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हर बार अच्छी फसल की उम्मीद में बढ़ता गया कर्जा
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:14 AM IST
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धौरहरा।
हर साल बाढ़ और कटान की त्रासदी झेल रहे धौरहरा तहसील के हर इलाके में गरीबी का मंजर दिखाई देता है, जिनके पास जमीनें हैं वह भी हर साल आने वाली बाढ़ के कारण गरीबी से उबर नहीं पा रहे। क्षेत्र में फैली गरीबी और आर्थिक असमानता के चलते सूदखोरों ने ऐसा मकड़जाल फैला रखा है कि अधिकांश लोग कर्ज में डूबे हुए हैं। यह कर्ज अक्सर ग्रामीणों की आत्महत्या का कारण बनता है।
धौरहरा तहसील क्षेत्र में इससे पहले भी कर्ज में डूबे एक दंपति समेत तीन लोग मौत को गले लगा चुके हैं। पांच साल पहले सिरसी गांव निवासी दामादेर ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। इससे पहले धौरहरा कस्बा निवासी डॉ. शिवकुमार सूदखोरों के शिकंजे में कुछ ऐसा फंसे कि उन्हें पत्नी समेत जहर खाकर जान गंवानी पड़ी। इन दोनों घटनाओं के बाद भी पुलिस और प्रशासनिक अफसर संजीदा नहीं हुए और न तो सूदखोरों पर कोई शिकंजा कसा गया। गांव कस्बों में आज भी सूदखोर गरीबों का खून चूस कर मोटी कमाई कर रहे हैं।
बुधवार को गांव सोहरिया निवासी कपिल वर्मा ने सूदखोरों के तकादे से तंग आकर जिंदगी की डोर तोड़ ली। इस घटना से उसके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। अपने परिवार में कपिल अकेला कमाने वाला व्यक्ति था। उसके भाई विनोद की 15 साल पहले हत्या हो गई थी। मृतक कपिल का एक बेटा अनुराग लखनऊ में स्नातक की पढ़ाई कर रहा है। मृतक पर बड़े भाई के परिवार को पालने का जिम्मा था, जो उसकी कमाई से पूरा नहीं पड़ता था।
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घरवालों के मुताबिक कहने को कपिल के पास पांच एकड़ जमीन है लेकिन बाढ़ के कारण वह उससे पूरी उपज नहीं ले पाता था। अगले साल अच्छी फसल होने की उम्मीद में वह गांव के सूदखोरों से कर्ज लेता चला गया, लेकिन हर बार फसल ने उसका साथ नहीं दिया और वह कर्ज के बोझ तले दबता चला गया जब यह बोझ बर्दाश्त से बाहर हो गया और सूदखोरों ने उसे परेशान करना शुरू किया तो कपिल पूरी तरह टूट गया और अपनी ही बाग के पेड़ से लटक कर फांसी लगाकर मौत को गले लगा लिया।
कर्जा लेकर की थी बेटी की शादी
धौरहरा। सोहरिया गांव निवासी कपिल वर्मा ने करीब दो साल पहले अपनी बेटी की शादी काफी धूमधाम से की थी। परिवार वाले बताते हैं कि इस शादी के लिए गांव के ही कुछ लोगों से करीब छह लाख कर्जा लिया था। इसके अलावा भाई विनोद की हत्या के केस की पैरवी करने पर कपिल का काफी पैसा खर्च हो रहा था, जिसके लिए भी उसने सूदखोरों से उधार ले रखा था। लखनऊ में रहकर पढ़ाई कर रहे बेटे को भी पैसे की कमी महसूस नहीं होने दी।
मूलधन कम, ब्याज पर ब्याज से बढ़ा कर्ज
परिवार वालों की मानें तो बेटी की शादी से पहले कपिल ने इतना अधिक कर्जा नहीं लिया था, बल्कि जिससे तीन साल पहले दो लाख लिए उस सूदखोर ने ब्याज पर ब्याज लगाकर सात लाख कर्जा बना दिया। इसी तरह अन्य सूदखोरों ने ब्याज पर ब्याज लगाकर कर्ज ली गई रकम को कई गुना अधिक बना दिया।
बुधवार की सुबह सूदखोर ने धमकाया था
मृतक कपिल के परिवार वालों का कहना है कि बुधवार की सुबह गांव का ही एक सूदखोर तगादा करने घर आया था। उसने जल्द रुपये देने का दबाव बनाते हुए कपिल को धमकाया भी था, जिसके बाद कपिल घर से चला गया था।
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हर साल बाढ़ और कटान की त्रासदी झेल रहे धौरहरा तहसील के हर इलाके में गरीबी का मंजर दिखाई देता है, जिनके पास जमीनें हैं वह भी हर साल आने वाली बाढ़ के कारण गरीबी से उबर नहीं पा रहे। क्षेत्र में फैली गरीबी और आर्थिक असमानता के चलते सूदखोरों ने ऐसा मकड़जाल फैला रखा है कि अधिकांश लोग कर्ज में डूबे हुए हैं। यह कर्ज अक्सर ग्रामीणों की आत्महत्या का कारण बनता है।
धौरहरा तहसील क्षेत्र में इससे पहले भी कर्ज में डूबे एक दंपति समेत तीन लोग मौत को गले लगा चुके हैं। पांच साल पहले सिरसी गांव निवासी दामादेर ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। इससे पहले धौरहरा कस्बा निवासी डॉ. शिवकुमार सूदखोरों के शिकंजे में कुछ ऐसा फंसे कि उन्हें पत्नी समेत जहर खाकर जान गंवानी पड़ी। इन दोनों घटनाओं के बाद भी पुलिस और प्रशासनिक अफसर संजीदा नहीं हुए और न तो सूदखोरों पर कोई शिकंजा कसा गया। गांव कस्बों में आज भी सूदखोर गरीबों का खून चूस कर मोटी कमाई कर रहे हैं।
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बुधवार को गांव सोहरिया निवासी कपिल वर्मा ने सूदखोरों के तकादे से तंग आकर जिंदगी की डोर तोड़ ली। इस घटना से उसके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। अपने परिवार में कपिल अकेला कमाने वाला व्यक्ति था। उसके भाई विनोद की 15 साल पहले हत्या हो गई थी। मृतक कपिल का एक बेटा अनुराग लखनऊ में स्नातक की पढ़ाई कर रहा है। मृतक पर बड़े भाई के परिवार को पालने का जिम्मा था, जो उसकी कमाई से पूरा नहीं पड़ता था।
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घरवालों के मुताबिक कहने को कपिल के पास पांच एकड़ जमीन है लेकिन बाढ़ के कारण वह उससे पूरी उपज नहीं ले पाता था। अगले साल अच्छी फसल होने की उम्मीद में वह गांव के सूदखोरों से कर्ज लेता चला गया, लेकिन हर बार फसल ने उसका साथ नहीं दिया और वह कर्ज के बोझ तले दबता चला गया जब यह बोझ बर्दाश्त से बाहर हो गया और सूदखोरों ने उसे परेशान करना शुरू किया तो कपिल पूरी तरह टूट गया और अपनी ही बाग के पेड़ से लटक कर फांसी लगाकर मौत को गले लगा लिया।
कर्जा लेकर की थी बेटी की शादी
धौरहरा। सोहरिया गांव निवासी कपिल वर्मा ने करीब दो साल पहले अपनी बेटी की शादी काफी धूमधाम से की थी। परिवार वाले बताते हैं कि इस शादी के लिए गांव के ही कुछ लोगों से करीब छह लाख कर्जा लिया था। इसके अलावा भाई विनोद की हत्या के केस की पैरवी करने पर कपिल का काफी पैसा खर्च हो रहा था, जिसके लिए भी उसने सूदखोरों से उधार ले रखा था। लखनऊ में रहकर पढ़ाई कर रहे बेटे को भी पैसे की कमी महसूस नहीं होने दी।
मूलधन कम, ब्याज पर ब्याज से बढ़ा कर्ज
परिवार वालों की मानें तो बेटी की शादी से पहले कपिल ने इतना अधिक कर्जा नहीं लिया था, बल्कि जिससे तीन साल पहले दो लाख लिए उस सूदखोर ने ब्याज पर ब्याज लगाकर सात लाख कर्जा बना दिया। इसी तरह अन्य सूदखोरों ने ब्याज पर ब्याज लगाकर कर्ज ली गई रकम को कई गुना अधिक बना दिया।
बुधवार की सुबह सूदखोर ने धमकाया था
मृतक कपिल के परिवार वालों का कहना है कि बुधवार की सुबह गांव का ही एक सूदखोर तगादा करने घर आया था। उसने जल्द रुपये देने का दबाव बनाते हुए कपिल को धमकाया भी था, जिसके बाद कपिल घर से चला गया था।