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मृत प्रत्याशी के गांव में वोट पड़ा, चुनाव चिह्न बदलने पर हुआ हंगामा
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मृत प्रत्याशी के गांव में वोट पड़ा, चुनाव चिह्न बदलने पर हुआ हंगामा
दुदही(कुशीनगर)। दुदही ब्लाक के जंगल घोरठ गांव में शनिवार को बीडीसी पद के लिए वोट डाला गया। यहां से एक बीडीसी उम्मीदवार की मौत के चलते बृहस्पतिवार को वोट नहीं पड़ा था लेकिन शुक्रवार की रात में फिर वोटिंग का आदेश हो गया था। शनिवार को एक उम्मीदवार का चुनाव चिह्न बदलवाकर मतदान शुरू कराने पर लोगों ने हंगामा किया। एक घंटे तक मतदान रुका रहा। इसके बाद फिर से पुराने मतपत्र के आधार पर वोट पड़ा।
इस बार के पंचायत चुनाव में अफसरों की मनमानी चरम पर है। खासकर बीडीसी उम्मीदवारों का चुनाव तो पूरी तरह से मनमानी का शिकार रहा है। दुदही ब्लाक के जंगल घोरठ से बीडीसी के लिए छह प्रत्याशी मैदान में थे। चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद बीते 23 अप्रैल को एक प्रत्याशी मैमूल नेशा उर्फ नैमुल नेशा की मृत्यु हो गई। जिसकी सूचना ब्लाक के निर्वाचन अधिकारी को दी गई। इसके बाद इस ग्राम पंचायत में बीडीसी पद के लिए मतदान नहीं हुआ। शेष पदों के लिए बृहस्पतिवार को वोट डाला गया। लेकिन शुक्रवार की रात में फिर इस गांव में बीडीसी पद के लिए शनिवार को मतदान की घोषणा कर दी गई। शनिवार को आनन फानन में मतदान भी शुरू करा दिया गया। परंतु इस बार मतपत्र पर आवंटित चुनाव चिह्न का क्रम बदल गया। इसका नतीजा यह रहा कि जिस उम्मीदवार को कड़ाही चुनाव चिह्न आवंटित थे उसके लिए ईंट चुनाव चिह्न पर वोट पड़ने लगा। करीब एक घंटे तक पीठासीन अधिकारी इसी क्रम में मतदान कराते रहे। इसके बाद जब उम्मीदवारों ने जमकर हंगामा किया, तब जाकर मतदान रोका गया। मामला शांत होने पर मतपत्र में मृत उम्मीदवार के चुनाव चिह्न को काटकर मतदान कराया गया। आरओ मानिकचंद सिंह का कहना था कि जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर मतदान कराया गया। यहां शाम तक 1148 में से 714 लोगों ने मतदान किया। सब कुछ नियमानुसार किया गया है।
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दुदही(कुशीनगर)। दुदही ब्लाक के जंगल घोरठ गांव में शनिवार को बीडीसी पद के लिए वोट डाला गया। यहां से एक बीडीसी उम्मीदवार की मौत के चलते बृहस्पतिवार को वोट नहीं पड़ा था लेकिन शुक्रवार की रात में फिर वोटिंग का आदेश हो गया था। शनिवार को एक उम्मीदवार का चुनाव चिह्न बदलवाकर मतदान शुरू कराने पर लोगों ने हंगामा किया। एक घंटे तक मतदान रुका रहा। इसके बाद फिर से पुराने मतपत्र के आधार पर वोट पड़ा।
इस बार के पंचायत चुनाव में अफसरों की मनमानी चरम पर है। खासकर बीडीसी उम्मीदवारों का चुनाव तो पूरी तरह से मनमानी का शिकार रहा है। दुदही ब्लाक के जंगल घोरठ से बीडीसी के लिए छह प्रत्याशी मैदान में थे। चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद बीते 23 अप्रैल को एक प्रत्याशी मैमूल नेशा उर्फ नैमुल नेशा की मृत्यु हो गई। जिसकी सूचना ब्लाक के निर्वाचन अधिकारी को दी गई। इसके बाद इस ग्राम पंचायत में बीडीसी पद के लिए मतदान नहीं हुआ। शेष पदों के लिए बृहस्पतिवार को वोट डाला गया। लेकिन शुक्रवार की रात में फिर इस गांव में बीडीसी पद के लिए शनिवार को मतदान की घोषणा कर दी गई। शनिवार को आनन फानन में मतदान भी शुरू करा दिया गया। परंतु इस बार मतपत्र पर आवंटित चुनाव चिह्न का क्रम बदल गया। इसका नतीजा यह रहा कि जिस उम्मीदवार को कड़ाही चुनाव चिह्न आवंटित थे उसके लिए ईंट चुनाव चिह्न पर वोट पड़ने लगा। करीब एक घंटे तक पीठासीन अधिकारी इसी क्रम में मतदान कराते रहे। इसके बाद जब उम्मीदवारों ने जमकर हंगामा किया, तब जाकर मतदान रोका गया। मामला शांत होने पर मतपत्र में मृत उम्मीदवार के चुनाव चिह्न को काटकर मतदान कराया गया। आरओ मानिकचंद सिंह का कहना था कि जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर मतदान कराया गया। यहां शाम तक 1148 में से 714 लोगों ने मतदान किया। सब कुछ नियमानुसार किया गया है।
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