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अभी कई और हैं मौत के कुएं
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गुरवलिया क्षेत्र के मंगलपुरा गांव में ढका कुआं।
- फोटो : KUSHINAGAR
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अभी कई और हैं मौत के कुएं
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। कुएं जल संरक्षण के महत्वपूर्ण साधन हैं तो सनातन धर्म में इनका महत्वपूर्ण स्थान भी है। कई अभिलेख में इन्हें चिह्न के रूप में स्थान दिया गया है। हिंदुओं के कई संस्कार कुएं के बिना अधूरे हैं। बुधवार रात नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के नौरंगिया गांव के स्कूल टोला में वैवाहिक रस्म के दौरान कुएं का स्लैब टूटने से हुए हादसे के बाद इनकी सुरक्षा की जरूरत महसूस की जाने लगी है।
अधिकतर गांवों में प्राचीन कुएं खुले पड़े हैं। संवाददाता ने नौरंगिया की बड़ी घटना के बाद जमीनी हकीकत की पड़ताल की तो गांव के कुओं की भयावह स्थिति सामने आई। क्षेत्र के बरवा राजापाकड़, सपही टड़वा, राजापाकड़, दुमही, खुदरा अहिरौली, पगरा प्रसाद गिरी, पकड़ी गोसाई, सेमरा हर्दो पट्टी, सरिसवा, गुरवलिया, मठिया भोकरिया, नोनियापट्टी, कोरेया, सोंदिया बुजुर्ग, किशुनदेव पट्टी, लवकुश, बेलवा, सपहां, गांगीटीकर, भलुही, तिरमासाहुन, सोहंग, विजेधरा, लवकुश, हाटा, देवपोखर, श्रीरामपट्टी, किशुनदेव पट्टी, बेलवा, मिश्रौली आदि गांवों में कुएं हैं। कुछ अस्तित्व में हैं तो कुछ अस्तित्व विहीन। कुछ खरपतावार से पट गए हैं।
क्षेत्र के करमैनी के मंगलपुरा गांव स्थित एक कुआं झाड़ियों से पटा मिला। सोंदिया बुजुर्ग और दुरखिया टोला में भी कुआं खरपतवार से पटा मिला। यहां एक कुएं को लकड़ी से ढका गया है तो दूसरा खुला मिला। सोंदिया बुजुर्ग के दूसरे टोले में एक कुएं पर सुरक्षा का इंतजाम नहीं था। क्षेत्र के आदित्य विशाल पाठक, जयंत शाही, प्रदीप शाही, हरि गोविंद मिश्र, भुआल गोंड, छोटे तिवारी, मुकेश यादव, मन्नू यादव, अजय यादव, चंद्र प्रकाश सिंह, डॉ. छोटेलाल प्रसाद, अनिल सिंह, पौहारी सिंह आदि ने गांव के कुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करते हुए सुरक्षात्मक उपाय करने की मांग की है।
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गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। कुएं जल संरक्षण के महत्वपूर्ण साधन हैं तो सनातन धर्म में इनका महत्वपूर्ण स्थान भी है। कई अभिलेख में इन्हें चिह्न के रूप में स्थान दिया गया है। हिंदुओं के कई संस्कार कुएं के बिना अधूरे हैं। बुधवार रात नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के नौरंगिया गांव के स्कूल टोला में वैवाहिक रस्म के दौरान कुएं का स्लैब टूटने से हुए हादसे के बाद इनकी सुरक्षा की जरूरत महसूस की जाने लगी है।
अधिकतर गांवों में प्राचीन कुएं खुले पड़े हैं। संवाददाता ने नौरंगिया की बड़ी घटना के बाद जमीनी हकीकत की पड़ताल की तो गांव के कुओं की भयावह स्थिति सामने आई। क्षेत्र के बरवा राजापाकड़, सपही टड़वा, राजापाकड़, दुमही, खुदरा अहिरौली, पगरा प्रसाद गिरी, पकड़ी गोसाई, सेमरा हर्दो पट्टी, सरिसवा, गुरवलिया, मठिया भोकरिया, नोनियापट्टी, कोरेया, सोंदिया बुजुर्ग, किशुनदेव पट्टी, लवकुश, बेलवा, सपहां, गांगीटीकर, भलुही, तिरमासाहुन, सोहंग, विजेधरा, लवकुश, हाटा, देवपोखर, श्रीरामपट्टी, किशुनदेव पट्टी, बेलवा, मिश्रौली आदि गांवों में कुएं हैं। कुछ अस्तित्व में हैं तो कुछ अस्तित्व विहीन। कुछ खरपतावार से पट गए हैं।
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क्षेत्र के करमैनी के मंगलपुरा गांव स्थित एक कुआं झाड़ियों से पटा मिला। सोंदिया बुजुर्ग और दुरखिया टोला में भी कुआं खरपतवार से पटा मिला। यहां एक कुएं को लकड़ी से ढका गया है तो दूसरा खुला मिला। सोंदिया बुजुर्ग के दूसरे टोले में एक कुएं पर सुरक्षा का इंतजाम नहीं था। क्षेत्र के आदित्य विशाल पाठक, जयंत शाही, प्रदीप शाही, हरि गोविंद मिश्र, भुआल गोंड, छोटे तिवारी, मुकेश यादव, मन्नू यादव, अजय यादव, चंद्र प्रकाश सिंह, डॉ. छोटेलाल प्रसाद, अनिल सिंह, पौहारी सिंह आदि ने गांव के कुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करते हुए सुरक्षात्मक उपाय करने की मांग की है।
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