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Kushinagar News: विदेशी सिक्कों की खनक सुनकर गए सात समुंदर पार...धोखा खाया, बन गए कर्जदार

Fri, 20 Dec 2024 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Fri, 20 Dec 2024 12:00 AM IST
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Went across seven seas after hearing the tinkling of foreign coins...got cheated, became a debtor
पडरौना। विदेश में नौकरी दिलाने वाले जालसाजों के नेटवर्क में फंसने से बेरोजगार युवा कर्जदार बन जा रहे हैं। सात समुंदर पार घर की माली हालत सुधारने का सपना संजोकर विदेश गए इन युवकों को बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही है।
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वेतन भी समय से नहीं मिल रहा। एजेंट के विदेशी सिक्कों की खनक का सब्जबाग देखकर विदेश जाने के लिए तैयार हुए इन युवाओं की माली हालत तो सुधरी नहीं, लेकिन वे कर्जदार जरूर हो गए। छह माह बाद किसी तरह वापसी हुई, लेकिन इस बीच घर के हालात और खराब हो गए।
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संकट में फंसाने के बाद एजेंट भी मोबाइल का स्विच ऑफ कर नौ दो ग्यारह हो गया। जालसाजों के फेर में फंसकर अपनी जमा पूंजी भी गंवा चुके युवकों का कहना है कि इससे बेहतर अपने देश में रहकर काम या स्वरोजगार बेहतर विकल्प है।
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बेरोजगार युवकों को एजेंट विदेशों में बेहतर रोजगार का झांसा देकर ठगी के शिकार बना रहे हैं। एक साल में कुशीनगर जिले के अलग-अलग कस्बों में ऑफिस खोलकर जालसाज 200 से अधिक बेरोजगारों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके हैं। कई मामलों में पुलिस केस दर्ज कर जालसाजों को जेल भी भेज चुकी हैं, बावजूद विदेश में रोेजगार दिलाने के नाम पर ठगी का सिलसिला थम नहीं रहा है।

पूर्वांचल से बिहार प्रांत तक फैले जालसाजों का नेटवर्क सक्रिय है। महराजगंज जिले के नौतनवा तहसील के झिगटी गांव निवासी हेमंत चौरसिया ने बताया कि बीते अगस्त माह में एक एजेंट के माध्यम से ओमान हेल्पर के काम पर गया था। आठ घंटे काम करने की जगह 16 घंटे मजदूर का काम लिया जाता था। किसी तरह तीन माह तक रहा। प्रवासी मदर फाउंडेशन की पहल के बाद किसी तरह घर वापसी हुई। 70 हजार का कर्जदार हो गया, एजेंट पर रुपये वापस करने के लिए दबाव बनाया, लेकिन रुपये वापस नहीं हो सका। एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वाले जालसाजों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। लोग भी जागरूक हो रहे हैं। जिले में ऑफिस खोलकर विदेश भेजने का काम करने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है। इनकी सूची भी बनवाई जा रही है। कुशीनगर के प्रवीण कुमार और त्रिभुवन कुमार ने बताया कि घर की माली हालत खराब थी। सोचा था कि विदेश जाकर मेहनत से काम करूंगा और घर की आर्थिक हालत में सुधार हो जाएगा, लेकिन एजेंट के चक्कर में फंसकर बर्बाद हो गया। वियतनाम जाने के बाद मजदूरी कराते थे और समय से वेतन नहीं मिलता था। शिकायत के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं था। संस्था की मदद से 10 दिसंबर को घर वापसी हुई। नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के मिठहामाफी गांव निवासी अजहर ने बताया कि वेल्डर का काम बताकर 60 हजार रुपये में एजेंट विदेश भेजा था। वहां जाने के बाद पत्थर तोड़ने का काम कराया जाने लगा। विरोध करने पर दुर्व्यवहार किया जा रहा था। बाद में कुछ दिनों तक खजूर पैक कराने का काम कराया गया। प्रवासी मदद फाउंडेशन के सदस्यों की मदद से वतन वापसी हुई और खुद का काम घर पर कर कर रहा हूं।
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