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चीनी मिल की संपत्ति पहले थी आंकी गई थी 61 करोड़, अब दो अरब की
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 04 Feb 2018 11:52 PM IST
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चीनी मिल।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। वर्षों से बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल की मौजूदा पैमाइश में इसका कुल क्षेत्रफल करीब आठ हेक्टेयर निकला है। नगर में एक हेक्टेयर जमीन की कीमत करीब 25 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ऐसे में लगभग दो अरब तो केवल पडरौना चीनी मिल के जमीन की कीमत हो रही है, लेकिन प्रशासन ने चार साल पहले के दर पर ही 61.50 करोड़ में चीनी मिल के नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। संयोग यह रहा कि क्रेता कंपनी की भूमिका ही संदेह के घेरे में आ गई, जिससे नीलामी स्थगित कर दी गई। शनिवार को नए सिरे से इस चीनी मिल के जमीन की पैमाइश की गई। दो तहसीलों के राजस्व कर्मियों को लगाकर की गई इस पैमाइश में चीनी मिल की जमीन करीब आठ हेक्टेयर निकली है, जबकि नए-पुराने मिलाकर 89 पेड़ भी इस जमीन में हैं। इनकी कीमत भी लाखों में है।
पडरौना चीनी मिल को एक तरफ फिर से चालू करने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ किसानों का बकाया भुगतान करने के लिए हाईकोर्ट ने मिल को नीलाम करने का निर्देश दे रखा है। बीच का रास्ता निकालते हुए जिला प्रशासन ने मिल को ऐसे हाथों में बेचने की योजना बनाई, जिससे बकाया भुगतान भी हो सके और मिल चालू भी हो जाए।
राजस्व विभाग से जुड़े लोगों की मानी जाए तो पडरौना शहर में एक हेक्टेयर जमीन की कीमत करीब 25 करोड़ रुपये है। इस तरह चीनी मिल की जमीन ही लगभग दो अरब रुपये की हो रही है। इसके अतिरिक्त 89 पेड़ों की कीमत भी लाखों रुपये है। इसके अतिरिक्त गन्ना किसानों, मिल कर्मचारियों और चीनी मिल की पूरी मशीनरी की जो कीमत है, वह अलग है। पडरौना के कानूनगो ने बताया कि इस चीनी मिल के मामले में ही पांच फरवरी को डीएम, एसडीएम सदर, तहसीलदार और उप निबंधक पडरौना को हाईकोर्ट में प्रस्तुत होना है।
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इस राजस्व टीम में शामिल पडरौना तहसील के राजस्व निरीक्षक गजाधर प्रसाद ने बताया कि तीन फरवरी को हुई पैमाइश में पडरौना चीनी मिल की जमीन आठ हेक्टेयर निकली है। इसके अलावा चीनी मिल की जमीन में नए पुराने मिलाकर 89 पेड़ भी हैं। उन्होंने बताया कि नियमत: गेट के अंदर के आवास, बागीचा, कारखाना आदि की जमीन भी आबादी वर्ग 6-2 के अंतर्गत चीनी मिल की संपत्ति ही मानी जाएगी। वहीं एसडीएम सदर अजय नारायण सिंह का कहना था कि राजस्व अभिलेख में चीनी मिल की जमीन जितनी दर्ज है, उतनी ही है। अगर इस बार की पैमाइश में जमीन बढ़ी है तो वह आबादी की होगी।
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पडरौना चीनी मिल को एक तरफ फिर से चालू करने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ किसानों का बकाया भुगतान करने के लिए हाईकोर्ट ने मिल को नीलाम करने का निर्देश दे रखा है। बीच का रास्ता निकालते हुए जिला प्रशासन ने मिल को ऐसे हाथों में बेचने की योजना बनाई, जिससे बकाया भुगतान भी हो सके और मिल चालू भी हो जाए।
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राजस्व विभाग से जुड़े लोगों की मानी जाए तो पडरौना शहर में एक हेक्टेयर जमीन की कीमत करीब 25 करोड़ रुपये है। इस तरह चीनी मिल की जमीन ही लगभग दो अरब रुपये की हो रही है। इसके अतिरिक्त 89 पेड़ों की कीमत भी लाखों रुपये है। इसके अतिरिक्त गन्ना किसानों, मिल कर्मचारियों और चीनी मिल की पूरी मशीनरी की जो कीमत है, वह अलग है। पडरौना के कानूनगो ने बताया कि इस चीनी मिल के मामले में ही पांच फरवरी को डीएम, एसडीएम सदर, तहसीलदार और उप निबंधक पडरौना को हाईकोर्ट में प्रस्तुत होना है।
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इस राजस्व टीम में शामिल पडरौना तहसील के राजस्व निरीक्षक गजाधर प्रसाद ने बताया कि तीन फरवरी को हुई पैमाइश में पडरौना चीनी मिल की जमीन आठ हेक्टेयर निकली है। इसके अलावा चीनी मिल की जमीन में नए पुराने मिलाकर 89 पेड़ भी हैं। उन्होंने बताया कि नियमत: गेट के अंदर के आवास, बागीचा, कारखाना आदि की जमीन भी आबादी वर्ग 6-2 के अंतर्गत चीनी मिल की संपत्ति ही मानी जाएगी। वहीं एसडीएम सदर अजय नारायण सिंह का कहना था कि राजस्व अभिलेख में चीनी मिल की जमीन जितनी दर्ज है, उतनी ही है। अगर इस बार की पैमाइश में जमीन बढ़ी है तो वह आबादी की होगी।