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Kushinagar News: बुढि़या माई मंदिर में टेका माथा फिर जंगल के सन्नाटे में माैत को लगाया गले
Mon, 18 May 2026 01:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 18 May 2026 01:49 AM IST
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प्रद्युम्न की मौत के बाद रोते-बिलखते परिजन।स्रोत-सोशल मीडिया
कसया। कुशीनगर के स्वामी विवेकानंद नगर (बेलवा पलकधारी) में रोबोट इंजीनियर 33 वर्षीय प्रद्युम्न कुमार यादव की मौत के बाद मातम पसरा है। घर के बाहर सन्नाटा है और घर के अंदर परिवार के लोगों की आंखें आंसुओं से भरी हुई हैं।
गोरखपुर जिले के कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माई मंदिर के पास प्रद्युम्न के पेड़ से लटककर जान देने की जानकारी होने के बाद परिजनों में चीख-पुकार मची गई। प्रद्युम्न की 72 वर्षीय मां कलावती देवी पुत्र की मौत से बार-बार बेसुध हो जा रही थीं। वहीं,बगल में बैठी बहन पूनम की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे।
परिजन के मुताबिक, प्रद्युम्न कई वर्षों से वैवाहिक विवाद में कानूनी फेरों से आर्थिक मुसीबत व मानसिक तनाव से काफी परेशान था। बड़े भाई राघवेंद्र सिंह यादव ने बताया कि प्रद्युम्न ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोबोट इंजीनियर था। उसने करियर की शुरुआत गुड़गांव से की थी। वर्तमान में मध्य प्रदेश में नौकरी कर रहा था।
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राघवेंद्र ने बताया कि हाल ही में अदालत की तरफ से उसे भरण-पोषण के मामले में आठ हजार रुपये प्रतिमाह खर्चा का तय किया गया था।
इसके साथ ही पिछले बकाए के रूप में 3.84 लाख की वसूली तय होने के बाद उसके खिलाफ वारंट जारी हुआ था। इससे वह गहरे अवसाद में चला गया था। बीते 12 मई को पडरौना कोर्ट में सुनवाई के बाद उससे फोन पर बात हुई थी। उन्होंने बताया कि उसे बहुत समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वह झेल नहीं पाया, इसलिए मौत को गले लगा लिया।
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गोरखपुर जिले के कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माई मंदिर के पास प्रद्युम्न के पेड़ से लटककर जान देने की जानकारी होने के बाद परिजनों में चीख-पुकार मची गई। प्रद्युम्न की 72 वर्षीय मां कलावती देवी पुत्र की मौत से बार-बार बेसुध हो जा रही थीं। वहीं,बगल में बैठी बहन पूनम की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे।
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परिजन के मुताबिक, प्रद्युम्न कई वर्षों से वैवाहिक विवाद में कानूनी फेरों से आर्थिक मुसीबत व मानसिक तनाव से काफी परेशान था। बड़े भाई राघवेंद्र सिंह यादव ने बताया कि प्रद्युम्न ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोबोट इंजीनियर था। उसने करियर की शुरुआत गुड़गांव से की थी। वर्तमान में मध्य प्रदेश में नौकरी कर रहा था।
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राघवेंद्र ने बताया कि हाल ही में अदालत की तरफ से उसे भरण-पोषण के मामले में आठ हजार रुपये प्रतिमाह खर्चा का तय किया गया था।
इसके साथ ही पिछले बकाए के रूप में 3.84 लाख की वसूली तय होने के बाद उसके खिलाफ वारंट जारी हुआ था। इससे वह गहरे अवसाद में चला गया था। बीते 12 मई को पडरौना कोर्ट में सुनवाई के बाद उससे फोन पर बात हुई थी। उन्होंने बताया कि उसे बहुत समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वह झेल नहीं पाया, इसलिए मौत को गले लगा लिया।