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Kushinagar News: शासन तक पहुंचा जमीन के बदले जमीन का मामला, मंजूरी का इंतजार
Sun, 06 Jul 2025 01:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 06 Jul 2025 01:06 AM IST
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पकवा इनार। महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य कुशीनगर में चल रहा है, लेकिन विवि निर्माण के बीच में पड़ रहे किसानों की भूमि का प्रकरण अभी भी नहीं सुलझ पाया है।
जिला प्रशासन ने इसे सुलझाने के लिए शासन को उन किसानों से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर भेज चुका है, जिनकी भूमि विवि निर्माण में पड़ रही है। यह किसान न तो अब तक मुआवजा लिए हैं और न ही उनके जमीन का अधिग्रहण हुआ है। प्रशासन किसानों को भूमि के बदले भूमि देने के लिए शासन से स्वीकृति मिलने के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई करने का दावा कर रहा है। उधर, किसानों में इस रवैए को लेकर नाराजगी है। वह जल्द निस्तारण न होने पर आंदोलन करने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।
बीते तीन जुलाई को अनिरुद्धवा के किसानों ने प्रदर्शन कर कड़ा विरोध जता चुके हैं। कृषि विवि का निर्माण में 390 एकड़ भूमि में होना तय किया गया है। वर्तमान में कुशीनगर में रामाभार स्तूप के नजदीक 145.82 एकड़ भूमि पर स्वीकृत व परिवर्द्धित डिजाइन के मुताबिक निर्माण कार्य चल रहा है।
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गौरतलब यह है कि विवि की भूमि के बीच-बीच में कसया, सबया, विशुनपुर विंदवलिया और अनिरुद्धवा गांव के कुछ किसानों की भूमि है। जिनकी भूमि विवि निर्माण में पड़ रही है। इन किसानों को उनकी भूमि के बदले भूमि देने का राजस्व टीम ने एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेज दिया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
राजस्व विभाग के मुताबिक किसानों की विवि निर्माण के बीच में पड़ने वाली किसानों की अधिकांश भूमि का एरिया कम है। इसलिए किसानों को उनके भूमि का विनिमय एक तरफ एक ही जगह मुहैया कराया जाना तय किया जा रहा है। इसका खाका लगभग तैयार कर लिया गया है।
शहीद भगत सिंह नगर के सभासद प्रभुनाथ सिंह ने कहा कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है और प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है, लेकिन अभी भी इसको लेकर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। किसान असमंजस की स्थिति में हैं।
किसान मनोज गोंड ने कहा कि कृषि विवि निर्माण से किसानों को लाभ मिलेगा। लेकिन निर्माण के बीच में पड़ने वाले किसानों की भूमि की अदला-बदली में भी प्रशासन को रुचि लेकर तेजी के साथ दावे के मुताबिक भूमि उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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जिला प्रशासन ने इसे सुलझाने के लिए शासन को उन किसानों से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर भेज चुका है, जिनकी भूमि विवि निर्माण में पड़ रही है। यह किसान न तो अब तक मुआवजा लिए हैं और न ही उनके जमीन का अधिग्रहण हुआ है। प्रशासन किसानों को भूमि के बदले भूमि देने के लिए शासन से स्वीकृति मिलने के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई करने का दावा कर रहा है। उधर, किसानों में इस रवैए को लेकर नाराजगी है। वह जल्द निस्तारण न होने पर आंदोलन करने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।
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बीते तीन जुलाई को अनिरुद्धवा के किसानों ने प्रदर्शन कर कड़ा विरोध जता चुके हैं। कृषि विवि का निर्माण में 390 एकड़ भूमि में होना तय किया गया है। वर्तमान में कुशीनगर में रामाभार स्तूप के नजदीक 145.82 एकड़ भूमि पर स्वीकृत व परिवर्द्धित डिजाइन के मुताबिक निर्माण कार्य चल रहा है।
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गौरतलब यह है कि विवि की भूमि के बीच-बीच में कसया, सबया, विशुनपुर विंदवलिया और अनिरुद्धवा गांव के कुछ किसानों की भूमि है। जिनकी भूमि विवि निर्माण में पड़ रही है। इन किसानों को उनकी भूमि के बदले भूमि देने का राजस्व टीम ने एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेज दिया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
राजस्व विभाग के मुताबिक किसानों की विवि निर्माण के बीच में पड़ने वाली किसानों की अधिकांश भूमि का एरिया कम है। इसलिए किसानों को उनके भूमि का विनिमय एक तरफ एक ही जगह मुहैया कराया जाना तय किया जा रहा है। इसका खाका लगभग तैयार कर लिया गया है।
शहीद भगत सिंह नगर के सभासद प्रभुनाथ सिंह ने कहा कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है और प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है, लेकिन अभी भी इसको लेकर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। किसान असमंजस की स्थिति में हैं।
किसान मनोज गोंड ने कहा कि कृषि विवि निर्माण से किसानों को लाभ मिलेगा। लेकिन निर्माण के बीच में पड़ने वाले किसानों की भूमि की अदला-बदली में भी प्रशासन को रुचि लेकर तेजी के साथ दावे के मुताबिक भूमि उपलब्ध कराई जानी चाहिए।