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Kushinagar News: राजा मनु और शतरूपा की तपस्या का हुआ मंचन
Thu, 04 Jun 2026 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:56 AM IST
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फाजिलनगर में चल रहे श्री हरिहर महायज्ञ में रात्रि को रामलीला को मंचन करते कलाकार।स्रोत-सोशल मीड
जोकवा बाजार। क्षेत्र के श्री हरिहर महायज्ञ के दौरान आयोजित रामलीला में मंगलवार की रात राजा मनु और शतरूपा की तपस्या का मंचन हुआ। इस दौरान जयश्रीराम और हर हर महादेव के जयघोष से पूरा पांडाल गूंज उठा।
रामलीला मंचन का शुभारंभ डॉ. कमलेश शाही ने किया। इसके बाद रामलीला कलाकरों ने मनु और शतरूपा की तपस्या का मार्मिक चित्रण किया। सृष्टि के प्रथम मानव और आदर्श दम्पति मनु व शतरूपा ने अपने सांसारिक सुखों को त्यागकर नारायण को पुत्र रूप में प्राप्ति के लिए नैमिषारण्य में कठोर साधना करते हैं। इस घोर और अडिग साधना के प्रभाव से उनके शरीर मात्र अस्थियों का ढांचा रह गया था। वे इतने दुर्बल हो गए थे, लेकिन उनके मन में प्रभु को देखने की अभिलाषा कम नहीं हुई। इस कठिन तप को देखकर स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने उनके पास आकर उन्हें प्रलोभन देने का प्रयास करते हैं, लेकिन उनका ध्यान रत्ती भर भी विचलित नहीं होता है। अंत में भगवान विष्णु (श्रीहरि) ने उन्हें दर्शन देकर उन्हें पुत्र के रूप में अवतरित होने का वचन देते हैं। संवाद
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रामलीला मंचन का शुभारंभ डॉ. कमलेश शाही ने किया। इसके बाद रामलीला कलाकरों ने मनु और शतरूपा की तपस्या का मार्मिक चित्रण किया। सृष्टि के प्रथम मानव और आदर्श दम्पति मनु व शतरूपा ने अपने सांसारिक सुखों को त्यागकर नारायण को पुत्र रूप में प्राप्ति के लिए नैमिषारण्य में कठोर साधना करते हैं। इस घोर और अडिग साधना के प्रभाव से उनके शरीर मात्र अस्थियों का ढांचा रह गया था। वे इतने दुर्बल हो गए थे, लेकिन उनके मन में प्रभु को देखने की अभिलाषा कम नहीं हुई। इस कठिन तप को देखकर स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने उनके पास आकर उन्हें प्रलोभन देने का प्रयास करते हैं, लेकिन उनका ध्यान रत्ती भर भी विचलित नहीं होता है। अंत में भगवान विष्णु (श्रीहरि) ने उन्हें दर्शन देकर उन्हें पुत्र के रूप में अवतरित होने का वचन देते हैं। संवाद
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