फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   मोहम्मदी रेंज में बाघ हमले की छह माह में दूसरी घटना

मोहम्मदी रेंज में बाघ हमले की छह माह में दूसरी घटना

Mon, 28 Aug 2017 05:27 PM IST
Updated Mon, 28 Aug 2017 05:27 PM IST
विज्ञापन
मोहम्मदी रेंज में बाघ हमले की छह माह में दूसरी घटना

विज्ञापन

लखीमपुर खीरी। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज में छह माह के अंदर बाघ के हमले की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 13 अप्रैल को जंगल में अपनी भैंस ढूंढने गए मोहम्मदी कोतवाली क्षेत्र के देवियापुर गांव निवासी 40 वर्षीय शर्मा लाल को बाघ ने अपना निवाला बनाया था। उसका अधखाया क्षत विक्षत शव भी अगले दिन जंगल से बरामद हुआ था।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज में जंगल ज्यादा घना और बड़ा नहीं है। इसके बावजूद यहां बाघों की मौजूदगी वन विभाग के लिए खुशी की खबर हो सकती है लेकिन ग्रामीणों के लिए दहशत का कारण भी है। बाघों की लोकेशन जानने के लिए मोहम्मदी रेंज के जंगल में लगाए कैमरों से यहां बाघों की मौजूदगी पता चली है। करीब चार माह पहले मोहम्मदी रेंज की देवीपुर बीट में तीन बाघों और दो शावकों की तस्वीरें कैमरों में ट्रैप हुई थी। इसके अलावा जंगल के बाहर तक बाघों के पद मार्क कई बार दिखाई दिए थे। तत्कालीन डीएफओ अखिलेश पांडेय ने भी इसकी पुष्टि की थी।
विज्ञापन

मोहम्मदी में अधिक घना और बड़ा जंगल न होने के बावजूद वहां बाघों की संख्या के बढ़ने से आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ रहा है। नर बाघ अपने साम्राज्य में किसी दूसरे नर बाघ की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं करता। यदि यहां केवल दो नर बाघ भी हैं तो यह जंगल उनकी टेरीटरी के लिए छोटा पड़ रहा है। ऐसे में बाघों का बाहर निकलना स्वाभाविक है। जंगल में कठिना नदी का किनारा बाघों के लिए आदर्श प्राकृतिक आवास है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वन विभाग की बार-बार चेतावनी के बावजूद ग्रामीणों की जंगल में घुसपैठ नहीं रुक रही है। घास फूस लेने और जानवरों केे चराने के लिए ग्रामीण जंगल के अंदर तक घुस जाते हैं। हालांकि मोहम्मदी रेंज में बाघ हमले की दोनों घटनाएं जंगल से बाहर लेकिन सटे इलाके में हुई हैं। इससे ग्रामीणों के सामने खेती बाड़ी की समस्या भी पैदा हो रही है। घटना के बाद ग्रामीण कठिना नदी के आसपास अपने खेतों में जाने से भी डरने लगे हैं।

इंसेट.......
दोनों शिकारों को बाघ ने इत्मिनान से खाया
मोहम्मदी रेंज में बाघ के ग्रामीणों को निवाला बनाने की इन दोनों घटनाओं में सबसे बड़ी समानता यह है कि शिकार के करने के बाद बाघ दोनों के शरीर के अधिकांश हिस्से को खा गया। इससे साबित यह होता है कि बाघ को शिकार करने के बाद उसे खाने का पूरा मौका मिल गया। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि बाघ एक बार में शिकार को पूरा नहीं खाता, कुछ हिस्सा खाने के बाद उसे छोड़ देता है फिर दोबारा आकर उसे खाता है। इन घटनाओं बाघ को अपना शिकार खाने का पूरा-पूरा मौका मिला है।
----------------------------
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed