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Kushinagar News: बुद्धा घाट पर हिरण्यवती नदी में उठा सकेंगे नौकायन का लुत्फ
Tue, 05 Mar 2024 01:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 05 Mar 2024 01:37 AM IST
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पकवा इनार। बौद्ध कालीन हिरण्यवती नदी के बुद्धा घाट पर नगरपालिका की तरफ से पुल के नीचे पक्की दीवार बनवाई जा रही है। इसके निर्माण का मकसद घाट के पास नदी में पर्याप्त जल स्तर बनाए रखना है। ताकि नदी में नौकायन का संचालन हो सके।
बौद्ध कालीन हिरण्यवती नदी में बुद्धा घाट पर नौकायन का संचालन होता रहा है। लेकिन गर्मी के मौसम में नदी का जलस्तर काफी नीचे चला जाता है, जिससे नदी सूख जाती है। इससे नौकायन का संचालन नहीं हो पाता है। जबकि बुद्धा घाट का नौकायन का ख्याति है। नौकायन का लुत्फ उठाने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं, जहां नौकायन में बैठकर लुत्फ उठाते हैं। मौजूदा समय में नदी में जल स्तर काफी नीचे चला गया है। जिससे नौकायन संचालन में बाधा आ रही है। इसके मद्देनजर नगरपालिका की तरफ से बुद्धा घाट स्थित पुल के नीचे ईंट, सीमेंट व बालू से पक्की दीवार तैयार कराई जा रही है। नदी में पानी का जलस्तर वृद्धि के लिए विद्युत मोटर चलाकर उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। ईओ शैलेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि नदी का जल स्तर बनाए रखने के लिए दिवार बनवाई जा रही है। गर्मी के मौसम में भी जलस्तर बना रहे, ताकि नौकायन व नदी का सौंदर्य बना रहे। वहीं बौद्ध अनुयायियों को नदी की पवित्रता से रू-ब-रू भी कराया जा सके।
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बौद्ध कालीन हिरण्यवती नदी में बुद्धा घाट पर नौकायन का संचालन होता रहा है। लेकिन गर्मी के मौसम में नदी का जलस्तर काफी नीचे चला जाता है, जिससे नदी सूख जाती है। इससे नौकायन का संचालन नहीं हो पाता है। जबकि बुद्धा घाट का नौकायन का ख्याति है। नौकायन का लुत्फ उठाने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं, जहां नौकायन में बैठकर लुत्फ उठाते हैं। मौजूदा समय में नदी में जल स्तर काफी नीचे चला गया है। जिससे नौकायन संचालन में बाधा आ रही है। इसके मद्देनजर नगरपालिका की तरफ से बुद्धा घाट स्थित पुल के नीचे ईंट, सीमेंट व बालू से पक्की दीवार तैयार कराई जा रही है। नदी में पानी का जलस्तर वृद्धि के लिए विद्युत मोटर चलाकर उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। ईओ शैलेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि नदी का जल स्तर बनाए रखने के लिए दिवार बनवाई जा रही है। गर्मी के मौसम में भी जलस्तर बना रहे, ताकि नौकायन व नदी का सौंदर्य बना रहे। वहीं बौद्ध अनुयायियों को नदी की पवित्रता से रू-ब-रू भी कराया जा सके।
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