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जलस्तर घटने से बढ़ा कटान का बढ़ा खतरा, सहमे लोग
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जलस्तर घटने से बढ़ा कटान का बढ़ा खतरा, सहमे लोग
खतरे के निशान से 29 सेमी नीचे बह रही गंडक नदी,
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले में शुक्रवार रात जलस्तर बढ़ने के बाद शनिवार को फिर गंडक घटने लगी। इससे कई स्थानों पर कटान शुरू हो गया। जगह-जगह कटान शुरू होने से लोग सहमे हुए हैं।
शुक्रवार रात जलस्तर बढ़ने से खड्डा क्षेत्र के बसंतपुर और मरचहवा गांव में फिर पानी घुस गया। अभी दिन में ही पानी कम होने पर इन गांवों के लोग अपने घरों और सामान को सहेजने के लिए पहुंचे थे। वहीं बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने के लिए शनिवार को नोडल अधिकारी पी. गुरु प्रसाद, स्थानीय विधायक व अफसरों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और बाढ़पीड़ितों से मिलकर उनका हाल जाना।
रात में डिस्चार्ज बढ़ते ही उम्मीदों पर फिर पानी
खड्डा। गंडक नदी में शुक्रवार की रात आठ बजे वाल्मीकि बैराज से 23 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे खड्डा क्षेत्र के बसंतपुर और मरचहवा गांव के दक्षिण टोला व पूरब टोले में फिर पानी आ गया। शुक्रवार को जैसे-तैसे घरों से कीचड़ साफ कर लोग राहत की उम्मीद कर रहे कि अरमान फिर से पानी में धुल गए है।
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गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते शनिवार को बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग काफी परेशान रहे। दस घंटे में गंडक नदी के डिस्चार्ज में 19,800 क्यूसेक की कमी आई। शनिवार को सुबह आठ बजे 194800 क्यूसेक के सापेक्ष शाम छह बजे 175000 क्यूसेक था। सुबह आठ बजे भैसहां गेजस्थल पर जलस्तर चेतावनी बिंदु 95 मीटर से 80 सेंटीमीटर ऊपर 95.80 मीटर पर था। वहीं शाम चार बजे के बीच 6 बजे तक 95.71 पर स्थिर बना रहा। गंडक नदी खतरे के निशान 96.00 से 29 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
बसंतपुर गांव निवासी कन्हैया, कंता, जवाहिर, कमलावती, कुसुमकली एवं मरचहवा के ओमप्रकाश, बदरी, शिवकुमारी आदि अपनी पीड़ा बताते हुए रूआंसे हो गए। इन लोगों ने बताया कि एक दिन पहले पानी निकल गया था। कीचड़ आदि साफ कर तख्ता व बांस चारपाई को ऊंचा कर मचान की तरह बनाकर सो रहे थे कि अचानक आंख खुली तो घरों में पानी ही पानी था। अब समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें, क्या न करें।
बसंतपुर गांव के सड़कों पर पानी भर गया है। बसंतपुर से मरचहवा दक्षिण टोला जाने वाली सड़क पानी से डूब गई है। उत्तर टोला जाने वाली सड़क पर पानी है। इन गांवों तक पहुंचने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा है। एक सप्ताह बाद सुरक्षित स्थानों से घर लौटे लोग अब अपने परिजनों व बच्चों को लेकर फिक्रमंद हैं।
खेत बचे न फसल, सता रही गुजारे की चिंता
महदेवा व सलिकपुर के लोगाें का दर्द, किसान और खेतिहर मजदूर हैं इन गांवों में
संवाद न्यूज एजेंसी
छितौनी। खड्डा ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित गांव महदेवा व सलिकपुर के ग्रामीणों की परेशानी बाढ़ के साथ ही बढ़ गई है। दोनों गांवों के लोगों के जीविकोपार्जन के लिए खेती ही एक मात्र साधन है। गंडक नदी की कटान में सैकड़ों एकड़ जमीन नदी में विलीन हो गई। बची भूमि की फसल भी जलमग्न होकर नष्ट हो गई। इससे किसान और मजदूर दोनों ही रोजी-रोटी को लेकर चिंतित हैं।
करीब पांच हजार की आबादी वाले महदेवा गांव में छह सौ परिवार रहते हैं। दो सौ परिवार छोटे किसानों और चार सौ परिवार खेतिहर मजदूरों के। करीब 15 दिनों से हो रही गंडक नदी की कटान से लगभग सभी परिवार भूमिहीन हो चुके हैं। खेती कटान की जद में आने से मजदूरों के जीवन यापन के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
महदेवा निवासी सुरेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि गांव के सरेह में 10 कट्ठा खेत था, जो बीते महीने गंडक नदी की कटान के जद में आ गया। अब वह भूमिहीन हो गए हैं। सुरेंद्र बताते हैं कि खेती बाड़ी के बाद बचे समय में दूसरे के खेतों में मजदूरी कर दो बच्चों को पढ़ाते-लिखाते व परिवार चलाते हैं। अब तो न अपना खेत है न दूसरों के खेतों में भी मजदूरी की उम्मीद दिख रही है।
भिखारी बीन बोले, गांव के खेतों में मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं, लेकिन बाढ़ आने के बाद खेतों में काम भी नहीं मिल पा रहा है। अब रोजगार के लिए दूसरे प्रदेश जाने की सोच रहे हैं, लेकिन घर भी बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हो गया है। रोजगार न मिलने के कारण परिवार भुखमरी के कगार पर है।
महदेवा निवासी मुन्नी देवी का कहना है कि गांव से बाढ़ का पानी तो हट गया है, लेकिन सरेह जलमग्न है। लोगों के खेतों में काम मिलता था, जलभराव के कारण काम नहीं मिल पा रहा है। घर में जो अनाज था, वह बाढ़ के पानी में बह गया। सरकार की ओर से मिले राशन से गुजर बसर हो रहा है।
सालिकपुर निवासी बालेश्वर चौहान का कहना है कि एक एकड़ खेत में गन्ना व धान की फसल लहलहा रही थी। गन्ना तो नदी के कटान में विलीन हो गया, लेकिन धान के खेत में बाढ़ आने के बाद से ही जलभराव है। घर में अनाज नहीं है। चारो तरफ पानी होने के कारण रोजगार नहीं मिल रहा है। किराए की व्यवस्था हो जाए तो रोजगार के लिए परदेश जाएंगे।
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खतरे के निशान से 29 सेमी नीचे बह रही गंडक नदी,
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले में शुक्रवार रात जलस्तर बढ़ने के बाद शनिवार को फिर गंडक घटने लगी। इससे कई स्थानों पर कटान शुरू हो गया। जगह-जगह कटान शुरू होने से लोग सहमे हुए हैं।
शुक्रवार रात जलस्तर बढ़ने से खड्डा क्षेत्र के बसंतपुर और मरचहवा गांव में फिर पानी घुस गया। अभी दिन में ही पानी कम होने पर इन गांवों के लोग अपने घरों और सामान को सहेजने के लिए पहुंचे थे। वहीं बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने के लिए शनिवार को नोडल अधिकारी पी. गुरु प्रसाद, स्थानीय विधायक व अफसरों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और बाढ़पीड़ितों से मिलकर उनका हाल जाना।
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रात में डिस्चार्ज बढ़ते ही उम्मीदों पर फिर पानी
खड्डा। गंडक नदी में शुक्रवार की रात आठ बजे वाल्मीकि बैराज से 23 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे खड्डा क्षेत्र के बसंतपुर और मरचहवा गांव के दक्षिण टोला व पूरब टोले में फिर पानी आ गया। शुक्रवार को जैसे-तैसे घरों से कीचड़ साफ कर लोग राहत की उम्मीद कर रहे कि अरमान फिर से पानी में धुल गए है।
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गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते शनिवार को बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग काफी परेशान रहे। दस घंटे में गंडक नदी के डिस्चार्ज में 19,800 क्यूसेक की कमी आई। शनिवार को सुबह आठ बजे 194800 क्यूसेक के सापेक्ष शाम छह बजे 175000 क्यूसेक था। सुबह आठ बजे भैसहां गेजस्थल पर जलस्तर चेतावनी बिंदु 95 मीटर से 80 सेंटीमीटर ऊपर 95.80 मीटर पर था। वहीं शाम चार बजे के बीच 6 बजे तक 95.71 पर स्थिर बना रहा। गंडक नदी खतरे के निशान 96.00 से 29 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
बसंतपुर गांव निवासी कन्हैया, कंता, जवाहिर, कमलावती, कुसुमकली एवं मरचहवा के ओमप्रकाश, बदरी, शिवकुमारी आदि अपनी पीड़ा बताते हुए रूआंसे हो गए। इन लोगों ने बताया कि एक दिन पहले पानी निकल गया था। कीचड़ आदि साफ कर तख्ता व बांस चारपाई को ऊंचा कर मचान की तरह बनाकर सो रहे थे कि अचानक आंख खुली तो घरों में पानी ही पानी था। अब समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें, क्या न करें।
बसंतपुर गांव के सड़कों पर पानी भर गया है। बसंतपुर से मरचहवा दक्षिण टोला जाने वाली सड़क पानी से डूब गई है। उत्तर टोला जाने वाली सड़क पर पानी है। इन गांवों तक पहुंचने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा है। एक सप्ताह बाद सुरक्षित स्थानों से घर लौटे लोग अब अपने परिजनों व बच्चों को लेकर फिक्रमंद हैं।
खेत बचे न फसल, सता रही गुजारे की चिंता
महदेवा व सलिकपुर के लोगाें का दर्द, किसान और खेतिहर मजदूर हैं इन गांवों में
संवाद न्यूज एजेंसी
छितौनी। खड्डा ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित गांव महदेवा व सलिकपुर के ग्रामीणों की परेशानी बाढ़ के साथ ही बढ़ गई है। दोनों गांवों के लोगों के जीविकोपार्जन के लिए खेती ही एक मात्र साधन है। गंडक नदी की कटान में सैकड़ों एकड़ जमीन नदी में विलीन हो गई। बची भूमि की फसल भी जलमग्न होकर नष्ट हो गई। इससे किसान और मजदूर दोनों ही रोजी-रोटी को लेकर चिंतित हैं।
करीब पांच हजार की आबादी वाले महदेवा गांव में छह सौ परिवार रहते हैं। दो सौ परिवार छोटे किसानों और चार सौ परिवार खेतिहर मजदूरों के। करीब 15 दिनों से हो रही गंडक नदी की कटान से लगभग सभी परिवार भूमिहीन हो चुके हैं। खेती कटान की जद में आने से मजदूरों के जीवन यापन के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
महदेवा निवासी सुरेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि गांव के सरेह में 10 कट्ठा खेत था, जो बीते महीने गंडक नदी की कटान के जद में आ गया। अब वह भूमिहीन हो गए हैं। सुरेंद्र बताते हैं कि खेती बाड़ी के बाद बचे समय में दूसरे के खेतों में मजदूरी कर दो बच्चों को पढ़ाते-लिखाते व परिवार चलाते हैं। अब तो न अपना खेत है न दूसरों के खेतों में भी मजदूरी की उम्मीद दिख रही है।
भिखारी बीन बोले, गांव के खेतों में मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं, लेकिन बाढ़ आने के बाद खेतों में काम भी नहीं मिल पा रहा है। अब रोजगार के लिए दूसरे प्रदेश जाने की सोच रहे हैं, लेकिन घर भी बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हो गया है। रोजगार न मिलने के कारण परिवार भुखमरी के कगार पर है।
महदेवा निवासी मुन्नी देवी का कहना है कि गांव से बाढ़ का पानी तो हट गया है, लेकिन सरेह जलमग्न है। लोगों के खेतों में काम मिलता था, जलभराव के कारण काम नहीं मिल पा रहा है। घर में जो अनाज था, वह बाढ़ के पानी में बह गया। सरकार की ओर से मिले राशन से गुजर बसर हो रहा है।
सालिकपुर निवासी बालेश्वर चौहान का कहना है कि एक एकड़ खेत में गन्ना व धान की फसल लहलहा रही थी। गन्ना तो नदी के कटान में विलीन हो गया, लेकिन धान के खेत में बाढ़ आने के बाद से ही जलभराव है। घर में अनाज नहीं है। चारो तरफ पानी होने के कारण रोजगार नहीं मिल रहा है। किराए की व्यवस्था हो जाए तो रोजगार के लिए परदेश जाएंगे।