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Kushinagar News: इंद्र का अहंकार नष्ट करने के लिए भगवान ने की थी गोवर्धन लीला
Tue, 30 Sep 2025 02:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 30 Sep 2025 02:18 AM IST
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सुकरौली। क्षेत्र के पिपरा लालमन में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन कथा वाचक ने गोवर्धन लीला की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण देवराज इंद्र का अहंकार नष्ट करने के लिए गोवर्धन लीला किया था।
कथा वाचक आचार्य अभियेंद्र गर्गाचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी शुरू कर दी। इससे देवराज इंद्र क्रोधित होकर मूसलाधार बारिश करने लगे। इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों और जानवरों की रक्षा की। कथा वाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि इसमें गहरे आध्यात्मिक, नैतिक और पर्यावरणीय संदेश छिपे हुए हैं। इस लीला से भगवान श्रीकृष्ण ने न केवल इन्द्रदेव के अहंकार को नष्ट किया, बल्कि भक्तों को यह शिक्षा भी दी कि सच्ची भक्ति प्रेम और सेवा में निहित होती है। इसके बाद उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और अन्य ग्रंथों में विस्तार से वर्णन किया।
इस दौरान वीरेंद्र मिश्र, राकेश मिश्रा, रमाशंकर मिश्र, भगवान मिश्र, राधेश्याम मिश्र, अरिहंत, अनय, राधे रमन आदि मौजूद रहे।
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कथा वाचक आचार्य अभियेंद्र गर्गाचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी शुरू कर दी। इससे देवराज इंद्र क्रोधित होकर मूसलाधार बारिश करने लगे। इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों और जानवरों की रक्षा की। कथा वाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि इसमें गहरे आध्यात्मिक, नैतिक और पर्यावरणीय संदेश छिपे हुए हैं। इस लीला से भगवान श्रीकृष्ण ने न केवल इन्द्रदेव के अहंकार को नष्ट किया, बल्कि भक्तों को यह शिक्षा भी दी कि सच्ची भक्ति प्रेम और सेवा में निहित होती है। इसके बाद उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और अन्य ग्रंथों में विस्तार से वर्णन किया।
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इस दौरान वीरेंद्र मिश्र, राकेश मिश्रा, रमाशंकर मिश्र, भगवान मिश्र, राधेश्याम मिश्र, अरिहंत, अनय, राधे रमन आदि मौजूद रहे।