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Kushinagar News: कागज में मिल रहा पानी, सूखी हैं घरों में लगीं टोंटियां

Sun, 01 Feb 2026 01:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 01 Feb 2026 01:46 AM IST
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Water is available in paper, taps in homes are dry
अधूरी बना पानी की टंकी। संवाद   
पडरौना। जिले में जलजीवन मिशन (ग्रामीण) के तहत हर घर नल जल योजना से लोगों को शुद्ध पेयजल सिर्फ कागजों में मिल रहा है। अधूरी पड़ी पेयजल परियोजना को पूरा करने के लिए करीब एक साल से विभाग को बजट की दरकार है। हालत यह है कि जिले के 100 से अधिक गांवों में लोगों के घरों में विभाग ने टोंटियां लगा दीं, लेकिन पानी की आपूर्ति नहीं होने से सूखी पड़ी हैं।
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कागजों में इन गांवों को संतृप्त कर करीब आठ करोड़ से अधिक रुपये का भुगतान करा लिया गया है। कहीं पाइपलाइन बिछाकर तो कहीं बिना पानी की आपूर्ति के ओवरहेड टैंक बनकर व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। करोड़ों रुपये के बजट के बाद भी गांवों में पानी के लिए बिछाई गई पाइपलाइन अव्यवस्था की नजीर बनी हुई है।
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जल निगम (ग्रामीण) के मुताबिक, वर्तमान में 904 गांवों के हर घर को नल जल से जोड़कर पानी आपूर्ति के लिए 453 ओवरहेड टैंक बनाए जाने हैं, लेकिन इनमें से 53 अब भी निर्माणाधीन हालत में हैं। विभाग ने अब तक 1,723 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद 6,441 किमी पाइपलाइन बिछाने के सापेक्ष 1,550 किमी पाइपलाइन बिछाकर एक लाख से अधिक घरों को पेयजल के लिए कनेक्शन दे दिया है।
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इसके लिए 453 बोरिंग कराई जा चुकी है। हर घर नल जल योजना भारत सरकार ने वर्ष 2019 में शुरू कराई थी, जिसका लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण घर में नियमित रूप से नल से पीने योग्य पानी उपलब्ध कराना था। इसको लेकर कुशीनगर में वर्ष 2021 में काम आरंभ हुआ था। पेयजल आपूर्ति के लिए एनसीसी कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को कार्यदायी संस्था को 903 गांवों में 453 ओवरहेड टैंक बनवाने के लिए जिम्मेदारी दी गई थी।
इन्हें पूरा करने के लिए सरकार ने 1,723 करोड़ रुपये अवमुक्त किए थे, लेकिन निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक इस योजना से लोगों के घरों तक नल से पानी नहीं पहुंच पाया है। घरों में टोंटी लगाकर कागजों में जिम्मेदार पानी की आपूर्ति चालू करा दिए हैं, इसमें करीब आठ करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भी कर दिया गया है। अब अफसर योजना ठप होने की वजह बजट की कमी बता रहे हैं, लेकिन जो बजट अब तक मिला है, वह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। आईजीआरएस और समाधान दिवस में अधिकतर शिकायतें पानी की टंकी बंद होने की पहुंच रही हैं, बावजूद अफसर कागजों में पानी की सप्लाई होने वाले गांवों की जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई के बजाए चुप्पी साधे हुए हैं।
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इंसेफेलाइटिस से सर्वाधिक मौतें कुशीनगर में हुईं
कुशीनगर बीते दशक में जापानी इंसेफेलाइटिस से प्रभावित रहा है। यहां जल जनित इंसेफेलाइटिस के प्रकोप से बच्चों की मौते होती थीं। इसको लेकर विशेषज्ञों की शोध में सामान्य हैंडपंप के पानी पीने योग्य नहीं होने की पुष्टि किए जाने के बाद रोकने के लिए सरकार ने गंभीरता से लेते हुए कदम उठाया था। मौजूदा समय में 15-20 वर्ष पहले बनाए गए ओवरहेड टैंकों से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। थककर अब ग्रामीण शुद्ध पेयजल खरीदकर ही पी रहे हैं। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर है। तकनीकी खामियों, ठेकेदारों की लापरवाही व भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती यह योजना अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गई है। वहीं, सरकारी फाइलों में हर घर तक पीने का शुद्ध पानी पहुंच चुका है। सिस्टम की सुस्ती ने एक बेहतरीन योजना को बीच मझधार में लाकर रख दिया है। इसमें ज्यादा प्रभावित रामकोला, खड्डा, तमकुहीराज और दुदही ब्लॉक से जुड़ें गांव शामिल हैं। इन ब्लॉक के गांवों में पूर्व में जल जनित बीमारियों का प्रकोप भी रहा है।

एक्सईएन जल निगम (ग्रामीण), कुशीनगर आतिफ हुसैन ने कहा कि जिले में 453 की जगह 400 नए ओवरहेड टैंक बनाए जा चुके हैं। इनसे पाइपलाइन बिछाकर एक लाख घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है। एनएचएआई से अनापत्ति प्रमाण नहीं मिलने के चलते करीब 100 किमी पाइपलाइन बिछाने का काम ठप है। इसके अलावा जो भी अधूरा निर्माण कार्य है, उसे पूरा कराया जा रहा है। 325 स्थानों पर बोरिंग से सीधे पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
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मार्च तक काम पूरा करने की अवधि
जल निगम के जिम्मेदारों के अनुसार केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए लक्ष्य को दिसंबर 2025 से बढ़ाकर मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा है। प्रशासन का दावा है कि मार्च तक सभी लंबित योजनाओं को पूरा कर लिया जाएगा।

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टाेंटी नहीं लगी तो कहीं पाइप सड़क पर छोड़ा
सुकरौली। ब्लाक क्षेत्र में अवरवां, पैकौली, बरवां, बेलही, अवरवां, जगदीशपुर समेत अन्य गांवों के गली-मोहल्ले में जल जीवन मिशन योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है। कई गांवों में गड्ढे खोदकर सड़कों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। बेलही गांव में टोंटी बगैर लगाए ही जिम्मेदारों ने कागजों में कार्य पूरा कर दिया है। पाइप बिछाने के लिए सड़कों को क्षतिग्रस्त करने के बाद ठेकेदार ने गड्ढों को वैसे ही छोड़ दिया है। इससे दो पहिया और चार पहिया की बात छोड़िए, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। क्षेत्र के राधेश्याम, विनोद, हरिकेश, मनोहर, धर्मेंद्र, अजय,राकेश, सीपी चंद आदि का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी खड़ंजा और इंटरलाकिंग सड़कों की है। ईंट उखाड़ने के बाद गड्ढों की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। सुकरौली से बंचरा रोड पर बेलही गांव के समीप कई जगहों पर पिच सड़क तोड़ कर पाइप बिछाई गई है और सड़क तोड़कर छोड़ दी गई है। अंधेरे में गिरकर साइकिल व बाइक सवार घायल हो जाते हैं। चार पहिया वाहनों के पलटने का भी डर बना रहता है।

दिशा की बैठक में गरमाया था मुद्दा
अक्तूबर 2024 और उसके बाद दिशा की बैठक में सांसद विजय कुमार दूबे ने पेयजल योजना को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच करवाए जाने का निर्देश दिया था। इस मामले को लेकर बैठक में मौजूद विधायक व जनप्रतिनिधियों ने भी हामी भरी थी। पेयजल परियोजनाओं को लेकर हर तरफ लोगों में नाराजगी है।
सांसद विजय कुमार दूबे ने कहा कि जलजीवन मिशन परियोजना ठप होने की वजह अधिकारी बजट की कमी बता रहे हैं, लेकिन अब तक जो बजट आया है और जिन गांवों को संतृप्त किया गया है, उसमें से अधिकतर गांवों में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। आखिर करोड़ों रुपये खर्च हुए और पानी की आपूर्ति भी नहीं हुई, इसकी भी जांच होनी चाहिए। इसमें जो भी लापरवाह मिले उसके खिलाफ कार्रवाई हो। सरकारी धन का बंदरबांट जल निगम के जिम्मेदारों ने किया है। दिशा की बैठक में भी यह मुद्दा उठा चुका हूं। इसके लिए लगातार जल शक्ति मंत्री के अलावा शासन में पत्राचार भी किया जा रहा है।
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