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दुधवा के सैलानियों को लुभाएगा हाथियों का कुनबा
Updated Fri, 16 Nov 2018 04:51 PM IST
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दुधवा के सैलानियों को लुभाएगा हाथियों का कुनबा
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। यूं तो दुधवा नेशनल पार्क का चप्पा-चप्पा प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। दुर्लभ वन्यजीवों से भरे दुधवा पार्क का भ्रमण बेहद रोमांचकारी है। इस बार बच्चों के लिए खास तौर पर एलिफैंट हाउस को सजाया संवारा गया है। ताकि बच्चे वहां जाकर हाथियों के रहन-सहन, उनके स्वभाव, गतिविधियां, भोजन और महावतों के साथ उनके संबंधों को देखकर न केवल रोमांचित हो सकेंगे बल्कि उनके बारे में उपयोगी और ज्ञानवर्द्धक जानकारी भी हासिल कर सकेंगे।
दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने सलूकापुर स्थित बेस कैंप में बने एलिफैंट हाउस को विशेष तौर पर सजाया संवारा है। एलिफैंट हाउस को आंखों को लुभाने वाला रंग दिया गया है। इसी के निकट बने महावतों के रहने के स्थान में भी सुधार किया गया है। पर्यटन के दौरान सैलानी इस सलूकापुर बेस कैंप में जाकर हाथियों के रहन सहन और उनके खान-पान के बारे में अध्ययन कर सकेंगे। एलिफैंट हाउस के पास बनी हाथियों की मेस को भी दर्शनीय बनाया गया है। जहां बच्चे हाथियों के खाना बनने का तरीका भी जान सकेंगे।
सलूकापुर के अलावा भीरा वन निगम डिपो स्थित एलिफैंट कैंप भी सैलानियों के देखने के लिए उपलब्ध रहेगा। यहां कर्नाटक के बांदीपुर नेशनल पार्क से लाए गए 10 हाथी रखे गए हैं। इनमें से एक मादा हाथी टेरेसा बाघ हमले में घायल होने के बाद दुधवा लाई गई है जहां उसका इलाज चल रहा है। सैलानी इन हाथियों के साथ फोटो भी ले सकेंगे। बिजनौर के कालागढ़ जंगल में भटककर अपनी मां से अलग हुई नन्हीं मादा हाथी को देखरेख के लिए दुधवा लाया गया है। दुर्गा का नाम पा चुकी यह नन्हीं हाथी पहले ही दिन से सैलानियों की दुलारी बन गई है। बच्चे इसके साथ खेलकर और उसकी किलकारियों का आनंद उठा रहे हैं। दुर्गा के साथ बच्चों के फोटो खिंचाने की होड़ लगी हुई है।
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इस बार बांके ताल के गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-1 और भादी ताल में शुरू की गई गैंडा पुनर्वास योजना फेज-2 के गेटों को भी आकर्षक बनाया गया है। इसके साथ ही दुधवा नेशनल पार्क में बने भवनों को एक जैसा रंग देकर आकर्षक बनाया गया है। भादी ताल के निकट पेट्रोलिंग टीमों के ठहरने के लिए बने भवन का भी रंग रोगन कर आकर्षक स्वरूप दिया गया है। इस बार दुधवा के भवन, गेट आदि को यूनीफाइड कलर देने का प्रयास किया गया है। इससे दुधवा और आकर्षक हुआ है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि इस बार दुधवा को यूनीफाइड कलर से नया स्वरूप दिया गया है। कर्नाटक की तर्ज पर यहां भी हाथी पार्क विकसित किया जा रहा है।
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। यूं तो दुधवा नेशनल पार्क का चप्पा-चप्पा प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। दुर्लभ वन्यजीवों से भरे दुधवा पार्क का भ्रमण बेहद रोमांचकारी है। इस बार बच्चों के लिए खास तौर पर एलिफैंट हाउस को सजाया संवारा गया है। ताकि बच्चे वहां जाकर हाथियों के रहन-सहन, उनके स्वभाव, गतिविधियां, भोजन और महावतों के साथ उनके संबंधों को देखकर न केवल रोमांचित हो सकेंगे बल्कि उनके बारे में उपयोगी और ज्ञानवर्द्धक जानकारी भी हासिल कर सकेंगे।
दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने सलूकापुर स्थित बेस कैंप में बने एलिफैंट हाउस को विशेष तौर पर सजाया संवारा है। एलिफैंट हाउस को आंखों को लुभाने वाला रंग दिया गया है। इसी के निकट बने महावतों के रहने के स्थान में भी सुधार किया गया है। पर्यटन के दौरान सैलानी इस सलूकापुर बेस कैंप में जाकर हाथियों के रहन सहन और उनके खान-पान के बारे में अध्ययन कर सकेंगे। एलिफैंट हाउस के पास बनी हाथियों की मेस को भी दर्शनीय बनाया गया है। जहां बच्चे हाथियों के खाना बनने का तरीका भी जान सकेंगे।
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सलूकापुर के अलावा भीरा वन निगम डिपो स्थित एलिफैंट कैंप भी सैलानियों के देखने के लिए उपलब्ध रहेगा। यहां कर्नाटक के बांदीपुर नेशनल पार्क से लाए गए 10 हाथी रखे गए हैं। इनमें से एक मादा हाथी टेरेसा बाघ हमले में घायल होने के बाद दुधवा लाई गई है जहां उसका इलाज चल रहा है। सैलानी इन हाथियों के साथ फोटो भी ले सकेंगे। बिजनौर के कालागढ़ जंगल में भटककर अपनी मां से अलग हुई नन्हीं मादा हाथी को देखरेख के लिए दुधवा लाया गया है। दुर्गा का नाम पा चुकी यह नन्हीं हाथी पहले ही दिन से सैलानियों की दुलारी बन गई है। बच्चे इसके साथ खेलकर और उसकी किलकारियों का आनंद उठा रहे हैं। दुर्गा के साथ बच्चों के फोटो खिंचाने की होड़ लगी हुई है।
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इस बार बांके ताल के गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-1 और भादी ताल में शुरू की गई गैंडा पुनर्वास योजना फेज-2 के गेटों को भी आकर्षक बनाया गया है। इसके साथ ही दुधवा नेशनल पार्क में बने भवनों को एक जैसा रंग देकर आकर्षक बनाया गया है। भादी ताल के निकट पेट्रोलिंग टीमों के ठहरने के लिए बने भवन का भी रंग रोगन कर आकर्षक स्वरूप दिया गया है। इस बार दुधवा के भवन, गेट आदि को यूनीफाइड कलर देने का प्रयास किया गया है। इससे दुधवा और आकर्षक हुआ है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि इस बार दुधवा को यूनीफाइड कलर से नया स्वरूप दिया गया है। कर्नाटक की तर्ज पर यहां भी हाथी पार्क विकसित किया जा रहा है।