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Kushinagar News: विदेशी सैलानियों काे भा रही बुद्ध की धरती
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महा परिनिर्वाण मंदिर में पूजा अर्चना करते बौद्ध भिक्षु।
कसया (कुशीनगर)। महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली बौद्ध अनुयायियों के लिए प्रमुख आस्था केंद्र है। यहां की ऐतिहासिकता और बौद्ध विरासत विदेशी सैलानियों को आकर्षित कर रही है। कोविड काल के बाद विदेशी पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।
वर्ष 2024 में 2.51 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक कुशीनगर पहुंचे। वर्ष 2025 में अगस्त तक 1.68 लाख से अधिक पर्यटक आ चुके थे। हर वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इस बार इसकी थीम ‘पर्यटन और सतत परिवर्तन’ है। 27 सितंबर के आसपास यहां पर्यटन सीजन शुरू होता है, जो मार्च तक चलता है। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2022 तक पर्यटकों की संख्या कम रही थी। वर्ष 2023 से इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार ने कुशीनगर को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई है। बौद्ध देशों के अलावा कनाडा, मलयेशिया, बांग्लादेश, कोरिया और ताइवान से भी पर्यटक यहां आते हैं।
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बढ़ीं पर्यटन सुविधाएं
पर्यटन विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पर्यटकों की सुविधा के लिए कई कार्य कराए हैं। बुद्ध थीम पार्क, लाइट एंड साउंड सिस्टम और पर्यटक सहायता केंद्र जैसी सुविधाएं बनी हैं। महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में मेडिटेशन सेंटर, रैंप और नई बेंच तैयार की गई हैं। दिव्यांग पर्यटकों के लिए भी आवागमन सुगम बनाया गया है। रामाभार स्तूप और माथा कुंवर मंदिर परिसर में कल्चरल नोटिस बोर्ड लगे हैं।
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स्थानीय कारोबार को लाभ
पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय कारोबार को भी सहारा मिल रहा है। कुशीनगर में 25 से अधिक मॉनेस्ट्री, होटल और गेस्ट हाउस संचालित हैं। इस वर्ष करीब 6 नए होटल और गेस्ट हाउस जुड़े हैं। इससे पर्यटकों के ठहरने के विकल्प बढ़े हैं। होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और हस्तशिल्प जैसे कारोबार को रोजगार व आय के अवसर मिलते हैं।
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आंकड़ों में बढ़ता कुशीनगर का पर्यटन
वर्ष
भारतीय पर्यटक
विदेशी पर्यटक
2022
8,48,631
41,053
2023
19,27,153
2,13,753
2024
19,96,662
2,51,251
2025 (अगस्त तक)
15,81,913
1,68,375
नोट: 2025 के आंकड़े अगस्त तक के हैं।
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पर्यटकों के लिए इस बार क्या खास
• बुद्ध थीम पार्क और लाइट एंड साउंड सिस्टम
• पर्यटकों के लिए सहायता केंद्र
• महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में मेडिटेशन सेंटर
• पर्यटकों के बैठने के लिए नई बेंच
• आवागमन के लिए पाथवे और रैंप
• दिव्यांग पर्यटकों के लिए सुविधाजनक आवागमन
• रामाभार, माथा कुंवर और महापरिनिर्वाण परिसर में कल्चरल नोटिस बोर्ड
• होटल और गेस्ट हाउस की संख्या में बढ़ोतरी
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कोविड का प्रभाव वर्ष 2022 में भी दिखा था। वर्ष 2023 से कुशीनगर में इसका असर नहीं रहा और विदेशी पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। पर्यटन सुविधाओं के विकास का कार्य लगातार कराया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। -डाॅ. प्राण रंजन, पर्यटन सूचना अधिकारी, कुशीनगर
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पर्यटन दिवस की 1980 से हुई शुरुआत
विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत वर्ष 1980 में हुई थी। सितंबर 1979 में स्पेन के टोरेमोलिनोस में आयोजित विश्व पर्यटन संगठन की महासभा के तीसरे सत्र में इसे मनाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 27 सितंबर 1980 को पहली बार विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया। 27 सितंबर की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि 27 सितंबर 1970 को विश्व पर्यटन संगठन के संविधान को अपनाया गया था। इस दिवस का उद्देश्य पर्यटन के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। सतत पर्यटन के माध्यम से प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया जाता है।
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वर्ष 2024 में 2.51 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक कुशीनगर पहुंचे। वर्ष 2025 में अगस्त तक 1.68 लाख से अधिक पर्यटक आ चुके थे। हर वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इस बार इसकी थीम ‘पर्यटन और सतत परिवर्तन’ है। 27 सितंबर के आसपास यहां पर्यटन सीजन शुरू होता है, जो मार्च तक चलता है। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2022 तक पर्यटकों की संख्या कम रही थी। वर्ष 2023 से इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार ने कुशीनगर को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई है। बौद्ध देशों के अलावा कनाडा, मलयेशिया, बांग्लादेश, कोरिया और ताइवान से भी पर्यटक यहां आते हैं।
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बढ़ीं पर्यटन सुविधाएं
पर्यटन विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पर्यटकों की सुविधा के लिए कई कार्य कराए हैं। बुद्ध थीम पार्क, लाइट एंड साउंड सिस्टम और पर्यटक सहायता केंद्र जैसी सुविधाएं बनी हैं। महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में मेडिटेशन सेंटर, रैंप और नई बेंच तैयार की गई हैं। दिव्यांग पर्यटकों के लिए भी आवागमन सुगम बनाया गया है। रामाभार स्तूप और माथा कुंवर मंदिर परिसर में कल्चरल नोटिस बोर्ड लगे हैं।
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स्थानीय कारोबार को लाभ
पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय कारोबार को भी सहारा मिल रहा है। कुशीनगर में 25 से अधिक मॉनेस्ट्री, होटल और गेस्ट हाउस संचालित हैं। इस वर्ष करीब 6 नए होटल और गेस्ट हाउस जुड़े हैं। इससे पर्यटकों के ठहरने के विकल्प बढ़े हैं। होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और हस्तशिल्प जैसे कारोबार को रोजगार व आय के अवसर मिलते हैं।
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आंकड़ों में बढ़ता कुशीनगर का पर्यटन
वर्ष
भारतीय पर्यटक
विदेशी पर्यटक
2022
8,48,631
41,053
2023
19,27,153
2,13,753
2024
19,96,662
2,51,251
2025 (अगस्त तक)
15,81,913
1,68,375
नोट: 2025 के आंकड़े अगस्त तक के हैं।
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पर्यटकों के लिए इस बार क्या खास
• बुद्ध थीम पार्क और लाइट एंड साउंड सिस्टम
• पर्यटकों के लिए सहायता केंद्र
• महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में मेडिटेशन सेंटर
• पर्यटकों के बैठने के लिए नई बेंच
• आवागमन के लिए पाथवे और रैंप
• दिव्यांग पर्यटकों के लिए सुविधाजनक आवागमन
• रामाभार, माथा कुंवर और महापरिनिर्वाण परिसर में कल्चरल नोटिस बोर्ड
• होटल और गेस्ट हाउस की संख्या में बढ़ोतरी
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कोविड का प्रभाव वर्ष 2022 में भी दिखा था। वर्ष 2023 से कुशीनगर में इसका असर नहीं रहा और विदेशी पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। पर्यटन सुविधाओं के विकास का कार्य लगातार कराया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। -डाॅ. प्राण रंजन, पर्यटन सूचना अधिकारी, कुशीनगर
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पर्यटन दिवस की 1980 से हुई शुरुआत
विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत वर्ष 1980 में हुई थी। सितंबर 1979 में स्पेन के टोरेमोलिनोस में आयोजित विश्व पर्यटन संगठन की महासभा के तीसरे सत्र में इसे मनाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 27 सितंबर 1980 को पहली बार विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया। 27 सितंबर की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि 27 सितंबर 1970 को विश्व पर्यटन संगठन के संविधान को अपनाया गया था। इस दिवस का उद्देश्य पर्यटन के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। सतत पर्यटन के माध्यम से प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया जाता है।