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योग से निरोग बनाने की मुहिम को झटका, रोगियों का इलाज लटका
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लखीमपुर खीरी। प्रधानमंत्री मोदी की योग को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई मुहिम जिले में दम तोड़ रही है, जिसका कारण जिम्मेदारों की उदासीनता है। जिला अस्पताल में आयुष मंत्रालय की ओर से संचालित जीवन शैली क्लीनिक में पिछले छह माह से योग प्रशिक्षक ही नहीं है। इस कारण निरोगी बनने की आस लेकर क्लीनिक आने वाले लोगों को मायूस होना पड़ रहा है।
यूनानी चिकित्सा पद्घति एवं योग को बढ़ावा देने के लिए जिला अस्पताल में तीन साल पहले जीवन शैली क्लीनिक की शुरूआत हुई, जिसमें यूनानी डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एक मल्टी टॉस वर्कर सहित योग प्रशिक्षक की तैनाती हुई, जिससे कैंसर, उच्च रक्तचाप, हार्ट अटैक एवं शुगर से पीड़ित लोगों को यूूनानी दवाओं एवं योग के माध्यम से रोग मुक्त किया जा सके। क्लीनिक खुलने के बाद पहले तो ओपीडी में मरीजों की संख्या काफी कम रही, लेकिन जैसे-जैसे लोगों को फायदा होता गया कि भीड़ बढ़ती गई। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या सौ तक पहुंच गई, लेकिन जनवरी में योग प्रशिक्षक के रिजाइन कर देना मरीजों को भारी पड़ गया। निरोगी बनने की आस में जीवन शैली क्लीनिक पहुंच रहे मरीजों को योग प्रशिक्षक के न होने से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
योग प्रशिक्षक ही नहीं कई यूनानी डॉक्टरों ने भी रिजाइन कर दिया है, जिसकी सूचना आयुष मंत्रालय दिल्ली को भेजी जा चुकी है। आयुष मंत्रालय को ही रिक्त पदों पर तैनाती करनी है। हमारा काम सिर्फ रिक्त पदों के बारे में जानकारी देना है।
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- डॉ. जियाउल सिद्दीकी, स्टेट नोडल अधिकारी
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यूनानी चिकित्सा पद्घति एवं योग को बढ़ावा देने के लिए जिला अस्पताल में तीन साल पहले जीवन शैली क्लीनिक की शुरूआत हुई, जिसमें यूनानी डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एक मल्टी टॉस वर्कर सहित योग प्रशिक्षक की तैनाती हुई, जिससे कैंसर, उच्च रक्तचाप, हार्ट अटैक एवं शुगर से पीड़ित लोगों को यूूनानी दवाओं एवं योग के माध्यम से रोग मुक्त किया जा सके। क्लीनिक खुलने के बाद पहले तो ओपीडी में मरीजों की संख्या काफी कम रही, लेकिन जैसे-जैसे लोगों को फायदा होता गया कि भीड़ बढ़ती गई। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या सौ तक पहुंच गई, लेकिन जनवरी में योग प्रशिक्षक के रिजाइन कर देना मरीजों को भारी पड़ गया। निरोगी बनने की आस में जीवन शैली क्लीनिक पहुंच रहे मरीजों को योग प्रशिक्षक के न होने से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
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योग प्रशिक्षक ही नहीं कई यूनानी डॉक्टरों ने भी रिजाइन कर दिया है, जिसकी सूचना आयुष मंत्रालय दिल्ली को भेजी जा चुकी है। आयुष मंत्रालय को ही रिक्त पदों पर तैनाती करनी है। हमारा काम सिर्फ रिक्त पदों के बारे में जानकारी देना है।
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- डॉ. जियाउल सिद्दीकी, स्टेट नोडल अधिकारी