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Kushinagar News: आठ घंटे में जलस्तर में 16 सेमी की बढ़त, गंडक नदी चेतावनी बिंदु से 12 सेमी नीचे
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खड्डा/तमकुहीरोड। वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में पानी के डिस्चार्ज में सोमवार को लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। सोमवार सुबह आठ बजे से शाम चार बजे के बीच यानी आठ घंटे में जलस्तर में 16 सेमी की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, नदी अब भी चेतावनी बिंदु से 12 सेमी नीचे बह रही है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव से कटान का खतरा बरकरार है। तटवर्ती गांवों के लोग सहमे हुए हैं। धान और गन्ने की फसल नदी में समाने का खतरा है।
रविवार 13 सितंबर की भोर चार बजे जहां डिस्चार्ज 63,200 क्यूसेक था, वहीं सोमवार 14 सितंबर को इसी समय बढ़कर 86,000 क्यूसेक हो गया। इसके बाद सुबह 10 बजे 90,600, दोपहर 12 बजे 92,500, दोपहर दो बजे 99,800 और शाम चार बजे डिस्चार्ज बढ़कर 1.09 लाख क्यूसेक पहुंच गया।
बाढ़ खंड के एसडीओ संजय कुमार गौंड़ ने बताया कि डिस्चार्ज बढ़ने के साथ भैंसहा गेज स्थल पर नदी के जलस्तर में भी वृद्धि हुई। सोमवार सुबह आठ बजे जलस्तर 94.72 मीटर था, जो चेतावनी बिंदु 95 मीटर से 28 सेंटीमीटर नीचे था। शाम चार बजे जलस्तर बढ़कर 94.88 मीटर पहुंच गया, जो चेतावनी बिंदु से 12 सेंटीमीटर नीचे रहा। फिलहाल स्थिति सामान्य है और तटबंध पर नदी का कोई दबाव नहीं है। बाढ़ प्रभावित गांव भी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। प्रशासन और बाढ़ खंड की टीमें नदी के डिस्चार्ज व जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।
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गंडक नदी के जलस्तर में जारी उतार-चढ़ाव के कारण तटबंधों पर खतरा टला नहीं है। एपी बांध पर जवही दयाल गांव के सामने किमी 3.500 से किमी 4.000 के बीच नदी लगातार कटान कर रही है। ठोकरों को नुकसान पहुंचाने के बाद अब कटाव की जद में फसल और पेड़ आ रहे हैं। इससे तटवर्ती इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। गंडक नदी की तेज धारा के कारण कई हेक्टेयर में बोई गई धान व गन्ने की फसल कटकर नदी में समा चुकी है। इसके अलावा खेतों के किनारे लगे हुए 100 से अधिक पेड़ तेज प्रवाह के साथ बह गए हैं। नदी में बढ़े जलस्तर के चलते नदी बांध के किनारे 9.72 करोड़ रुपये की लागत से बने नवनिर्मित एप्रन के पास तक पहुंच गई है।
तटवर्ती गांवों के दिनेश जायसवाल, रमेश यादव, सीताराम निषाद, शैलेंद्र चौहान ने बताया कि बाढ़ खंड सेवरही ने बोल्डर से 500 मीटर लंबा एप्रन बना दिया था। इससे बांध सुरक्षित है। नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते बाढ़ खंड के अधिकारी मुस्तैद हैं। जेई रमेश धर दूबे, जेई सुनील यादव व जेई रामचंद्र प्रसाद सहित अन्य तकनीकी कर्मी लगातार संवेदनशील स्थलों की निगरानी कर रहे हैं।
कोट:-
गंडक नदी के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए सभी तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। वर्तमान में एपी बांध पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी तरह के खतरे से निपटने के लिए टीम अलर्ट है। दीपरतन सिंह, एसडीओ बाढ़ खंड, सेवरही
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रविवार 13 सितंबर की भोर चार बजे जहां डिस्चार्ज 63,200 क्यूसेक था, वहीं सोमवार 14 सितंबर को इसी समय बढ़कर 86,000 क्यूसेक हो गया। इसके बाद सुबह 10 बजे 90,600, दोपहर 12 बजे 92,500, दोपहर दो बजे 99,800 और शाम चार बजे डिस्चार्ज बढ़कर 1.09 लाख क्यूसेक पहुंच गया।
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बाढ़ खंड के एसडीओ संजय कुमार गौंड़ ने बताया कि डिस्चार्ज बढ़ने के साथ भैंसहा गेज स्थल पर नदी के जलस्तर में भी वृद्धि हुई। सोमवार सुबह आठ बजे जलस्तर 94.72 मीटर था, जो चेतावनी बिंदु 95 मीटर से 28 सेंटीमीटर नीचे था। शाम चार बजे जलस्तर बढ़कर 94.88 मीटर पहुंच गया, जो चेतावनी बिंदु से 12 सेंटीमीटर नीचे रहा। फिलहाल स्थिति सामान्य है और तटबंध पर नदी का कोई दबाव नहीं है। बाढ़ प्रभावित गांव भी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। प्रशासन और बाढ़ खंड की टीमें नदी के डिस्चार्ज व जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।
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गंडक नदी के जलस्तर में जारी उतार-चढ़ाव के कारण तटबंधों पर खतरा टला नहीं है। एपी बांध पर जवही दयाल गांव के सामने किमी 3.500 से किमी 4.000 के बीच नदी लगातार कटान कर रही है। ठोकरों को नुकसान पहुंचाने के बाद अब कटाव की जद में फसल और पेड़ आ रहे हैं। इससे तटवर्ती इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। गंडक नदी की तेज धारा के कारण कई हेक्टेयर में बोई गई धान व गन्ने की फसल कटकर नदी में समा चुकी है। इसके अलावा खेतों के किनारे लगे हुए 100 से अधिक पेड़ तेज प्रवाह के साथ बह गए हैं। नदी में बढ़े जलस्तर के चलते नदी बांध के किनारे 9.72 करोड़ रुपये की लागत से बने नवनिर्मित एप्रन के पास तक पहुंच गई है।
तटवर्ती गांवों के दिनेश जायसवाल, रमेश यादव, सीताराम निषाद, शैलेंद्र चौहान ने बताया कि बाढ़ खंड सेवरही ने बोल्डर से 500 मीटर लंबा एप्रन बना दिया था। इससे बांध सुरक्षित है। नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते बाढ़ खंड के अधिकारी मुस्तैद हैं। जेई रमेश धर दूबे, जेई सुनील यादव व जेई रामचंद्र प्रसाद सहित अन्य तकनीकी कर्मी लगातार संवेदनशील स्थलों की निगरानी कर रहे हैं।
कोट:-
गंडक नदी के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए सभी तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। वर्तमान में एपी बांध पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी तरह के खतरे से निपटने के लिए टीम अलर्ट है। दीपरतन सिंह, एसडीओ बाढ़ खंड, सेवरही