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अब कैशलेस सिस्टम की ओर बढ़ रहा लोगों का रुझान
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Wed, 08 Nov 2017 12:54 AM IST
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एटीएम पर लगी उपभोक्ताओं की भीड़।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
पडरौना। बुधवार आठ नवंबर को नोटबंदी का एक वर्ष पूरा हो जाएगा, जब भारत सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर कर दिया था। तब से अब तक बैंकों में रुपये के लेन-देन में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। नोटों की कमी दूर करने के लिए बैैंकों की तरफ से दिए गए सिक्के भी अब व्यापारियों की मुसीबत बन गए हैं। अलबत्ता, नोटबंदी के बाद से ऐप, आरटीजीएस, एटीएम, क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के यूजर्स जकी संख्या में 30 फीसदी तक का इजाफा हुुआ है। ग्राहक लेन-देन के लिए बैंकों का चक्कर लगाने की बजाय ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को सुविधाजनक मान रहे हैं।
पिछले साल नोटबंदी के अचानक फैसले ने हर तबके की मुसीबत बढ़ा दी थी। यहां तक कि इलाज के लिए रुपये न मिल पाने की वजह से जिले में कई लोगों की जान पर बन आई थी। 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करते समय भारत सरकार ने 50 दिनों में रुपये की किल्लत दूर करने का भरोसा दिलाया था, साथ ही कैशलेस व्यवस्था लागू किए जाने की बात कही गई थी। एटीएम में रुपये न पड़ने की वजह से वह महीनों तक ड्राई पड़े रहे, तब बैंकों ने विकल्प के रूप में ग्राहकों को सिक्के दिए थे। बैंकों की तरफ से सिक्के लेने में आना कानी करने से वह व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। बीते दिनों दशहरा और दीपावली में बैंक लगातार बंद हो जाने के कारण नोटबंदी जैसी समस्या फिर से उत्पन्न हो गई थी। यानी नोटबंदी के बाद शुरू हुई रुपये की किल्लत अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हो पाई है।
हालांकि अग्रणी बैंक ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का जो स्वरूप पेश किया है, यदि इसमें और भी तेजी आ जाए तो ग्राहकों को बैंकों तथा एटीएम का कई दिन चक्कर काटने से निजात मिल जाएगी। जिले में एसबीआई की 20, पीएनबी की 25, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की 27, पूर्वांचल बैंक की 70, इलाहाबाद बैंक की सात, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक की पांच-पांच शाखाओं समेत विभिन्न बैंकों की कुल 181 शाखाएं हैं, जिनके 20 लाख से अधिक ग्राहक हैं।
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कैशलेस पेमेंट के लिए बैंकों ने 3000 यूपीआई और 40000 एटीएम जारी किया है। 7500 यूजर्स भीम ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं। 350 बैंकों ने यूएस मशीन जारी किया है। आरटीजीएस के माध्यम से खाते से खाते में रुपये भेजने में दोगुने की वृद्घि हुई है। वहीं जनपद के बैंकों में नकद लेन-देन में 30 प्रतिशत की कमी आई है। उनका कहना था कि अस्पताल, मेडिकल स्टोर्स, कपड़े, किराना, विद्यालय सहित अन्य प्रमुख स्थलों पर भी कैशलेस सिस्टम शुरू हो जाए तो बैंकों पर निर्भरता कम हो जाएगी।
लीड बैंक के जिला प्रबंध्ाक हीरा लाल कुश्ावाहा ने बताया कि बैंकों में रुपये की किल्लत पहले से कम हुई है। नकद लेन-देन में भी तीस प्रतिशत की कमी आई है। क्योंकि बैंकों ने काफी संख्या में यूपीआई ऐप, यूएस मशीनें और एटीएम जारी कर लोगों को सहूलियत प्रदान की है। इसके अलावा बैंकों की तरफ से आरटीजीएस, इंटरनेट बैंकिंग सहित कई प्रकार की फैसिलिटी अपने ग्राहकों को दी जा रही है। इससे कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा मिल रहा है। धीरे-धीरे कैश की समस्या दूर हो जाएगी।
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पिछले साल नोटबंदी के अचानक फैसले ने हर तबके की मुसीबत बढ़ा दी थी। यहां तक कि इलाज के लिए रुपये न मिल पाने की वजह से जिले में कई लोगों की जान पर बन आई थी। 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करते समय भारत सरकार ने 50 दिनों में रुपये की किल्लत दूर करने का भरोसा दिलाया था, साथ ही कैशलेस व्यवस्था लागू किए जाने की बात कही गई थी। एटीएम में रुपये न पड़ने की वजह से वह महीनों तक ड्राई पड़े रहे, तब बैंकों ने विकल्प के रूप में ग्राहकों को सिक्के दिए थे। बैंकों की तरफ से सिक्के लेने में आना कानी करने से वह व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। बीते दिनों दशहरा और दीपावली में बैंक लगातार बंद हो जाने के कारण नोटबंदी जैसी समस्या फिर से उत्पन्न हो गई थी। यानी नोटबंदी के बाद शुरू हुई रुपये की किल्लत अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हो पाई है।
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हालांकि अग्रणी बैंक ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का जो स्वरूप पेश किया है, यदि इसमें और भी तेजी आ जाए तो ग्राहकों को बैंकों तथा एटीएम का कई दिन चक्कर काटने से निजात मिल जाएगी। जिले में एसबीआई की 20, पीएनबी की 25, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की 27, पूर्वांचल बैंक की 70, इलाहाबाद बैंक की सात, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक की पांच-पांच शाखाओं समेत विभिन्न बैंकों की कुल 181 शाखाएं हैं, जिनके 20 लाख से अधिक ग्राहक हैं।
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कैशलेस पेमेंट के लिए बैंकों ने 3000 यूपीआई और 40000 एटीएम जारी किया है। 7500 यूजर्स भीम ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं। 350 बैंकों ने यूएस मशीन जारी किया है। आरटीजीएस के माध्यम से खाते से खाते में रुपये भेजने में दोगुने की वृद्घि हुई है। वहीं जनपद के बैंकों में नकद लेन-देन में 30 प्रतिशत की कमी आई है। उनका कहना था कि अस्पताल, मेडिकल स्टोर्स, कपड़े, किराना, विद्यालय सहित अन्य प्रमुख स्थलों पर भी कैशलेस सिस्टम शुरू हो जाए तो बैंकों पर निर्भरता कम हो जाएगी।
लीड बैंक के जिला प्रबंध्ाक हीरा लाल कुश्ावाहा ने बताया कि बैंकों में रुपये की किल्लत पहले से कम हुई है। नकद लेन-देन में भी तीस प्रतिशत की कमी आई है। क्योंकि बैंकों ने काफी संख्या में यूपीआई ऐप, यूएस मशीनें और एटीएम जारी कर लोगों को सहूलियत प्रदान की है। इसके अलावा बैंकों की तरफ से आरटीजीएस, इंटरनेट बैंकिंग सहित कई प्रकार की फैसिलिटी अपने ग्राहकों को दी जा रही है। इससे कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा मिल रहा है। धीरे-धीरे कैश की समस्या दूर हो जाएगी।