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Kushinagar News: महापरिनिर्वाण मंदिर में रैंप नहीं, दिव्यांगों को दिक्कत
Mon, 24 Mar 2025 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 24 Mar 2025 01:04 AM IST
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मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में सीढ़ी चढ़ती विदेशी महिला पर्यटक। संवाद
पकवा इनार। मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में रैंप के अभाव में दिव्यांग व अशक्त लोगों को परेशानी होती है। उन्हें सीढ़ी चढ़ने में कठिनाई व दूसरे लोगों की मदद से ही मंदिर तक पहुंचाया जाता है। एक दशक से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इस समस्या से निजात के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक धरातल पर नहीं उतर पाया है। इसका खामियाजा यहां आने वाले पर्यटकों को उठाना पड़ता है।
इसके बावजूद पुरातत्व विभाग के जिम्मेदारों को इससे कोई सरोकार नहीं दिखाई दे रहा है। विभाग सिर्फ विभागीय अधिकारियों की तरफ से अब तक रैंप निर्माण के लिए निरीक्षण किए जाने की बात कह रहा है। इस महीने में भी एक निरीक्षण होने की बात सामने आई है। हालांकि वर्तमान में अब तक रैंप बनाए जाने का निर्णय नहीं होने की बात विभाग के जिम्मेदार बता रहे हैं। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल है। यहां देश विदेश के लाखों की संख्या में पर्यटक और सैलानी हर साल आते हैं। इसमें कुछ ऐसे पर्यटक होते हैं, जो दिव्यांग या अशक्त होते हैं, उन्हें चलने में दिक्कत होती है। इससे ऐसे पर्यटकों को मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर की सीढ़ी चढ़ना और लेटी प्रतिमा का दर्शन करना मुश्किल होता है। किसी तरह से उनके साथ आए अन्य पर्यटक मंदिर में ले जाकर दर्शन कराते हैं। यह स्थिति पर्यटक सीजन 27 सितंबर से 31 मार्च के बीच अधिकाधिक बना रहता है। जबकि मंदिर के अंदर बाहर और आसपास पुरातत्व विभाग के कर्मचारी तैनात रहते हैं।
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इसके बावजूद पुरातत्व विभाग के जिम्मेदारों को इससे कोई सरोकार नहीं दिखाई दे रहा है। विभाग सिर्फ विभागीय अधिकारियों की तरफ से अब तक रैंप निर्माण के लिए निरीक्षण किए जाने की बात कह रहा है। इस महीने में भी एक निरीक्षण होने की बात सामने आई है। हालांकि वर्तमान में अब तक रैंप बनाए जाने का निर्णय नहीं होने की बात विभाग के जिम्मेदार बता रहे हैं। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल है। यहां देश विदेश के लाखों की संख्या में पर्यटक और सैलानी हर साल आते हैं। इसमें कुछ ऐसे पर्यटक होते हैं, जो दिव्यांग या अशक्त होते हैं, उन्हें चलने में दिक्कत होती है। इससे ऐसे पर्यटकों को मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर की सीढ़ी चढ़ना और लेटी प्रतिमा का दर्शन करना मुश्किल होता है। किसी तरह से उनके साथ आए अन्य पर्यटक मंदिर में ले जाकर दर्शन कराते हैं। यह स्थिति पर्यटक सीजन 27 सितंबर से 31 मार्च के बीच अधिकाधिक बना रहता है। जबकि मंदिर के अंदर बाहर और आसपास पुरातत्व विभाग के कर्मचारी तैनात रहते हैं।
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