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Kushinagar News: जांच की सुस्त चाल... पीड़ितों की टूट रही न्याय की उम्मीद

Sat, 14 Mar 2026 01:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sat, 14 Mar 2026 01:34 AM IST
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The Sluggish Pace of the Investigation... Victims' Hopes for Justice Are Fading
पडरौना। निजी अस्पतालों की मनमानी और इलाज में लापरवाही के मामले थमने के नाम नहीं ले रहे हैं। इसके लिए विभागीय जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल उठते रहते हैं। जब भी कोई बड़ी घटना होती है, स्वास्थ्य विभाग जांच समिति गठित कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेता है। लेकिन, हकीकत यह है कि जांच रिपोर्ट रिपोर्ट कभी समय पर नहीं आती है। जांच के नाम पर महीनों मामले को लटकाया जाता है। इसका सीधा फायदा अस्पताल संचालकों को मिलता है। जांच की सुस्त चाल से पीड़ितों की न्याय की उम्मीद टूट रही है। जांच रिपोर्ट में देरी अस्पताल संचालकों के लिए कवच का काम करती है। किसी भी चिकित्सा लापरवाही की जांच एक निश्चित समय सीमा के अंदर पूरी होनी चाहिए, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत है।
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समय बीतने के साथ पीड़ित परिवार आर्थिक व मानसिक रूप से थकने लगता है। इसी का फायदा उठाकर अस्पताल संचालक बिचौलियों के माध्यम से पीड़ितों से पहले सहानुभूति दिखाते हैं। मामले को रफा-दफा करने के लिए कहीं न कहीं से संपर्क स्थापित कर कोशिश करने लगते हैं। जिसमें कुछ घटनाओं में अस्पताल संचालकों को स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में क्लीन चिट भी मिल जाता है। फिर बेखौफ होकर अस्पताल का संचालन शुरू कर देते हैं।
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कोट:-
निजी अस्पतालों में घटना के बाद जांच के लिए गठित टीम को तय समय में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए जाते हैं। जांच पैनल में शामिल चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों की तरफ से पीड़ितों के बयान दर्ज करने में देरी के चलते रिपोर्ट आने में अधिक समय लग जाता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाती है। वैसे अधिकांश मामलों में पीड़ित ही कार्रवाई नहीं चाहते हैं। इसलिए मामला सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक ही सिमट कर रह जाता है। -डॉ.चंद्रप्रकाश, सीएमओ, कुशीनगर
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केस हिस्ट्री:-
केस 1:-
फरवरी 2026 : कप्तानगंज कस्बे के डीसीएफ चौक स्थित तिरुपति हॉस्पिटल में डिलीवरी के दौरान अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के रामपुर माफी की पूजा देवी पत्नी मंजेश कुमार कन्नौजिया को 7 फरवरी 2026 को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सात फरवरी की रात में ऑपरेशन के दौरान नवजात की मौत हो गई थी, जबकि जच्चा का अब भी इलाज चल रहा है। परिजनों के हंगामे व कार्रवाई की मांग पर स्वास्थ्य टीम के साथ प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. सूर्यभान कुशवाहा ने प्रारंभिक जांच की थी। जांच में उन्होंने अस्पताल संचालक अंगद चौधरी और अस्पताल के डा. आशीष रंजन के नाम से पंजीकृत बताया था। ऑपरेशन डाॅ. सेयानी साहा ने किया था। मौजूदा स्थिति यह है कि इस घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है।
केस 2:-
फरवरी 2026 : नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के कोटवा में संचालित खुशी हास्पिटल में खड्डा के मठिया बुजुर्ग निवासी दीनदयाल की पत्नी और नवजात की मौत से करीब एक महीने पहले बोधी छपरा गांव निवासी 60 वर्षीय सुगिया देवी पत्नी मोतीलाल की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसको लेकर हंगामा भी हुआ था। सीएमओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच कर रही है। जांच की रफ्तार इतनी सुस्त है कि अब तक पीड़ित परिवार का बयान दर्ज होना तो दूर, उनसे किसी ने संपर्क तक नहीं किया है। उधर, पीड़ित परिवार का आरोप है कि हास्पिटल संचालक सुलह समझौते का लगातार दबाव बना रहे हैं। नोडल अफसर डाॅ. राकेश गुप्ता का कहना है कि विभागीय कार्य अधिक होने के चलते जांच में देरी हो रही है। तेजी लाकर जल्द ही जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी जाएगी।


केस 3:-
दिसंबर 2025 : पडरौना शहर के छावनी स्थित एक निजी अस्पताल में सेवरही नगर पंचायत के वार्ड नंबर-18 दीनदयाल नगर निवासी अमित राय की पत्नी स्मिता राय (30) को प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन से प्रसव कराया गया और महिला ने जुड़वा बच्चों एक बेटा और एक बेटी को जन्म दिया। दूसरे दिन सुबह पति अमित ने जब पत्नी से मिलने की बात कही तो डॉक्टर ने मना कर दिया था। इस पर उन्हें संदेह हुआ तो अंदर गए। जहां पर स्टॉफ अपने में कुछ बात कर रहे थे। पूछने पर बताया कि इनकी हालत गंभीर है, रेफर किया जा रहा है। इसके बाद जब अमित पत्नी के पास पहुंचे तो सांस नहीं चल रही थी। सीएमओ डाॅ.चंद्र प्रकाश के निर्देश पर प्रसूता की मौत की जांच के लिए गठित टीम में एक महिला डॉक्टर, एक बेहोशी के डॉक्टर और एक सर्जन को शामिल किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अधिक रक्तस्राव होने से प्रसूता की मौत की पुष्टि हुई थी।
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