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डीएम की चेतावनी का नहीं दिख रहा असर
कुशीनगर
Updated Wed, 08 Jun 2016 11:56 PM IST
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मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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हाटा। डीएम की चेतावनी का हाटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों पर बुधवार को कोई असर नहीं दिखा। सुबह साढ़े नौ बजे तक ओपीडी में कोई भी डॉक्टर नहीं पहुंचा, जबकि मंगलवार को डीएम ने निरीक्षण कर डॉक्टरों को समय से ओपीडी में बैठने, बाहर की दवा और जांच नहीं लिखने की चेतावनी दी थी।
बुधवार को करीब साढ़े नौ बजे हाटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में कोई भी डॉक्टर नहीं था। मरीज और उनके तीमारदार ओपीडी की पर्ची लेकर इधर-उधर भटक रहे थे। बकराबाद गांव के रहने वाले राजकिशोर काफी समय से वहां मौजूद थे। उन्होंने बताया कि करीब आधे घंटो से ओपीडी की पर्ची लेकर डॉक्टर को ढूंढ रहा हूं, लेकिन किसी डॉक्टर का पता नहीं है।
अपने पड़ोसी का इलाज कराने के लिए आए शीतल ने बताया कि महिला मरीज को लेकर सुबह ही घर से आ गए थे। ताकि धूप तेज होने से पहले वापस गांव पहुंच जाएं, लेकिन आधे घंटे हो गए कोई डॉक्टर नहीं आया, जबकि डॉक्टरों के बैठने का समय सुबह आठ बजे से दो बजे तक बताया जा रहा है। हसीना खातून अपनी बेटी को लेकर इलाज के लिए आई थीं।
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काउंटर से पर्ची लेकर ओपीडी में पहुंचीं तो कोई डॉक्टर नहीं आया था। उनका कहना था कि डॉक्टर केवल मनमानी तरीके से ड्यूटी कर रहे हैं। अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे मोतीलाल काफी देर से परेशान थे।
उन्हें पत्नी का इलाज कराने के बाद कहीं और जाना था। उन्होंने बताया कि समय से डॉक्टर बैठ जाते तो लोगों का समय बर्बाद नहीं होता। इस संबंध में सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार का कहना था कि बार-बार कहने के बाद भी अगर सुधार नहीं हो रहा है तो कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी। निर्देश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ निर्णय लिया जाएगा।
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बुधवार को करीब साढ़े नौ बजे हाटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में कोई भी डॉक्टर नहीं था। मरीज और उनके तीमारदार ओपीडी की पर्ची लेकर इधर-उधर भटक रहे थे। बकराबाद गांव के रहने वाले राजकिशोर काफी समय से वहां मौजूद थे। उन्होंने बताया कि करीब आधे घंटो से ओपीडी की पर्ची लेकर डॉक्टर को ढूंढ रहा हूं, लेकिन किसी डॉक्टर का पता नहीं है।
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अपने पड़ोसी का इलाज कराने के लिए आए शीतल ने बताया कि महिला मरीज को लेकर सुबह ही घर से आ गए थे। ताकि धूप तेज होने से पहले वापस गांव पहुंच जाएं, लेकिन आधे घंटे हो गए कोई डॉक्टर नहीं आया, जबकि डॉक्टरों के बैठने का समय सुबह आठ बजे से दो बजे तक बताया जा रहा है। हसीना खातून अपनी बेटी को लेकर इलाज के लिए आई थीं।
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काउंटर से पर्ची लेकर ओपीडी में पहुंचीं तो कोई डॉक्टर नहीं आया था। उनका कहना था कि डॉक्टर केवल मनमानी तरीके से ड्यूटी कर रहे हैं। अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे मोतीलाल काफी देर से परेशान थे।
उन्हें पत्नी का इलाज कराने के बाद कहीं और जाना था। उन्होंने बताया कि समय से डॉक्टर बैठ जाते तो लोगों का समय बर्बाद नहीं होता। इस संबंध में सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार का कहना था कि बार-बार कहने के बाद भी अगर सुधार नहीं हो रहा है तो कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी। निर्देश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ निर्णय लिया जाएगा।