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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन ही दो एसओ और चार सिपाही हुए थे शहीद

Sun, 29 Aug 2021 11:06 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 29 Aug 2021 11:06 PM IST
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The tradition of 27 years will continue, Janmashtami will not be celebrated in the police stations
27 वर्षों की परंपरा रहेगी कायम, थानों में नहीं मनेगी जन्माष्टमी
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1994 में जन्माष्टमी के दिन ही शहीद हो गए थे छह पुलिसकर्मी
पचरुखिया में बांसी नदी के किनारे डकैतों से हुई थी मुठभेड़
दो एसओ सहित छह पुलिसकर्मियों की गई थी जान
पडरौना कोतवाली का स्मृति द्वार और शिलापट्ट देता ही उनकी शहादत की गवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। 30 अगस्त, 1994 की तारीख कुशीनगर पुलिस को कभी नहीं भूलती। चाहे बड़े अफसर हों या, थानेदार, दरोगा अथवा सिपाही। उस रात वर्दी की आन और लोगों की सुरक्षा के लिए पचरुखिया में जंगल डकैतों से मुठभेड़ के दौरान तरयासुजान थाने के तत्कालीन एसओ अनिल पांडेय और कुबेरस्थान के एसओ राजेंद्र यादव सहित छह पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। यही वजह है कि उस घटना के बाद से कुशीनगर के किसी भी थाने में जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती है। पडरौना कोतवाली का स्मृति द्वार और यहां का शिलापट्ट उन जांबाज पुलिसकर्मियों की गवाही देता है। इस बार भी पुलिस जन्माष्टमी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में जुटी है, लेकिन परंपरा को कायम रखते हुए जन्माष्टमी किसी भी थाने में न मनाने का इस बार भी निर्णय लिया गया है। नब्बे के दशक में गंडक नदी और बिहार से लगे जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में जंगल डकैतों वर्चस्व था। डकैत अपहरण, लूट, हत्या जैसी वारदातों के बाद वापस लौट जाते थे। इन वारदातों को रोकने के लिए ही शासन ने सीमावर्ती क्षेत्र में हनुमानगंज, जटहां बाजार व बरवापट्टी थाना खोला था। इसी दौरान सब इंस्पेक्टर अनिल पांडेय की जिले में तैनाती हुई। 13 मई 1994 को देवरिया से अलग होकर कुशीनगर जिला अस्तित्व में आया, तो अनिल पांडेय को बिहार बॉर्डर से सटे तरयासुजान थाने पर तैनाती मिली। 30 अगस्त 1994 की रात में कुबेरस्थान थानाक्षेत्र के पचरुखिया घाट के दूसरी तरफ बांसी नदी के किनारे डकैतों के आने की सूचना पुलिस को मिली थी। उस दिन जन्माष्टमी था। कुशीनगर के पहले एसपी के रूप में कार्य संभालने वाले तत्कालीन एसपी बुद्धचंद ने पडरौना के कोतवाल योगेंद्र प्रताप, तरयासुजान थाने के तत्कालीन एसओ अनिल और कुबेरस्थान थाने के तत्कालीन एसओ राजेंद्र यादव को वहां भेजा था। रात के करीब साढ़े नौ बजे वहां जाने पर पता चला कि डकैत पचरुखिया गांव में हैं, तो पुलिसकर्मियों नाविक भुखल को बुलाकर डेंगी (छोटी नाव) को उस पार ले गए। भुखल ने दो बार में डेंगी से पुलिसकर्मियों को बांसी नदी के उस पार पहुंचा दिया, लेकिन डकैतों का सुराग नहीं लगा। पहली खेप के पुलिसकर्मी वापस हो गए, लेकिन दूसरी टीम के डेंगी में सवार होकर आगे बढ़ते ही बदमाशों ने पुलिस टीम पर बम से हमला कर दिया था और ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगे। इसमें पहले तो नाविक भुखल व सिपाही विश्वनाथ यादव को गोली लगी, जिससे डेंगी अनियंत्रित हो गई। इसी डेंगी में एसओ अनिल पांडेय और अन्य पुलिसकर्मी थे। जवाबी फायरिंग करते रहे। मुठभेड़ थमने के बाद डेंगी सवार पुलिसकर्मियों की खोजबीन की। जहां तरयासुजान एसओ अनिल पांडेय, कुबेरस्थान के एसओ राजेंद्र यादव, तरयासुजान थाने के आरक्षी नागेंद्र पांडेय, पडरौना कोतवाली में तैनात आरक्षी खेदन सिंह, विश्वनाथ यादव व परशुराम गुप्त मृत पाए गए थे। नाविक भुखल भी मारा गया था, जबकि दरोगा अंगद राय, आरक्षी लालजी यादव, श्यामा शंकर राय और अनिल सिंह सुरक्षित बच गए थे। इस घटना में कोतवाल योगेंद्र सिंह ने कुबेरस्थान थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया था।

नहीं मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
एसपी सचिंद्र पटेल ने बताया कि पचरुखिया में 27 साल पहले जंगल डकैतों से हुई मुठभेड़ में पुलिस विभाग ने अपने छह जांबाज पुलिसकर्मियों को खो दिया था। वह घटना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुई थी। तभी से कुशीनगर के किसी थाने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती है। इस बार भी किसी थाने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाई जाएगी, लेकिन जिले में यह त्योहार शांतिपूर्ण और कोविड गाइडलाइन के तहत मनाए जाएगा। कहीं न डोल मेला निकलेगा और न जुुलूस। इसका पालन कराने के लिए सभी पुलिसकर्मियों को निर्देश दे दिया गया है।
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