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धर्म परिवर्तन का मामला
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दो लोगों पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप
हियुवा कार्यकर्ताओं ने तहरीर देकर की कार्रवाई की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। हनुमानगंज थानाक्षेत्र के माघी भगवानपुर गांव में मुसहर और दलित समुदाय के करीब 15 परिवारों के ईसाई धर्म स्वीकार करने का मामला प्रकाश में आया है। इन लोगों ने एक गिलास पानी और प्रार्थना करने से बीमारी ठीक होने की बात कही है। इसकी जानकारी होने पर हियुवा कार्यकर्ता पुलिस को बुलाया और दो लोगों पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। हियुवा नेता गंगासागर सिंह, जितेंद्र सिंह आदि ने बताया की माघी भगवानपुर गांव में करीब 15 मुसहर और दलितों को लालच, छलकपट और बीमारी ठीक करने का झांसा देकर ईसाई धर्म स्वीकार कराया जा रहा है। इन परिवारों ने बाइबिल, लॉकेट, ईशु की तस्वीर सजा रखी है। इनके घर से हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर हटा दी गई है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने भी छानबीन की। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही बोधीछपरा गांव में धर्म में परिवर्तन करा रहे दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
एक से दस साल की हो सकती है सजा
गैरकानूनी धर्मांतरण विधेयक 2020 में प्रावधान किया है। इसके मुताबिक लालच या दबाव, प्रलोभन, छलकपट, बहकावे आदि की वजह से धर्म परिवर्तन किया या कराया तो अलग-अलग प्रावधानों के तहत एक साल से दस साल तक सजा और जुर्माना भरना पड़ सकता है। नियम के मुताबिक स्वेच्छा से धर्म बदलने व बदलवाने वाला दो माह पूर्व डीएम को सूचना देंगे। इसके बाद पुलिस जांच करेगी। तमाम कानूनी प्रक्रिया के बाद ही यह संभव हो सकता है। इस कानून के तहत दो से अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन कराने पर तीन से दस वर्ष तक की जेल और 50 हजार जुर्माना लगाया जा सकता है। अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, नाबालिग के धर्म परिवर्तन कराने के मामले में भी दो से दस वर्ष तक सजा और 25 हजार जुर्माना आदि का प्रावधान है। इसके बावजूद बोधीछपरा, मिश्रौली और अब माघी भगवानपुर, महदेवा, गैनही जंगल, मदनपुर आदि गांव में एक गिलास पानी से गंभीर बीमारी या वित्तीय संकट दूर करने का झांसा देकर मुसहर, दलित, गरीब अशिक्षित लोगों को ईसाई धर्म में शामिल करने की बातें सामने आ रही हैं।
क्या कहते हैं एसडीएम
खड्डा एसडीएम अरविंद कुमार का कहना है कि कानून के अनुसार ऐेसे लोगों को प्रलोभन व बहलाकर धर्म बदलने के लिए प्रेरित करना या स्वयं प्रेरित होना अपराध है। इस तरह के कृत्य से समाज में आक्रोश व कानून व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं। शांतिभंग में दो लोगों को जेल भेजा गया है। बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए ऐसे कार्यों में संलिप्त लोगों पर विधिसम्मत कार्रवाई के लिए पुलिस को निर्देश दिया गया है।
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हियुवा कार्यकर्ताओं ने तहरीर देकर की कार्रवाई की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। हनुमानगंज थानाक्षेत्र के माघी भगवानपुर गांव में मुसहर और दलित समुदाय के करीब 15 परिवारों के ईसाई धर्म स्वीकार करने का मामला प्रकाश में आया है। इन लोगों ने एक गिलास पानी और प्रार्थना करने से बीमारी ठीक होने की बात कही है। इसकी जानकारी होने पर हियुवा कार्यकर्ता पुलिस को बुलाया और दो लोगों पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। हियुवा नेता गंगासागर सिंह, जितेंद्र सिंह आदि ने बताया की माघी भगवानपुर गांव में करीब 15 मुसहर और दलितों को लालच, छलकपट और बीमारी ठीक करने का झांसा देकर ईसाई धर्म स्वीकार कराया जा रहा है। इन परिवारों ने बाइबिल, लॉकेट, ईशु की तस्वीर सजा रखी है। इनके घर से हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर हटा दी गई है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने भी छानबीन की। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही बोधीछपरा गांव में धर्म में परिवर्तन करा रहे दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
एक से दस साल की हो सकती है सजा
गैरकानूनी धर्मांतरण विधेयक 2020 में प्रावधान किया है। इसके मुताबिक लालच या दबाव, प्रलोभन, छलकपट, बहकावे आदि की वजह से धर्म परिवर्तन किया या कराया तो अलग-अलग प्रावधानों के तहत एक साल से दस साल तक सजा और जुर्माना भरना पड़ सकता है। नियम के मुताबिक स्वेच्छा से धर्म बदलने व बदलवाने वाला दो माह पूर्व डीएम को सूचना देंगे। इसके बाद पुलिस जांच करेगी। तमाम कानूनी प्रक्रिया के बाद ही यह संभव हो सकता है। इस कानून के तहत दो से अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन कराने पर तीन से दस वर्ष तक की जेल और 50 हजार जुर्माना लगाया जा सकता है। अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, नाबालिग के धर्म परिवर्तन कराने के मामले में भी दो से दस वर्ष तक सजा और 25 हजार जुर्माना आदि का प्रावधान है। इसके बावजूद बोधीछपरा, मिश्रौली और अब माघी भगवानपुर, महदेवा, गैनही जंगल, मदनपुर आदि गांव में एक गिलास पानी से गंभीर बीमारी या वित्तीय संकट दूर करने का झांसा देकर मुसहर, दलित, गरीब अशिक्षित लोगों को ईसाई धर्म में शामिल करने की बातें सामने आ रही हैं।
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क्या कहते हैं एसडीएम
खड्डा एसडीएम अरविंद कुमार का कहना है कि कानून के अनुसार ऐेसे लोगों को प्रलोभन व बहलाकर धर्म बदलने के लिए प्रेरित करना या स्वयं प्रेरित होना अपराध है। इस तरह के कृत्य से समाज में आक्रोश व कानून व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं। शांतिभंग में दो लोगों को जेल भेजा गया है। बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए ऐसे कार्यों में संलिप्त लोगों पर विधिसम्मत कार्रवाई के लिए पुलिस को निर्देश दिया गया है।
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