नेपाल के पानी को रोकने वाला एपी तटबंध करीब 100 मीटर तक टूट गया है। इस कारण कुशीनगर जिले के 20 गांव बाढ़ की जद में आ गए हैं। पानी का प्रवाह जैसे-जैसे बढ़ता जा रहा है लोगों में भय भी वैसे ही नजर आ रहा है।
सोमवार की रात में बांध टूटने की खबर जैसे ही फैली किसी ने बच्चों को गोद में उठाया तो कोई बुजुर्गों का हाथ पकड़कर सुरक्षित स्थान की ओर निकल पड़ा। कुछ ही घंटों में खेत, सड़कें और घर पानी में डूब गए। बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला।
कुशीनगर में टूटा एपी बांध अब सिर्फ पानी के बहाव की कहानी नहीं है, बल्कि उन परिवारों की दास्तान बन गया है, जिनकी जिंदगी एक ही रात में बदल गई। बांध टूटा तो पानी गांवों में घुसा, लेकिन उसके साथ हजारों लोगों के सपने, मेहनत और वर्षों की जमा-पूंजी भी बह गई।
2 of 7
बाढ़ से ग्रसित लोग सामान लेकर बंधे पर बाहर आ गए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस बांध से बमुश्किल डेढ़ किमी दूरी पर स्थित है जवही एहतमाली (गौरहा) गांव। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर इसी गांव में है। करीब दो से तीन फीट तक पानी लोगों के घरों में पहुंच गया है और आवागमन बंद हो गया है। गांव के ही मजरे के पास छोटा सा बाजार है और जो पूरे दिन गुलजार रहता है। मंगलवार को हालात कुछ बदले से थे।
3 of 7
बाढ़ से पीड़ित लोग सामान लेकर बंधे पर बाहर आ गए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बांध टूटने से लोगों में डर और दहशत थी। ज्यादातर दुकानें बंद थीं और हर जगह गांव छोड़कर आए लोगों के चेहरे पर बेचैनी के भाव साफ नजर आ रहा था। इसी गांव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोपहर बाद पहुंचे और पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिया।
4 of 7
बाढ़ से पीड़ित लोग सामान लेकर बंधे पर बाहर आ गए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांव से बाहर आकर सड़क किनारे एक पेड़ की छांव के नीचे सौ से ज्यादा परिवार ठहरे हुए हैं। परिवार के साथ शरण लिए फूलदेव साहनी ने बताया कि रात करीब 10:30 बजे बंधा टूटने की खबर मिली। गांव में आबादी करीब 3500 की है। हर कोई पहले जान बचाने में जुट गया। मैं परिवार के पांच सदस्यों के साथ बाहर आ गया। दो लोग घर पर ही हैं, उन्हें अभी तक राहत सामग्री नहीं मिली है और आना भी संभव नहीं है। राहत एवं बचाव दल का कोई सदस्य गांव में नहीं पहुंचा है।
5 of 7
बाढ़ग्रस्त इलाके से बाहर निकलते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दो वक्त भोजन और सुरक्षित ठिकाने की चिंता
कई परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता अब दो वक्त के भोजन और सुरक्षित ठिकाने की है। रातभर ग्रामीण जागकर पानी के बढ़ते स्तर को देखते रहे। कई परिवारों ने छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण ली। आंखों के सामने डूब गई गृहस्थी जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक चूल्हा जल रहा था, वहां अब पानी लहरा रहा है। कच्चे मकानों के गिरने का खतरा बना हुआ है।