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Kushinagar News: विदेश में अच्छी कमाई का लोभ खराब कर रहा जिदंगी

Sat, 17 Jan 2026 01:16 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jan 2026 01:16 AM IST
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The lure of high earnings abroad is ruining lives.
पडरौना। अवैध ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से परिवार की मजबूती बढ़ाने की मजबूरी लिए विदेश जाने वाले अक्सर ही एजेंट और कंपनी मालिक के कारण फंस जाते हैं। सात समुंदर पार दुबई, मलेशिया, किर्गिस्तान, सऊदी आदि विभिन्न खाड़ी देशों में जाने के बाद जब लोग फंसते हैं तो स्वदेश में कम रुपयों में आजाद भरी अच्छी जिंदगी याद आती है।
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प्रवासी भारतीय मदद समूह निस्वार्थ के पहल पर जब ये लोग अपने गांव पहुंचते हैं तो विदेशी करेंसी की चमक से बेहतर इन्हें भारतीय रुपया अच्छा लगता है। सात समुंदर पार से बड़ी कठिनाइयों के बाद लौटने वाले लोगों का कहना है कि नमक रोटी खाएंगे...विदेश कभी नहीं जाएंगे।
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कहा कि कोई भी व्यक्ति विदेश मजबूत स्थिति में नहीं जाता वहां जाना हमारी मजबूरी होती है। बावजूद इसके हम अपने शहर में ही सीमित रुपयों में ही परिवार के साथ खुशियां साझा करेंगे। छोटे से स्वरोजगार से ही अपने शहर में आय का साधन बनाएंगे। इसके अलावा जिसे रोजगार की जरूरत हो वह आज भी देश के बड़े शहरों में रुख कर वहां अपनी काबिलियत पर जगह पा सकता है।
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बेहतर कमाई और आर्थिक मजबूती के सपना दिखाकर बेरोजगारी जैसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए खाड़ी देशों में भेजे जा रहे युवाओं की जिंदगी वहां जाने पर संकट में पड़ती जा रही है। पुलिस और प्रशासन की सख्ती के बावजूद अवैध एजेंटों के जरिए ठगी और शोषण के मामले थम नहीं रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी और मजबूरी का फायदा उठाकर दलाल सक्रिय हैं, जो युवाओं को अधूरी जानकारी और फर्जी दस्तावेजों पर विदेश भेज रहे हैं। पिछले दिनों हाटा क्षेत्र निवासी शिवा सिंह खाड़ी देश से वापस लौटे हैं। परिजनों और शिवा के मुताबिक उसे किर्गिस्तान का वीजा देकर कजाकिस्तान भेजा गया और उसे प्रतिबंधित मांस खिलाया जा रहा था। जिलाधिकारी और प्रवासी भारतीय मदद समूह के प्रयास से वह पिछले दिनों वापस लौटा है। इसके अलावा थाना अहिरौली क्षेत्र के चिलुआ बाजार के रहने वाले और अन्य लोग भी कजाकिस्तान में फंसे हैं।
जानकारी के अनुसार उन्हें बेहतर नौकरी और मोटी सैलरी का लालच देकर एक एजेंट ने विदेश भेजा था। वहां पहुंचने के बाद हालात विपरीत हो गए। तय शर्तों से अधिक काम लिया गया, वेतन समय पर नहीं मिला और कथित तौर पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना भी दी गई। कम पढ़े लिखे और बेरोजगारी जैसी मजबूरी के कारण लोग फंस जाते हैं। इसमें अधिकांश लोगों की कई महीनों तक फंसे रहने के बाद किसी तरह उनकी वापसी संभव हो सकी।

लौटने के बाद उन्होंने अपने अनुभव को ‘’डरावना सपना’’ बताया है। कई और युवक अभी भी फंसे हैं। सूत्र बताते हैं कि शिवा अकेले नहीं हैं। जिले के हाटा, कसया, पडरौना और कप्तानगंज क्षेत्रों के कई युवक अभी भी खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं। इसके अलावा पूर्वांचल में अधिकांश संख्या में लोग खाड़ी देशों में रहते हैं।
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