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सात फेरे लेकर एक-दूजे के हुए 149 जोड़े
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लखीमपुर खीरी। बेहजम रोड स्थित ‘द लोटस वैली’ मैरिज लॉन में शुक्रवार को 149 जोड़ों का रीति रिवाज से सामूहिक विवाह कराया गया। इसमें नौ ब्लॉक के कुल 150 जोड़ों का विवाह कराया जाना था लेकिन एक जोड़ा किन्हीं कारणवश कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सका।
बारात की अगवानी जनप्रतिनिधियों व अफसरों ने की। विवाह कार्यक्रम में 138 हिंदू जोड़ों ने वैदिक रीति रिवाज से सात फेरे लेकर एक-दूसरे का सात जन्मों तक साथ निभाने की शपथ ली और 11 मुस्लिम जोड़ों ने निकाह के जरिए अपने जीवन साथी का हाथ थामा।
डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने नवविवाहित दंपतियों को आशीर्वाद दिया और उनके सुखद भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान की तरह है। प्रदेश सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आज हुआ वैवाहिक समारोह उसी का उदाहरण है।
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विधायक योगेश वर्मा एवं मंजू त्यागी ने नव विवाहित जोड़ों का आशीर्वाद देते हुए कहा कि समाज की हर बेटी हमारी है। सरकार बेटियों की शिक्षा के साथ ही उनको आगे बढ़ाने का काम कर रही है। यहां तक की उनकी शादी की जिम्मेदारी भी सरकार निभा रही है। सीडीओ अनिल कुमार सिंह, सांसद प्रतिनिधि अरविंद सिंह संजय, जितेंद्र त्रिपाठी, ब्लाक प्रमुख लखीमपुर दिव्या सिंह समेत अन्य जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने हिस्सा लेकर नव विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधांशु शेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में जीवन में खुशहाली व गृहस्थी संचालन में मदद के लिए 35 हजार की आर्थिक सहायता कन्या के खाते में दी जाती है। साथ ही विवाहित जोड़ों को विवाह संस्कार के लिए जिला क्रय समिति द्वारा निर्धारित उपहार वर वधु के कपड़े, बिछिया, पायल, बर्तन आदि दिया गया है। एक जोड़े पर सरकार कुल 51 हजार रुपये खर्च कर रही है। कार्यक्रम में बीडीओ प्रीति तिवारी, पीयूष सिंह, शिखर श्रीवास्तव, प्रदीप चौधरी, कमलाकांत, नीरज दुबे सभी जोड़ों के परिजन मौजूद रहे।
कई को नहीं मिल पाया खाना - सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 149 जोड़ों के साथ ही वर वधू के चुनिंदा परिजन व रिश्तेदार भी शामिल हुए। इससे कार्यक्रम स्थल पर हजारों की भीड़ जुटी। प्रत्येक जोड़े की शादी पर टेंट, भोजन आदि की व्यवस्था के लिए सरकार से छह हजार रुपये प्रति जोड़े के हिसाब से धनराशि आवंटित की गई।
इस लिहाज से करीब नौ लाख रुपये आयोजन पर खर्च हुए, लेकिन खाने-पीने की व्यवस्था बदहाल दिखी। अपराह्न 2.40 बजे खाने की शुरुआत हुई, लेकिन 16 मिनट में यानी 2.56 बजे खाना समाप्त हो गया। खाने के लिए लूट जैसी मच गई। किसी को दाल-चावल मिला तो किसी को सिर्फ रोटी ही मिल पाई। इससे बहुत से लोग खाना पाने से वंचित रह गए।
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बारात की अगवानी जनप्रतिनिधियों व अफसरों ने की। विवाह कार्यक्रम में 138 हिंदू जोड़ों ने वैदिक रीति रिवाज से सात फेरे लेकर एक-दूसरे का सात जन्मों तक साथ निभाने की शपथ ली और 11 मुस्लिम जोड़ों ने निकाह के जरिए अपने जीवन साथी का हाथ थामा।
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डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने नवविवाहित दंपतियों को आशीर्वाद दिया और उनके सुखद भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान की तरह है। प्रदेश सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आज हुआ वैवाहिक समारोह उसी का उदाहरण है।
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विधायक योगेश वर्मा एवं मंजू त्यागी ने नव विवाहित जोड़ों का आशीर्वाद देते हुए कहा कि समाज की हर बेटी हमारी है। सरकार बेटियों की शिक्षा के साथ ही उनको आगे बढ़ाने का काम कर रही है। यहां तक की उनकी शादी की जिम्मेदारी भी सरकार निभा रही है। सीडीओ अनिल कुमार सिंह, सांसद प्रतिनिधि अरविंद सिंह संजय, जितेंद्र त्रिपाठी, ब्लाक प्रमुख लखीमपुर दिव्या सिंह समेत अन्य जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने हिस्सा लेकर नव विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधांशु शेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में जीवन में खुशहाली व गृहस्थी संचालन में मदद के लिए 35 हजार की आर्थिक सहायता कन्या के खाते में दी जाती है। साथ ही विवाहित जोड़ों को विवाह संस्कार के लिए जिला क्रय समिति द्वारा निर्धारित उपहार वर वधु के कपड़े, बिछिया, पायल, बर्तन आदि दिया गया है। एक जोड़े पर सरकार कुल 51 हजार रुपये खर्च कर रही है। कार्यक्रम में बीडीओ प्रीति तिवारी, पीयूष सिंह, शिखर श्रीवास्तव, प्रदीप चौधरी, कमलाकांत, नीरज दुबे सभी जोड़ों के परिजन मौजूद रहे।
कई को नहीं मिल पाया खाना - सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 149 जोड़ों के साथ ही वर वधू के चुनिंदा परिजन व रिश्तेदार भी शामिल हुए। इससे कार्यक्रम स्थल पर हजारों की भीड़ जुटी। प्रत्येक जोड़े की शादी पर टेंट, भोजन आदि की व्यवस्था के लिए सरकार से छह हजार रुपये प्रति जोड़े के हिसाब से धनराशि आवंटित की गई।
इस लिहाज से करीब नौ लाख रुपये आयोजन पर खर्च हुए, लेकिन खाने-पीने की व्यवस्था बदहाल दिखी। अपराह्न 2.40 बजे खाने की शुरुआत हुई, लेकिन 16 मिनट में यानी 2.56 बजे खाना समाप्त हो गया। खाने के लिए लूट जैसी मच गई। किसी को दाल-चावल मिला तो किसी को सिर्फ रोटी ही मिल पाई। इससे बहुत से लोग खाना पाने से वंचित रह गए।