते समय कस्बा चौकी इंचार्ज कृपेंद्र सिंह की इस पर नजर पड़ी तो उन्होंने उसमें अंदर बैठे दो युवकों को बुलाया। इस दोनों उतरकर भागने लगे, जिन्हें पुलिस ने घेरकर पकड़ लिया। पूछताछ में पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम जियाउलहक निवासी छेड़ीपुर और दूसरा रामचंद्र निवासी हिम्मतपुर थाना मोहम्मदी बताया। पुलिस ने दोनों से कड़ाई से पूछताछ की तो आरोपियों ने पुलिस को बताया कि यह गाड़ी रेंजर मोबीन आरिफ ने उन्हें देकर जंगल में कटी लकड़ियों को ठिकाने लगाने को कहा था।
पूछताछ के दौरान ही मौके पर रेहरिया चौकी के दो सिपाही अवधेश और महेश चंद्र वर्मा भी पहुंच गए। उन्होंने चौकी इंचार्ज को बताया कि यह वाहन पहले ही सीज किया जा चुका है। बताया कि रजिस्ट्रेशन नंबर और चेचिस नंबर मिटाकर वन विभाग का मोनो लगाकर उसे चलाया जा रहा है। दोनों लोगों के पास वाहन के कोई प्रपत्र नहीं थे। न चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस था। पुलिस ने पुलिस ने एसआई कृपेंद्र सिंह की रेंजर मोबीन अहमद, जियाउलहक और रामचंद्र के खिलाफ जालसाजी और धोखाड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। जियाउलहक और रामचंद्र का कहना है कि रेंजर ने उन्हें दैनिक मजदूरी पर रखा था और उसके बदले उन्हें चार हजार रुपये प्रति माह दिए जाते थे। मामले की विवेचना चौकी इंचार्ज मूडा निजाम संतोष यादव को सौंपी गई है।
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ऐसा मामला संज्ञान में आया है। अभी एफआईआर नहीं देखी है, जिसे देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। रेंजर के खिलाफ लगे आरोपों की गहनता से जांच कराई जाएगी। -समीर वर्मा, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग
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प्रभारी निरीक्षक संजय त्यागी ने बताया कि रेहरिया पुलिस चौकी से करीब 500 मीटर पहले बिना नंबर प्लेट वाला एक पिकअप वाहन खड़ा था। उस पर लाल-हरा पेंट से वन विभाग का मोनोग्राम बना हुआ था। बुधवार रात कहीं जाते समय कस्बा चौकी इंचार्ज कृपेंद्र सिंह की इस पर नजर पड़ी तो उन्होंने उसमें अंदर बैठे दो युवकों को बुलाया। इस दोनों उतरकर भागने लगे, जिन्हें पुलिस ने घेरकर पकड़ लिया। पूछताछ में पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम जियाउलहक निवासी छेड़ीपुर और दूसरा रामचंद्र निवासी हिम्मतपुर थाना मोहम्मदी बताया। पुलिस ने दोनों से कड़ाई से पूछताछ की तो आरोपियों ने पुलिस को बताया कि यह गाड़ी रेंजर मोबीन आरिफ ने उन्हें देकर जंगल में कटी लकड़ियों को ठिकाने लगाने को कहा था।
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पूछताछ के दौरान ही मौके पर रेहरिया चौकी के दो सिपाही अवधेश और महेश चंद्र वर्मा भी पहुंच गए। उन्होंने चौकी इंचार्ज को बताया कि यह वाहन पहले ही सीज किया जा चुका है। बताया कि रजिस्ट्रेशन नंबर और चेचिस नंबर मिटाकर वन विभाग का मोनो लगाकर उसे चलाया जा रहा है। दोनों लोगों के पास वाहन के कोई प्रपत्र नहीं थे। न चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस था। पुलिस ने पुलिस ने एसआई कृपेंद्र सिंह की रेंजर मोबीन अहमद, जियाउलहक और रामचंद्र के खिलाफ जालसाजी और धोखाड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। जियाउलहक और रामचंद्र का कहना है कि रेंजर ने उन्हें दैनिक मजदूरी पर रखा था और उसके बदले उन्हें चार हजार रुपये प्रति माह दिए जाते थे। मामले की विवेचना चौकी इंचार्ज मूडा निजाम संतोष यादव को सौंपी गई है।
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ऐसा मामला संज्ञान में आया है। अभी एफआईआर नहीं देखी है, जिसे देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। रेंजर के खिलाफ लगे आरोपों की गहनता से जांच कराई जाएगी। -समीर वर्मा, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग