फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   under pass bridge was not uses of people

धन खर्च होने के बाद भी बेकार हैं ज्यादातर अंडरपास

Wed, 22 Dec 2021 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Dec 2021 11:27 PM IST
विज्ञापन
under pass bridge was not uses of people
धन खर्च होने के बाद भी बेकार हैं ज्यादातर अंडरपास
विज्ञापन

- कप्तानगंज-थावे रेल मार्ग पर कुल 13 अंडरपास है
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। कप्तानगंज-थावे रेल मार्ग पर पड़ने वाले प्रमुख क्रॉसिंग पर रेलवे की तरफ से कप्तानगंज से तरयासुजान रेलवे स्टेशन के बीच कुल 13 स्थानों पर अंडरपास बनाए गए हैं। यह ऐसी जगह बने हैं, जिनका उपयोग नहीं हो रहा है। सिर्फ एक अंडरपास दुदही रेलवे स्टेशन के आगे बहपुरवा रेलवे क्रॉसिंग पर ही उपयोग लायक है, अन्य में इस जाड़े के मौसम में भी पानी भरा हुआ है। जबकि दुदही रेलवे स्टेशन के निबिहवहा रेलवे ढाले के पास अंडरपास का निर्माण तीन वर्ष से अधूरा पड़ा है। ऐसे में लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। रेलवे कर्मचारियों के मुताबिक प्रत्येक क्रॉसिंग पर करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
वर्ष 2018 में दुदही रेलबे के पश्चिमी रेलवे ढाला बहपुरवा में ट्रेन और स्कूली बच्चों से भरी वैन में टक्कर हो गई थी। इसमें सवार 13 छात्र-छात्राओं की जान चली गई थी। इसके बाद इस रूट पर अधिकांश रेलवे फाटकों पर अंडरपास पुलिया का निर्माण कराया गया। पडरौना से कठकुइयां रेलवे स्टेशन के बीच सिधुआ रेलवे क्रॉसिंग के पास बने अंडरपास में बरसात समाप्त हुए करीब दो माह बाद भी तीन से चार फीट पानी भरा है। यही हाल कप्तानगंज से तरयासुजान रेलवे स्टेशन के बीच बने करीब-करीब सभी रेलवे अंडर पास का है। करीब तीन वर्ष पहले निबिहवा रेलवे फाटक बंदकर वहां अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन इसका निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ। यहां गड्ढा बनाकर छोड़ दिया गया। इस गड्ढे में करीब 15 फीट से अधिक पानी लग गया है।
विज्ञापन

बरियारपुर के निवासी पप्पू कुशवाहा ने कहा कि इस रास्ते पृथ्वीपुर, विशुनपुर बरियापट्टी, बहपुरवा, मठिया भोकरिया, सिरजम आदि गांव के लोग सीएचसी दुदही, ब्लॉक मुख्यालय आते जाते हैं। इन गांव के लोगों को करीब पांच किलोमीटर की अधिक दूरी तय कर आना जाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुभाष कुशवाहा ने बताया कि इस पुलिया का निर्माण नहीं होने से यहां कई बार घटनाएं भी हो चुकी हैं। कुछ दिन पहले प्रभु और भोला की पत्नी चारा लेकर जा रही थीं। अंडरपास के लिए खोदे गए गड्ढ़े में गिरकर गहरे पानी में डूबने लगीं। आसपास के लोगों ने इन दोनों महिलाओं को बचाया था। इसके अलावा एक ट्रैक्टर चालक रेलवे लाइन पार करते समय फिसलकर गड्ढ़े में गिर गया था। उसे दूसरे दिन निकाला गया था।
दशहवा के निवासी मनोज पटेल ने बताया कि जब रेलवे लाइन के नीचे अंडरपास का निर्माण होने की जानकारी मिली तो क्षेत्र के लोगों में प्रसन्नता थी। उन्हें उम्मीद थी कि दुर्घटनाएं रुकेंगी। लेकिन अंडरपास निर्माण होने के बाद गांव के लोगों की दुर्दशा और बढ़ गई है।
निबिहवा टोला निवासी हरेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अंडरपास में बरसात शुरू होते ही पानी एकत्र हो जाता है। यह पानी सात से आठ माह तक रहता है। इस दौरान लोगों को रेल लाइन के दूसरी तरफ जाने में या तो खतरा उठाना पड़ता है या पांच से छह किलोमीटर दूरी तय करन जाना पड़ता है।

रेलवे लाइन के नीचे बने अंडरपास में जहां पानी लगा है, उसमें से पानी निकालने की व्यवस्था कराने के लिए संबंधित को निर्देश दिया गया है। इसके अलावा जहां हमेशा पानी लगे रहने की आशंका है, उस स्थान पर स्थायी रूप से पंप लगाने के लिए भी निर्देश दिया गया है, जो अंडरपास निर्माणाधीन हैं, उनका लेवल ऊंचा किया जाना है। इसलिए निर्माण पूरा होने में थोड़ा विलंब है। शीघ्र ही निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।
अशोक कुमार, पीआरओ, एनईआर, वाराणसी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed